वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीतियों और अमरीकी सरकार के तरलता सहायता उपायों का व्यापक असर दिखाई दे रहा है। वित्तीय संस्थान एमयूएफजी की शोध टीम ने जुलाई में आयोजित अमरीकी फेडरल रिजर्व की मुक्त बाजार समिति (FOMC) की बैठक के आधिकारिक विवरण का भाषा विश्लेषण तकनीक यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए गहन अध्ययन किया है। इस विस्तृत अध्ययन से संकेत मिलता है कि केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता मुद्रास्फीति के दबावों को लेकर बेहद सतर्क हैं और ब्याज दरों में आगे बढ़ोतरी का समर्थन करने वाले सदस्यों का दायरा बढ़ रहा है। हालांकि, इसी दौरान अमरीकी ट्रेजरी विभाग द्वारा बाजार में बॉन्ड बायबैक योजना के अचानक विस्तार की घोषणा की गई, जिसके कारण मुद्रा बाजार, कीमती धातुओं और डिजिटल परिसंपत्तियों पर फेड की बैठक के हॉकिस संदेश का प्रभाव सीमित रहा है।
एमयूएफजी का एआई चालित भाषा विश्लेषण और फेडरल रिजर्व का हॉकिस रुख
एमयूएफजी के विश्लेषकों ने फेडरल रिजर्व की बैठक के लिखित विवरण का विश्लेषणात्मक स्कोर निकालने के लिए उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता एल्गोरिदम का प्रयोग किया। शोध टीम के अनुसार, टेक्स्टual एनालिसिस में जुलाई की बैठक के मिनट्स को पहले की तुलना में अधिक सख्त या हॉकिस श्रेणी में रखा गया है। नीति निर्माताओं के बीच इस बात पर व्यापक सहमति देखी गई कि अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति की प्रत्याशा को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक नीति को कड़ा बनाए रखना आवश्यक हो सकता है। अधिकारियों ने माना कि मांग में बनी तेजी के कारण मूल्य वृद्धि का दबाव बना हुआ है, जिससे नीतिगत दरों में आगे वृद्धि का आधार मजबूत हो रहा है।
शोध रिपोर्ट में इस बात पर विशेष बल दिया गया कि बैठक के दौरान कृत्रिम बुद्धिमत्ता को महंगाई के एक नए कारक के रूप में चिन्हित किया गया है। कई प्रतिभागियों ने रेखांकित किया कि विभिन्न उद्योगों में एआई से जुड़े पूंजीगत निवेश और तकनीक अपनाने पर हो रहे भारी खर्च से अर्थव्यवस्था में कुल मांग यानी एग्रीगेट डिमांड में बढ़ोतरी हो रही है। यह मांग अल्पकालिक अवधि में व्यापक मूल्य दबाव पैदा कर रही है। हालांकि, इसके साथ ही कई अन्य अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि भविष्य में एआई तकनीक के व्यापक इस्तेमाल से व्यावसायिक उत्पादकता में सुधार होगा, आपूर्ति का दायरा बढ़ेगा और अंततः उत्पादन लागत में गिरावट आएगी। इस प्रकार फेडरल रिजर्व एआई निवेश को निकट भविष्य के लिए मुद्रास्फीति का जोखिम मान रहा है, जबकि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से इसे महंगाई घटाने वाला यानी डिसइन्फ्लेशनरी कारक मान रहा है।
टैरिफ प्रभाव में कमी और नीतिगत नरमी का सूक्ष्म संदेश
यद्यपि समग्र मिनट्स का रुख सख्त दिखाई देता है, लेकिन एमयूएफजी के टेक्स्टual एनालिसिस ने बैठक के दौरान टैरिफ यानी सीमा शुल्क पर हुई चर्चा में एक सूक्ष्म डोविश या नरम संकेत की पहचान की है। बैठक के विवरण में दर्ज एक विशिष्ट वाक्य ने एमयूएफजी के हॉकिस-डोविश विश्लेषण मॉडल में सबसे कम यानी सबसे अधिक डोविश स्कोर प्राप्त किया। उस वाक्य में कहा गया था कि कई प्रतिभागियों का आकलन है कि अतीत में बढ़ाए गए टैरिफ का मूल्य स्तर पर पड़ने वाला प्रभाव अब काफी हद तक पूरा हो चुका है, और हाल ही में घोषित नए टैरिफ का मापी गई मुद्रास्फीति पर असर सीमित रहने की संभावना है।
विश्लेषकों का मानना है कि नीति निर्माताओं का यह दृष्टिकोण दर्शाता है कि केंद्रीय बैंक अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार शुल्कों को महंगाई बढ़ाने वाले स्थायी या बढ़ते हुए स्रोत के रूप में नहीं देख रहा है। टैरिफ से जुड़े मुद्रास्फीति दबाव के कमजोर पड़ने से फेडरल रिजर्व को अपनी भावी ब्याज दर नीति को अधिक संतुलित और आंकड़ों पर आधारित बनाने का अवसर मिलेगा। यही कारण है कि बाजार में इस संदेश को नीतिगत दर चक्र के अंतिम चरण के रूप में देखा जा रहा है।
अमरीकी ट्रेजरी विभाग की अभूतपूर्व बायबैक घोषणा और तरलता सहायता
