वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में मंगलवार 3 नवंबर को महत्वपूर्ण नीतिगत हलचल देखने को मिली, जब चीन के केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने विदेशी मुद्रा जमा के लिए आरक्षित आवश्यकता अनुपात यानी विदेशी मुद्रा आरआरआर में दो प्रतिशत अंक की ठोस बढ़ोतरी की घोषणा की। इस ताजा फैसले के अनुसार, विदेशी मुद्रा जमा आरक्षित आवश्यकता अनुपात मौजूदा चार प्रतिशत से बढ़कर छह प्रतिशत हो जाएगा। केंद्रीय बैंक द्वारा निर्धारित किया गया यह नया नियम 15 नवंबर से प्रभावी रूप से लागू होगा। इस कदम के बाद वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले चीनी युआन में एक सीमित और नियंत्रित गिरावट आ सकती है, जिससे दोनों प्रमुख मुद्राओं के बीच का समीकरण आने वाले दिनों में नए स्तरों की ओर बढ़ेगा।
ब्याज दरों के अंतर और नीतिगत फैसले से युआन पर बढ़ता दबाव
चीनी मुद्रा युआन को लेकर मध्यम अवधि के परिदृश्य में पहले से ही सतर्कता बरती जा रही थी, जिसका मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर और चीनी युआन के बीच लगातार चौड़ा होता ब्याज दर अंतर है। दोनों अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीतियों में भिन्नता के कारण यह अंतर बना हुआ था। अब केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा आरक्षित अनुपात को चार प्रतिशत से बढ़ाकर छह प्रतिशत करने के कदम ने विश्लेषकों के इस दृष्टिकोण को और अधिक बल दिया है कि यहां से यूएसडी/सीएनवाई की विनिमय दर में धीरे-धीरे सुधार होगा और अमेरिकी डॉलर की स्थिति बेहतर होगी। मुद्रा और ब्याज दरों पर आधारित आगामी मासिक रिपोर्ट में यूएसडी/सीएनवाई के लिए अद्यतन अनुमान 6 नवंबर को औपचारिक तौर पर जारी किए जाने की तैयारी है, जिसमें नए तकनीकी स्तरों और प्रवाह का विश्लेषण प्रस्तुत किया जाएगा।
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन की चाल
चीन के घटनाक्रम के साथ-साथ प्रशांत और एशियाई क्षेत्र की अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी मंगलवार को स्पष्ट उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। एशियाई बाजार खुलने से ठीक पहले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में अपनी गिरावट का सिलसिला जारी रखा। इस कमजोरी के चलते एयूडी/यूएसडी गिरकर 0.6960 के स्तर के करीब आ गया, जो कि कई कारोबारी सत्रों का निचला दायरा माना जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा में यह दबाव उस समय देखने को मिल रहा है जब बाजार सहभागी रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नवीनतम मौद्रिक नीतिगत फैसले के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं और साथ ही साथ अमेरिका के मध्यावधि चुनाव परिणामों को लेकर सतर्कता बरत रहे हैं।
दूसरी ओर, एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यूएसडी/जेपीवाई में हल्की नरमी देखने को मिली। जापानी मुद्रा के मुकाबले अमेरिकी डॉलर पिछले कारोबारी दिन की तेजी को आंशिक रूप से गंवाते हुए 158.00 के स्तर पर आ गया। यह गिरावट ऐसे समय में आई जब ईरान के साथ कूटनीतिक वार्ताओं की उम्मीदों और आगामी अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के मद्देनजर डॉलर पर दबाव बना हुआ था। इस दौरान जापान के अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के संभावित जोखिमों ने येन को नीचे के स्तरों पर सहारा दिया। हालांकि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली ब्याज दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण येन की बढ़त भी एक सीमित दायरे तक सिमटी रही। इन परस्पर विरोधी कारकों ने इस मुद्रा जोड़ी को एक जाने-पहचाने दायरे में सीमित रखा है, जिससे किसी भी एकतरफा दिशा में बड़ा दांव लगाने से पहले अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता बनी हुई है।
भू-राजनीतिक घटनाक्रम, कच्चे तेल में तेजी और सोने की चाल
विदेशी मुद्राओं के साथ-साथ कीमती धातुओं और कमोडिटी बाजार पर भी वैश्विक घटनाओं का सीधा असर पड़ा। मंगलवार को सोने (एक्सएयू/यूएसडी) की कीमतों में तेजी का रुख कमजोर पड़ता दिखाई दिया। यह बदलाव उस समय आया जब कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर उछाल दर्ज किया गया। कच्चे तेल में आई इस तेजी की पृष्ठभूमि में ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले का घटनाक्रम सामने आया। इस भू-राजनीतिक तनाव और तेल में आई मजबूती के बीच सोने पर दबाव बढ़ा और यह 0.93 प्रतिशत टूटकर 3,909 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार करता दर्ज किया गया।
उधर व्यापक स्तर पर अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने सत्र के निचले स्तरों से उबरने में कामयाब रहा, यद्यपि यह 102.00 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे पिछले दायरों में ही सीमित बना रहा। अमेरिकी डॉलर को ईरान में उपजी शत्रुता और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सहारा मिला, लेकिन घरेलू मोर्चे पर अमेरिकी राजनीतिक अनिश्चितता ने इस बढ़त को सीमित कर दिया। कुल मिलाकर, वैश्विक मुद्रा और कमोडिटी बाजार एक साथ कई आर्थिक और भू-राजनीतिक कारकों के प्रभाव से एक सतर्क दायरे में कारोबार कर रहे हैं।















