अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमतें पिछले दो दिनों की बढ़त के बाद एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान प्रति बैरल $82.70 के आसपास दर्ज की गईं। पूर्वी यूरोप में गहराते सैन्य संघर्ष और आपूर्ति श्रृंखला में अनिश्चितता के कारण तेल बाजार की नजरें एक बार फिर मध्य पूर्व से हटकर पूर्वी यूरोपीय घटनाक्रम पर टिक गई हैं। हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद WTI क्रूड का भाव $82.50 के महत्वपूर्ण तकनीकी स्तर से ऊपर बना हुआ है, जिससे निवेशकों का ध्यान बुनियादी आपूर्ति कारकों पर केंद्रित हो गया है।
पूर्वी यूरोप में गहराता सैन्य संकट और रिफाइनरी अवसंरचना को नुकसान
पूर्वी यूरोप में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष में आए नए मोड़ ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के हालिया बयानों से संकेत मिलता है कि यूक्रेन के साथ कूटनीतिक बातचीत पूरी तरह ठप हो चुकी है और रूस सैन्य अभियानों को और तेज करने की तैयारी में है। इस कूटनीतिक गतिरोध के बीच यूक्रेन द्वारा रूसी ऊर्जा परिसंपत्तियों को निशाना बनाकर किए जा रहे लगातार हमलों ने स्थिति को अधिक गंभीर बना दिया है।
यूक्रेन के ड्रोन और मिसाइल हमलों ने रूस के रणनीतिक तेल रिफाइनरियों और निर्यात बंदरगाहों को भारी नुकसान पहुंचाया है। इन हमलो के कारण रूस की कच्चे तेल के शोधन की क्षमता प्रभावित हुई है। इसके साथ ही डीजल और पेट्रोल जैसे प्रसंस्कृत पेट्रोलियम उत्पादों (refined petroleum products) के निर्यात की क्षमता पर भी बुरा असर पड़ा है। रूस दुनिया के प्रमुख ऊर्जा निर्यातकों में से एक है, इसलिए उसकी ऊर्जा अवसंरचना में व्यवधान आने से वैश्विक बाजारों में आपूर्ति सीमित होने का जोखिम बढ़ गया है।
मध्य पूर्व में कूटनीतिक प्रगति और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति
पूर्वी यूरोप में बढ़ते तनाव के विपरीत, मध्य पूर्व से कुछ राहत भरे कूटनीतिक संकेत सामने आए हैं। ओमान और ईरान की सेना के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जलमार्ग के संदर्भ में एक नया राजस्व साझाकरण समझौता (revenue-sharing agreement) हुआ है। इस रणनीतिक समुद्री मार्ग से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए इस समझौते की खबर से बाजार में फैली घबराहट कुछ हद तक शांत हुई है।
हालांकि, तेहरान के सैन्य अधिकारियों ने यह स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ हुआ यह समझौता स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को तुरंत या पूरी तरह से खोलने की गारंटी नहीं देता है। इस जलमार्ग पर आंशिक नियंत्रण और सुरक्षा अनिश्चितता बनी रहने के कारण वैश्विक ऊर्जा प्रवाह अभी भी एक नाजुक संतुलन पर टिका हुआ है। यही कारण है कि मध्य पूर्व की खबरों से मिली राहत के बावजूद कच्चा तेल सप्ताह के अंत में दबाव महसूस कर रहा है।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्या है? जानिए वैश्विक क्रूड का बेंचमार्क
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बेचे जाने वाले कच्चे तेल का एक प्रमुख प्रकार है। वैश्विक तेल व्यापार में WTI को तीन सबसे महत्वपूर्ण बेंचमार्क में गिना जाता है, जिनमें अन्य दो ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) और दुबई क्रूड (Dubai Crude) हैं। वित्तीय मीडिया और कमोडिटी बाजारों में जब भी कच्चे तेल के भाव का जिक्र होता है, तो WTI की कीमत का उपयोग संदर्भ के रूप में प्रमुखता से किया जाता है।
पेट्रोलियम उद्योग में WTI को लाइट (light) और स्वीट (sweet) क्रूड माना जाता है। इसे लाइट इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका घनत्व (gravity) काफी कम होता है, जिससे इसे आसानी से प्रवाहित किया जा सकता है। वहीं, इसमें सल्फर यानी गंधक की मात्रा बहुत कम होने के कारण इसे स्वीट कहा जाता है। कम सल्फर और हल्के घनत्व के कारण WTI की गुणवत्ता बेहद उच्च मानी जाती है, जिससे रिफाइनरियों में इससे पेट्रोल और डीजल बनाना अधिक आसान और कम खर्चीला होता है।
