अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का दौर जारी है और अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड में लगातार दूसरे दिन बिकवाली का दबाव देखा गया है। शुरुआती यूरोपीय सत्र के दौरान यह कमोडिटी 84.00 डॉलर के स्तर को तोड़ते हुए इसके नीचे फिसल गई। शुरुआती कारोबार में कीमतों में हल्की तेजी आई थी और यह 85.35 डॉलर के दायरे तक पहुंची थी, लेकिन ऊपरी स्तरों पर टिक नहीं पाई। बाजार में इस गिरावट की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताओं में प्रगति और विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर का मजबूत होना है, हालांकि भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कीमतों में बड़ी गिरावट पर फिलहाल ब्रेक लगा हुआ है।
शांति वार्ता और डॉलर की मजबूती का असर
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक चर्चाओं ने मध्य पूर्व में आपूर्ति से जुड़े बड़े जोखिमों को कम कर दिया है। पहले ईरान के साथ बढ़ते तनाव और संभावित ब्लॉकड के जोखिम के कारण तेल के दामों में एक बड़ा जियोपॉलिटिकल रिस्क प्रीमियम जुड़ा हुआ था, जो अब धीरे-धीरे कम हो रहा है। इसके अलावा, मजबूत अमेरिकी डॉलर ने भी डॉलर-डिनॉमिनेटेड कमोडिटी पर दबाव बढ़ाया है, जिससे निवेशकों का रुझान सुरक्षित संपत्तियों की तरफ शिफ्ट हुआ है। इन तमाम वैश्विक कारकों के मेल से कच्चे तेल की कीमतों पर लगातार दबाव बना हुआ है और बेंचमार्क नीचे आ रहे हैं।
आपूर्ति और भू-राजनीतिक जोखिम
हालांकि कीमतों में हालिया गिरावट तेज रही है, फिर भी बाजार के जानकारों का कहना है कि डाउनसाइड पोटेंशियल अभी सीमित नजर आता है। इसका कारण यह है कि मध्य पूर्व में स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है और व्यापारी किसी भी नए व्यवधान की आशंका को लेकर सतर्क बने हुए हैं। पिछले कुछ महीनों में ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों में भू-राजनीतिक घटनाक्रमों के आधार पर भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिसमें कभी 90 डॉलर के ऊपर की छलांग तो कभी शांति वार्ताओं के बाद तेज गिरावट शामिल रही है। मौजूदा हालात में ट्रेडर्स हर नए घटनाक्रम पर बारीक नजर बनाए हुए हैं ताकि आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी अगली दिशा का अनुमान लगाया जा सके।



















