इंडोनेशिया में अक्टूबर महीने के दौरान महंगाई के मोर्चे पर राहत देखने को मिली है, जहां मुख्य उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और कोर मुद्रास्फीति दोनों के आंकड़े अनुमान से नीचे आए हैं। आंकड़ों में आई इस नरमी के कारण केंद्रीय बैंक, बैंक इंडोनेशिया के पास नीतिगत दरों को सख्त करने के लिए घरेलू मुद्रास्फीति से जुड़ा कोई बड़ा आधार नहीं बचता है। इसके विपरीत, मुद्रा बाजार में इंडोनेशियाई रुपिया पर लगातार दबाव बना हुआ है और स्थानीय बॉन्ड यील्ड में तेजी दर्ज की गई है। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 18,000 के स्तर से ऊपर रुपिया की कमजोरी बनी रहने के चलते एमयूएफजी के विश्लेषक सतर्क रुख बनाए हुए हैं, जिनका मानना है कि यदि विनिमय दर पर दबाव और गहराता है तो अगली नीतिगत बैठक में दर वृद्धि के विकल्प को पूरी तरह नकारा नहीं जा सकता।
मुद्रास्फीति आंकड़ों में गिरावट और केंद्रीय बैंक की चुनौतियां
अक्टूबर के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इंडोनेशिया की हेडलाइन महंगाई सालाना आधार पर कम होकर 3.23 प्रतिशत पर आ गई है, जो सितंबर के महीने में 3.28 प्रतिशत दर्ज की गई थी। इसी प्रकार मुख्य कोर मुद्रास्फीति भी पिछले महीने के 2.84 प्रतिशत के मुकाबले घटकर 2.56 प्रतिशत रह गई है। आमतौर पर मूल्य वृद्धि में इस प्रकार की मंदी केंद्रीय बैंक को ब्याज दरों में राहत देने अथवा मौजूदा नीतिगत रुख को बनाए रखने की गुंजाइश प्रदान करती है। हालांकि, विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में इंडोनेशियाई रुपिया की लगातार कमजोरी बैंक इंडोनेशिया के नीतिगत फैसलों के लिए एक बेहद सख्त सीमा बन चुकी है। मुद्रा में जारी कमजोरी आयातित लागत को बढ़ाने का जोखिम पैदा करती है, जिसके कारण घरेलू स्तर पर दरों को बढ़ाने की आशंकाएं समाप्त नहीं हुई हैं।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की चाल
व्यापक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स अपने कारोबारी निचले स्तरों से सुधरने का प्रयास कर रहा है, हालांकि यह 102.00 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे ही बना हुआ है। अमेरिकी डॉलर को ईरान में उपजे तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से सहारा मिल रहा है, जबकि अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनाव परिणामों को लेकर बनी राजनीतिक अनिश्चितता इसके लाभ को सीमित कर रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक हालात और चुनावी समीकरणों के बीच विदेशी मुद्रा बाजारों में अस्थिरता का माहौल देखा जा रहा है।
एशियाई मुद्राओं का रुख और प्रमुख विनिमय दरें
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की विनिमय जोड़ी में लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई है। यह जोड़ी एशियाई बाजार की शुरुआत से पहले 0.6960 के करीब, कई दिनों के निचले स्तर पर फिसल गई। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में आई इस कमजोरी के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नवीनतम नीतिगत निर्णय का आकलन और अमेरिका के मध्यावधि चुनाव नतीजों की प्रतीक्षा मुख्य कारक रहे हैं।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर मंगलवार के एशियाई कारोबारी सत्र में कुछ नरम पड़ा और पिछले दिन के 158.00 के स्तर की बढ़त को आंशिक रूप से गंवा बैठा। ईरान से जुड़े कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदों और अमेरिकी चुनावी गहमागहमी ने डॉलर पर दबाव डाला। जापानी अधिकारियों द्वारा बाजार में हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को निश्चित समर्थन दिया, यद्यपि बैंक ऑफ जापान द्वारा अगली दर वृद्धि के समय को लेकर बनी अनिश्चितता ने इस बढ़त को सीमित रखा। इस स्थिति ने विनिमय दर को एक सीमित दायरे में बांध रखा है, जिससे बाजार प्रतिभागी किसी भी एक दिशा में बड़ा दांव लगाने से पहले सतर्कता बरत रहे हैं।
कच्चा तेल और सोने की कीमतों में फेरबदल
कमोडिटी बाजार में, ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमले के घटनाक्रम के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेजी लौटी है। तेल में आई इस उछाल के चलते सोने की कीमतों में कमजोरी देखने को मिली। कारोबार के दौरान हाजिर सोना 0.93 प्रतिशत की दैनिक गिरावट के साथ 3,909 डॉलर प्रति औंस के आसपास दर्ज किया गया। भू-राजनीतिक टकराव, कमोडिटी में हलचल और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के नीतिगत घटनाक्रम मिलकर उभरते बाजारों की मुद्राओं, विशेषकर इंडोनेशियाई रुपिया, के लिए आने वाले दिनों में जटिल वित्तीय वातावरण तैयार कर रहे हैं।
















