उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के युवाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों और वरिष्ठ नागरिकों के हित में कई बड़े प्रशासनिक कदम उठाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाज कल्याण विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा करते हुए जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के प्रबंधन में सुधार, वृद्धावस्था पेंशन की त्वरित स्वीकृति और छात्रवृत्ति वितरण को पारदर्शी एवं समयबद्ध बनाने का खाका खींचा है। इस महत्वपूर्ण बैठक में समाज कल्याण विभाग के मंत्री असीम अरुण भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के पात्र व्यक्तियों तक पहुँचना शासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
सर्वोदय विद्यालयों का प्रशासनिक पुनर्गठन और शिक्षक भर्ती
राज्य में आवासीय शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से जय प्रकाश नारायण सर्वोदय विद्यालयों के संचालन में आमूलचूल बदलाव लाने की योजना बनाई गई है। समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने इन विद्यालयों के लिए एक सुस्पष्ट और पारदर्शी नियमावली तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही, विद्यालयों के बेहतर रखरखाव और व्यवस्थित प्रशासनिक नियंत्रण के लिए एक समर्पित सोसाइटी का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं कि इन विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुसार सभी आवश्यक मानव संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।
बैठक में प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में केवल 93 सर्वोदय विद्यालय संचालित हो रहे थे। राज्य सरकार के प्रयासों से वर्ष 2025-26 तक इनकी कुल संख्या बढ़कर 103 हो गई है। शैक्षणिक गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए इनमें से 59 विद्यालयों को सीबीएसई बोर्ड से और 44 विद्यालयों को यूपी बोर्ड से संबद्ध किया गया है। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं के साथ उच्च स्तरीय शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
वृद्धावस्था पेंशन प्रक्रिया का सरलीकरण और लंबित आवेदनों का निपटारा
वरिष्ठ नागरिकों की सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के क्रियान्वयन में गति लाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि पेंशन पाने के लिए पात्र बुजुर्गों को किसी भी सरकारी कार्यालय के चक्कर न लगाने पड़ें और न ही उन्हें अनावश्यक प्रतीक्षा करनी पड़े। इसके लिए आवेदन के भौतिक सत्यापन से लेकर पेंशन राशि की स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध सीमा के भीतर पूरा करने के आदेश जारी किए गए हैं।
राज्य में वृद्धावस्था पेंशन के दायरे का व्यापक विस्तार हुआ है। वर्ष 2017-18 में जहां इस योजना के तहत केवल 37.47 लाख लाभार्थियों को पेंशन मिलती थी, वहीं वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा बढ़कर 67.50 लाख तक पहुँच गया है। वर्तमान में विभाग के पास लगभग 11.50 लाख नए आवेदन सत्यापन की प्रक्रिया में लंबित हैं। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इन सभी लंबित आवेदनों की जल्द से जल्द जांच कराकर पात्र बुजुर्गों को पेंशन योजना से जोड़ने के निर्देश दिए हैं।
अभ्युदय योजना से प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क तैयारी
प्रदेश के मेधावी और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की नि:शुल्क कोचिंग उपलब्ध कराने वाली मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना की प्रभावशीलता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए देश और प्रदेश के श्रेष्ठ शिक्षकों तथा विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन का लाभ अधिक से अधिक छात्रों तक पहुँचाया जाए। योजना के दायरे को विस्तार देने के लिए तकनीकी संसाधनों को और मजबूत किया जाएगा।
वर्तमान में अभ्युदय योजना उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में कुल 163 केंद्रों के माध्यम से सफलतापूर्वक संचालित की जा रही है। इन केंद्रों पर यूपीएससी, राज्य पीसीएस, नीट, जेईई और एनडीए या सीडीएस जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए 23,801 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इन विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन देने के लिए 1,783 विशेषज्ञ शिक्षकों को एम्पैनल किया गया है। इसके अलावा, योजना के तहत 4 विशेष सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए गए हैं।
छात्रवृत्ति वितरण के लिए 02 अक्टूबर की समयसीमा और पोर्टल री-ओपनिंग
छात्रवृत्ति वितरण की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने सख्त रुख अपनाया और कहा कि आर्थिक बाधाओं के कारण किसी भी पात्र छात्र की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए आवेदन पोर्टल को तत्काल पुनः खोला जाए। इसके साथ ही, यह समयसीमा तय की गई है कि हर हाल में 02 अक्टूबर तक सभी पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में छात्रवृत्ति की धनराशि डिजिटली अंतरित कर दी जाए।
तकनीकी या प्रक्रियागत त्रुटियों के कारण छात्रवृत्ति से वंचित रह गए विद्यार्थियों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है। इस निर्णय से प्रदेश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ रहे लगभग 3.16 लाख वंचित विद्यार्थियों को दोबारा आवेदन करने का अवसर मिलेगा। इस आंकड़े में शासकीय संस्थानों के 31,836 विद्यार्थी, अशासकीय सहायता प्राप्त (अनुदानित) संस्थानों के 69,631 विद्यार्थी और निजी शिक्षण संस्थानों के 2,46,426 विद्यार्थी शामिल हैं। सरकार की इस पहल से लाखों परिवारों को सीधी राहत मिलेगी।



















