आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में किए जा रहे भारी पूंजीगत खर्च और उससे मिलने वाले वास्तविक वित्तीय रिटर्न को लेकर निवेशकों में बढ़ती अनिश्चितता ने मंगलवार को एशियाई शेयर बाजारों को हिला कर रख दिया। वॉल स्ट्रीट से शुरू हुआ टेक शेयरों का नुकसान पूरे एशियाई परिसंपत्ति बाजारों में फैल गया। वैश्विक स्तर पर चिप निर्माता कंपनियों के शेयरों में चौतरफा गिरावट देखने को मिली। इस बिकवाली के माहौल में निवेशकों ने जोखिम भरे शेयरों से दूर होकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख किया, जिससे बॉन्ड की कीमतों में तेजी आई जबकि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी दर्ज की गई।
दक्षिण कोरियाई बाजार पर सबसे भारी मार और ट्रेडिंग रोकने की नौबत
मंगलवार की बिकवाली में दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार को सबसे बड़ा झटका लगा। देश का प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक कोस्पी 9.45 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज करते हुए 6,120 के स्तर के करीब पहुंच गया। दुनिया की प्रमुख मेमोरी चिप निर्माता कंपनियों में शामिल एसके हाइनिक्स के शेयरों में 13 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आई, जबकि सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर भी 10 प्रतिशत तक टूट गए। इन दिग्गजों के ध्वस्त होने से व्यापक एमएससीआई एशिया पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स में 3 प्रतिशत से अधिक का नुकसान दर्ज किया गया।
कोस्पी 200 फ्यूचर्स में अचानक आई इस भीषण गिरावट को देखते हुए कोरिया एक्सचेंज को बाजार में नियंत्रण बनाने के लिए पांच मिनट का 'साइडकार' ट्रेडिंग प्रतिबंध लागू करना पड़ा। इस कदम के तहत प्रोग्राम सेल ऑर्डर्स को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया। चालू वर्ष के दौरान कोस्पी इंडेक्स पर इस तरह का ट्रेडिंग प्रतिबंध लगाए जाने का यह 22वां मौका था, जो वैश्विक टेक सेक्टर में बनी अत्यधिक अस्थिरता को दर्शाता है।
जापान और चीन के बाजारों में नरमी, जबकि हांगकांग में मजबूती
क्षेत्रीय गिरावट का असर जापान और मुख्य भूमि चीन के बाजारों पर भी साफ नजर आया। टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक निकेई 225 गिरकर दो महीने के निचले स्तर पर आ गया। इसके साथ ही मुख्य भूमि चीन के प्रमुख इक्विटी सूचकांक भी लाल निशान में बंद हुए। हालांकि, इस चौतरफा सुस्ती के बीच हांगकांग के बाजार ने एक अलग दिशा पकड़ी।
हांगकांग का हैंग संग इंडेक्स 0.58 प्रतिशत की बढ़त के साथ लगभग 25,350 के स्तर पर बंद होने में कामयाब रहा। हांगकांग बाजार को मजबूत पूंजी प्रवाह, आईपीओ गतिविधियों में तेजी और स्थानीय टेक व एआई शेयरों के प्रति निवेशकों के सतत उत्साह से सहारा मिला। इस सकारात्मक माहौल की वजह से हैंग संग इंडेक्स वैश्विक सेमीकंडक्टर बिकवाली के प्रभाव से उबरने और अपनी हालिया तेजी को बनाए रखने में सफल रहा।
केन्द्रीय बैंकों के फैसलों से पहले मुद्रा और सोना बाजारों में सतर्कता
शेयर बाजार में मची उथल-पुथल के बीच विदेशी मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में भी सतर्कता का माहौल देखने को मिला। मंगलवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान जीबीपी/यूएसडी जोड़ी थोड़ी गिरावट के साथ 1.3290 के आसपास कारोबार करती नजर आई। बुधवार को आने वाले अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत फैसले से पहले अमेरिकी डॉलर में मजबूती के संकेत मिले हैं, जिससे ब्रिटिश पाउंड पर दबाव बना हुआ है।
इसी तरह ईयूआर/यूएसडी जोड़ी मासिक निचले स्तर के करीब सीमित दायरे में रही और मंगलवार को एशियाई सत्र में 1.1300 के मध्य स्तरों से ठीक ऊपर बनी रही। व्यापारी दो दिवसीय एफओएमसी मौद्रिक नीति बैठक के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं और किसी भी बड़े दांव से बच रहे हैं। दूसरी ओर, सोने की कीमतों में भी लगातार दूसरे दिन गिरावट देखी गई। शुरुआती कारोबार में सोना 4,050 डॉलर के स्तर का परीक्षण कर रहा था, जो कि 4,100 डॉलर के स्तर से नीचे खिसक चुका है। अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग और फेड निर्णय से पहले बिकवाली के दबाव ने सोने की तेजी पर रोक लगाई है।
एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की संरचना और प्रमुख सूचकांकों का महत्व
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में एशिया का स्थान बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह क्षेत्र दुनिया की कुल आर्थिक वृद्धि में लगभग 70 प्रतिशत का योगदान देता है। इस क्षेत्र में दुनिया के कई सबसे बड़े शेयर बाजार सूचकांक स्थित हैं। विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में जापान का निकेई सूचकांक, जो टोक्यो स्टॉक एक्सचेंज की 225 कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है, और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक प्रमुख स्थान रखते हैं।
चीन की बात करें तो वहां तीन प्रमुख सूचकांक बाजार की दिशा तय करते हैं, जिनमें हांगकांग का हैंग संग, शंघाई कंपोजिट और शेनझेन कंपोजिट शामिल हैं। एक बड़ी उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के शेयर बाजार भी वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, जहां बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी सूचकांकों में शामिल कंपनियों में विदेशी निवेश लगातार बढ़ रहा है।
विभिन्न सेक्टरों का दबदबा और बाजार को प्रभावित करने वाले कारक
एशिया की मुख्य अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे से काफी भिन्न हैं और प्रत्येक बाजार के अपने प्रमुख सेक्टर हैं। प्रौद्योगिकी कंपनियां जापान, दक्षिण कोरिया और तेजी से चीन के सूचकांकों में वर्चस्व रखती हैं। वहीं हांगकांग और सिंगापुर जैसे अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में वित्तीय सेवा क्षेत्र शेयर बाजारों का नेतृत्व करता है। विनिर्माण क्षेत्र चीन और जापान की अर्थव्यवस्थाओं का मुख्य आधार है, जहां ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन पर गहरा ध्यान केंद्रित है। इसके अतिरिक्त, भारत और चीन जैसे देशों में मध्यम वर्ग की तेजी से बढ़ती आबादी के कारण रिटेल और ई-कॉमर्स कंपनियों का महत्व भी निरंतर बढ़ रहा है।
एशियाई शेयर बाजार के सूचकांकों की चाल कई कारकों से तय होती है, लेकिन सबसे बड़ा कारक सूचकांक में शामिल कंपनियों के तिमाही और वार्षिक वित्तीय परिणाम होते हैं। इसके अलावा, प्रत्येक देश के मूलभूत आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर संबंधी निर्णय और सरकारों की राजकोषीय नीतियां भी बाजार को प्रभावित करती हैं। व्यापक तौर पर देखा जाए तो राजनीतिक स्थिरता, तकनीकी प्रगति, कानून का शासन और अमेरिकी बाजारों का रुख भी एशियाई बाजारों पर गहरा प्रभाव डालता है, क्योंकि अक्सर एशियाई बाजार वॉल स्ट्रीट के रातों-रात के प्रदर्शन से संकेत लेते हैं।
एशियाई बाजारों में निवेश से जुड़े विशिष्ट जोखिम
शेयर बाजार में निवेश अपने आप में जोखिम भरा होता है, लेकिन एशियाई बाजारों में निवेश करते समय क्षेत्र-विशिष्ट जोखिमों को ध्यान में रखना आवश्यक है। एशियाई देशों में पूर्ण लोकतंत्र से लेकर तानाशाही तक विभिन्न राजनीतिक प्रणालियां मौजूद हैं। इस वजह से उनकी राजनीतिक स्थिरता, पारदर्शिता, कानून के शासन और कॉर्पोरेट गवर्नेंस के मानकों में काफी अंतर होता है।
व्यापारिक विवाद या क्षेत्रीय संघर्ष जैसी भू-राजनीतिक घटनाएं शेयर बाजारों में भारी अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। इसके अलावा प्राकृतिक आपदाएं भी उत्पादन और आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करती हैं। मुद्रा की विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव भी एशियाई शेयर बाजारों के मूल्यांकन को सीधे प्रभावित करता है। यह बात विशेष रूप से निर्यात-उन्मुख अर्थव्यवस्थाओं पर लागू होती है, जिनकी घरेलू मुद्रा मजबूत होने से निर्यात महंगा हो जाता है और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है, जबकि कमजोर मुद्रा से उनके उत्पाद विदेशी बाजारों में सस्ते और प्रतिस्पर्धी बनते हैं।



