फेडरल रिजर्व के ब्योरों के बीच वित्तीय बाजारों का मुख्य ध्यान अमरीकी ट्रेजरी विभाग की एक अप्रत्याशित घोषणा पर केंद्रित हो गया। ट्रेजरी विभाग ने अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर बुधवार को 12:32 GMT पर बाजार में तरलता बढ़ाने से जुड़ी अपनी योजना सार्वजनिक की। विभाग ने स्पष्ट किया कि वह 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की अवधि वाले सरकारी बॉन्ड क्षेत्रों में अपनी बायबैक कार्रवाइयों के आकार को कम से कम दोगुना करेगा।
इस नई घोषणा के तहत, प्रत्येक बायबैक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को पहले के 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नया नियम 9 सितंबर से प्रभावी होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। अमरीकी ट्रेजरी द्वारा बॉन्ड बाजार में तरलता का यह बड़ा प्रवाह शुरू किए जाने की खबर ने निवेशकों के बीच जोखिम लेने की क्षमता को बढ़ाया है। इस घोषणा के व्यापक प्रभाव के कारण ही फेडरल रिजर्व के हॉकिस मिनट्स का विदेशी मुद्रा विनिमय दरों पर अपेक्षित दबाव नहीं बन सका।
विदेशी मुद्रा बाजार की प्रतिक्रिया: GBP/USD और EUR/USD
ट्रेजरी विभाग के कदम से विदेशी मुद्रा बाजार में फेड मिनट्स की प्रतिक्रिया बेहद सीमित और शांत रही। ब्रिटिश पाउंड और अमरीकी डॉलर की जोड़ी GBP/USD गुरुवार को यूरोपीय कारोबारी सत्र के दौरान 1.3600 के स्तर के आसपास एक सीमित दायरे में कारोबार करती दिखाई दी। यह 11 मई के बाद दर्ज किए गए अपने उच्चतम स्तर से थोड़ा नीचे आ चुकी है। अमरीकी डॉलर के बिकवालों ने फिलहाल अपनी बिकवाली रोक दी है, क्योंकि बाजार इस बात का मूल्यांकन कर रहे हैं कि अमरीकी ट्रेजरी का बायबैक प्लान बाजार की दिशा बदलने में कितना सक्षम होगा। अब निवेशकों की नजरें आने वाले अमरीकी आर्थिक आंकड़ों और मध्य पूर्व के घटनाक्रमों पर टिकी हैं।
इसी तरह, यूरो और अमरीकी डॉलर की विनिमय दर EUR/USD यूरोपीय सत्र में 1.1700 के स्तर से ठीक नीचे एक बुलिश कंसोलिडेशन चरण में प्रवेश कर चुकी है। इससे पहले इस जोड़ी ने मई के उत्तरार्ध के बाद का अपना उच्चतम स्तर छुआ था। अमरीकी डॉलर में आई मामूली स्थिरता के बाद यूरो के खरीदार नया दांव लगाने से पहले 1.1700 के स्तर से ऊपर स्पष्ट ब्रेकआउट का इंतजार कर रहे हैं। विदेशी मुद्रा व्यापारी अब अमरीकी जॉबलेस क्लेम्स के आंकड़ों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक जोखिमों का बारीकी से विश्लेषण कर रहे हैं।
सर्राफा बाजार की चाल: 4,500 डॉलर के नीचे स्थिर बना हुआ है सोना
अंतरराष्ट्रीय कीमती धातु बाजार में सोने की कीमतों में भी हल्का मुनाफावसूली का दौर देखा गया। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान सोना मामूली इंट्राडे गिरावट के साथ 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर से नीचे कारोबार कर रहा था। हालांकि, इसके बावजूद सोने की कीमतें इस गुरुवार को दर्ज किए गए जून की शुरुआत के बाद के अपने उच्चतम स्तर के काफी करीब बनी हुई हैं।
फेड मिनट्स के सख्त संदेशों के बीच अमरीकी डॉलर के तीन महीने के निचले स्तर से उबरने के कारण सर्राफा बाजार में तेजी देखने वाले निवेशकों ने कुछ मुनाफा बुक किया, जिससे सोने पर दबाव बना। हालांकि, अमरीकी बॉन्ड यील्ड्स में आ रही गिरावट ने सोने की कीमतों को ज्यादा नीचे जाने से रोक रखा है। इसके अलावा, मध्य पूर्व में बनी भू-राजनीतिक अनिश्चितता और ईरान से जुड़े क्षेत्रीय तनाव सोने को एक सुरक्षित निवेश के रूप में सहारा दे रहे हैं।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार: XRP, SOL और ADA का तकनीकी आउटलुक
अमरीकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक के जरिए तरलता बढ़ने की खबरों से डिजिटल परिसंपत्ति बाजार को भी मजबूती मिली है। मुख्य ऑल्टकॉइन्स गुरुवार को पिछले दिन की तेजी को बरकरार रखते नजर आए। रिपल यानी XRP पिछले कारोबारी दिन दर्ज की गई 10 प्रतिशत की जोरदार उछाल के बाद 1.0951 डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा।
तकनीकी विश्लेषण से संकेत मिलता है कि XRP और सोलाना यानी SOL दोनों में आगे भी तेजी की संभावना बनी हुई है और इनका चार्ट पैटर्न सकारात्मक आउटलुक दर्शा रहा है। इसके विपरीत, कार्डानो यानी ADA के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं और इसमें हाल ही में हासिल की गई बढ़त के गंवाने का जोखिम देखा जा रहा है। कुल मिलाकर, वैश्विक तरलता समर्थन ने वित्तीय बाजारों को फेड की सख्त मौद्रिक नीति के झटके से बचाने का काम किया है।



















