घरेलू शेयर बाजार में बुधवार को आर्डी इंडस्ट्रीज की एंट्री किसी जश्न से कम नहीं रही। कंपनी के शेयरों ने कारोबार की शुरुआत ही तगड़े प्रीमियम के साथ की और निवेशकों को पहले ही दिन अच्छा खासा फायदा करा दिया। हालांकि दिन चढ़ने के साथ शुरुआती उछाल में कुछ कमी जरूर आई, फिर भी शेयर अपने इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 27 प्रतिशत ऊपर बंद हुआ। जिन निवेशकों को इस आईपीओ में हिस्सा मिला था, उनके लिए यह लिस्टिंग मुनाफे का सौदा साबित हुई।
बीएसई और एनएसई पर कैसी रही चाल
बीएसई पर आर्डी इंडस्ट्रीज का शेयर 73.60 रुपये पर खुला, जो 53 रुपये के इश्यू प्राइस से 38.86 प्रतिशत ज्यादा था। लेकिन दिनभर के उतार चढ़ाव के बाद यह 26.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 67.13 रुपये पर आकर टिका। दूसरी तरफ एनएसई पर शेयर ने 72 रुपये पर दस्तक दी, यानी इश्यू प्राइस से 35.84 प्रतिशत ऊपर, और कारोबार खत्म होने पर 26.64 प्रतिशत चढ़कर 67.12 रुपये पर बंद हुआ। लिस्टिंग के दिन कंपनी का बाजार पूंजीकरण 2,115.94 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। खरीद बिक्री की बात करें तो बीएसई पर 125.16 लाख और एनएसई पर 1,302.76 लाख शेयरों का लेन देन हुआ।
आईपीओ को मिला निवेशकों का भरपूर साथ
यह आईपीओ 5 अगस्त को खुलकर 7 अगस्त को बंद हुआ था और इस दौरान इसे निवेशकों की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली। इश्यू को कुल 133.66 गुना सब्सक्रिप्शन हासिल हुआ, यानी जितने शेयर बिक्री के लिए रखे गए थे, मांग उससे कई गुना ज्यादा रही। इसी दमदार डिमांड के बूते कंपनी ने आईपीओ के जरिए 426 करोड़ रुपये जुटाए। शेयरों के लिए 2 रुपये फेस वैल्यू पर 50 से 53 रुपये का प्राइस बैंड तय किया गया था। आईपीओ बंद होने के बाद 10 अगस्त को शेयरों का अलॉटमेंट हुआ और 11 अगस्त को ये निवेशकों के खातों में जमा कर दिए गए।
कहां लगेगा जुटाया गया पैसा
इस पेशकश में 320 करोड़ रुपये तक के नए शेयरों के साथ साथ 1.99 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (ओएफएस) भी शामिल था। नए शेयरों से आने वाली रकम को कंपनी अलग अलग जरूरतों में लगाएगी। इसमें से 220 करोड़ रुपये कंपनी की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी की जरूरतों को पूरा करने में खर्च होंगे, जबकि 22 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज उतारने के लिए किया जाएगा। बाकी बची राशि सामान्य कामकाजी खर्चों में लगाई जाएगी।
किस कारोबार में है कंपनी
आर्डी इंडस्ट्रीज सर्कुलर इकोनॉमी यानी चक्रीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में सक्रिय है। कंपनी उन ऊर्जा भंडारण उत्पादों और गैर लौह धातु के कबाड़ (स्क्रैप) को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाती है, जिनकी तय अवधि पूरी हो चुकी होती है। यही रीसाइक्लिंग यानी पुनर्चक्रण का काम कंपनी के कारोबार की बुनियाद है।


















