वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में भारतीय रुपये ने हाल के दिनों में अपनी मजबूती का प्रदर्शन किया है। वित्तीय संस्थान एमयूएफजी के बाजार विश्लेषण के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा उठाए गए विशेष विदेशी मुद्रा उपायों के तहत डॉलर का प्रवाह उम्मीद से काफी अधिक रहा है। 31 अगस्त तक आरबीआई के फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट यानी एफसीएनआर (बी) योजना के माध्यम से कुल 130 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा प्रवाह हासिल किया गया है। इस भारी पूंजी प्रवाह ने भारतीय मुद्रा को जबरदस्त सुरक्षा कवर प्रदान किया है और बाजार में रुपये के बड़े अवमूल्यन के जोखिम को काफी हद तक समाप्त कर दिया है।
भारतीय रुपये पर रिजर्व बैंक की रणनीति और ब्याज दर का दृष्टिकोण
एमयूएफजी के विश्लेषकों का कहना है कि दीर्घकालिक दृष्टिकोण से USD/INR जोड़ी का रुझान ऊपर की ओर रहने की संभावना बनी हुई है, लेकिन रिजर्व बैंक के पास मौजूद विदेशी मुद्रा के व्यापक भंडार ने भारतीय मौद्रिक अधिकारियों को अभूतपूर्व शक्ति और मजबूती प्रदान की है। इस रणनीतिक बफर की बदौलत भारतीय रुपये में अचानक और तीव्र गिरावट आने का खतरा अब टल चुका है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक अपनी आगामी दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक से ब्याज दरों में वृद्धि का सिलसिला शुरू कर सकता है, जिसमें 50 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी की संभावना जताई गई है। यह कदम देश में मुद्रास्फीति नियंत्रण और विनिमय दर में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
जापानी येन में तेजी और अमेरिकी डॉलर का रुख
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान USD/JPY मुद्रा जोड़ी ने अगस्त महीने के अपने निचले स्तर का पुनरपरीक्षण किया। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीतिगत ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं तथा बाजार में संदिग्ध हस्तक्षेप की खबरों ने जापानी येन को मजबूत सहारा दिया है। दूसरी ओर, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नरमी के कारण अमेरिकी डॉलर पिछले सत्र के बड़े नुकसान के बाद स्थिर होने का प्रयास कर रहा है। डॉलर की यह सुस्ती USD/JPY जोड़ी पर लगातार दबाव बना रही है। मुद्रा व्यापारी अब अमेरिकी श्रम बाजार के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो डॉलर की आगे की दिशा तय करेंगे।
ऑस्ट्रियाई डॉलर और सोने के बाजार का हाल
AUD/USD जोड़ी 0.7200 के स्तर से ऊपर मजबूती से टिकी हुई है, जो मई के मध्य के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) के सख्त मौद्रिक रुख और अमेरिकी डॉलर में आई गिरावट से ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को फायदा मिला है। इस बीच, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस के आंकड़े से नीचे दबाव में देखा गया। डॉलर में हल्की बढ़त के कारण सोने की दो दिनों से जारी तेजी थम गई। हालांकि, बहुमूल्य धातुएं अपने साप्ताहिक उच्च स्तर के करीब बनी हुई हैं। निवेशकों की नजरें अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल (NFP) रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति के भविष्य का संकेत देगी।
क्रिप्टोकरेंसी और ऊर्जा बाजार के आंकड़े
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है, जहां बिटकॉइन 80,000 डॉलर के स्तर से ऊपर कारोबार कर रहा है। फेडरल रिजर्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर के उस बयान के बाद बाजार की धारणा को मजबूती मिली है, जिसमें उन्होंने सितंबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरों को यथावत रखने का संकेत दिया था। इस बयान के बाद सितंबर में दर वृद्धि की संभावना घटकर 50% रह गई है। पिछले 24 घंटों में अल्टरनेटिव कॉइन्स में जीकैश (ZEC) और एथेना (ENA) सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाले एसेट्स बनकर उभरे हैं।
दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भी भारी हलचल देखी जा रही है। भले ही कच्चा तेल शांत नजर आ रहा हो, लेकिन डीजल क्रैक स्प्रेड एक नया रिकॉर्ड बना रहा है। अमेरिका में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और डब्ल्यूटीआई (WTI) कच्चे तेल के बीच का अंतर यानी क्रैक स्प्रेड पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है और इसने 102.00 डॉलर प्रति बैरल का इंट्राडे रिकॉर्ड स्तर छू लिया है।
अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट पर टिकी बाजार की निगाहें
सप्ताह के अंत में वैश्विक वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान अमेरिकी मैक्रो इकोनॉमिक डेटा और वहां के श्रम बाजार के प्रदर्शन पर केंद्रित है। अगस्त महीने के पेरोल आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिसमें बाजार को 58k (58,000) नए रोजगार सृजन की उम्मीद है। विश्लेषकों का अनुमान है कि अमेरिका में बेरोजगारी दर 4.1% पर स्थिर रहेगी, जबकि औसत प्रति घंटा वेतन वृद्धि दर पिछले महीने के 3.2% से घटकर 3% पर आ सकती है। ये आंकड़े यह निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे कि फेडरल रिजर्व अपनी आगामी मौद्रिक नीतियों में ढील देगा या दरों को स्थिर रखेगा।



