WTI कच्चे तेल का उत्पादन मुख्य रूप से संयुक्त राज्य अमेरिका में होता है। इसका मुख्य वितरण केंद्र ओक्लाहोमा राज्य में स्थित कुशिंग (Cushing) हब है। कुशिंग हब को इसकी व्यापक पाइपलाइन अवसंरचना के कारण दुनिया का पाइपलाइन चौराहा (The Pipeline Crossroads of the World) कहा जाता है। अमेरिका में भंडारण और आपूर्ति का स्तर सीधे कुशिंग के माध्यम से ही तय होता है।
आपूर्ति, मांग और अमेरिकी डॉलर से तय होते हैं तेल के दाम
अन्य सभी वित्तीय परिसंपत्तियों की तरह WTI कच्चे तेल की कीमतें भी मांग और आपूर्ति के बुनियादी नियमों से संचालित होती हैं। वैश्विक आर्थिक वृद्धि (global economic growth) क्रूड की मांग को बढ़ाने वाला सबसे बड़ा कारक होती है। जब वैश्विक अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ती है, तो उद्योगों, परिवहन और विनिर्माण क्षेत्र में ऊर्जा की खपत बढ़ती है, जिससे तेल के दाम चढ़ते हैं। इसके विपरीत, आर्थिक सुस्ती या मंदी के दौरान मांग कमजोर पड़ने से कीमतों पर दबाव बनता है।
इसके अलावा भू-राजनीतिक अस्थिरता, युद्ध और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करते हैं, जिससे बाजारों में कमी का डर बनता है और कीमतें ऊपर जाती हैं। दूसरा महत्वपूर्ण कारक अमेरिकी डॉलर (US Dollar) की विनिमय दर है। चूंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का व्यापार मुख्य रूप से डॉलर में किया जाता है, इसलिए डॉलर के मूल्य में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है। जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो विदेशी मुद्रा रखने वाले खरीदारों के लिए तेल सस्ता हो जाता है, जिससे मांग बढ़ती है। वहीं डॉलर मजबूत होने पर तेल खरीदना महंगा हो जाता है, जिससे कीमतों में गिरावट आती है।
API और EIA इन्वेंट्री रिपोर्ट: बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक
अमेरिकी तेल बाजार की दैनिक दिशा तय करने में दो प्रमुख साप्ताहिक इन्वेंट्री रिपोर्टों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ये रिपोर्टें अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट (API) और यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) द्वारा जारी की जाती हैं। इन्वेंट्री में बदलाव से यह स्पष्ट होता है कि बाजार में आपूर्ति और मांग का संतुलन किस दिशा में झुक रहा है।
यदि साप्ताहिक आंकड़ों में कच्चे तेल के भंडार (inventories) में गिरावट दर्ज की जाती है, तो यह मजबूत मांग या सीमित आपूर्ति का संकेत होता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। इसके विपरीत, यदि इन्वेंट्री में बढ़ोतरी होती है, तो यह बाजार में जरूरत से ज्यादा आपूर्ति या कमजोर मांग को दर्शाता है, जिससे कीमतें नीचे आती हैं। API अपनी रिपोर्ट हर मंगलवार को जारी करता है, जबकि सरकारी एजेंसी EIA अगले दिन यानी बुधवार को आंकड़े पेश करती है। इन दोनों रिपोर्टों के निष्कर्ष 75 प्रतिशत मामलों में 1 प्रतिशत के अंतर के भीतर एक जैसे होते हैं। हालांकि, EIA को सरकारी संस्था होने के कारण अधिक विश्वसनीय और आधिकारिक माना जाता है।
OPEC और OPEC+ का वैश्विक आपूर्ति पर नियंत्रण
पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) 12 तेल उत्पादक राष्ट्रों का एक समूह है। यह संगठन वर्ष में दो बार बैठक करके अपने सदस्य देशों के लिए उत्पादन कोटा (production quotas) तय करता है। OPEC के फैसले वैश्विक आपूर्ति को सीधे प्रभावित करते हैं। जब OPEC उत्पादन में कटौती करने का फैसला करता है, तो बाजार में आपूर्ति तंग हो जाती है और कीमतें ऊपर जाने लगती हैं। वहीं, उत्पादन बढ़ाने के फैसले से कीमतों में गिरावट आती है।
ओपेक के व्यापक रूप को OPEC+ कहा जाता है। इसमें OPEC के 12 स्थायी सदस्यों के अलावा 10 अन्य गैर-ओपेक तेल उत्पादक देश शामिल हैं। इन गैर-ओपेक सहयोगियों में रूस सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली देश है। ओपेक प्लस के फैसले वैश्विक तेल बाजार की दिशा निर्धारित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार की हलचल: GBP/USD और EUR/USD में उतार-चढ़ाव
कच्चे तेल के साथ-साथ वैश्विक विदेशी मुद्रा (Forex) बाजार में भी अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी शुरुआती कारोबार में छह दिनों के निचले स्तर पर गिरने के बाद सुधार दर्ज करती दिखी। गुरुवार को यह जोड़ी 1.3600 के स्तर के ठीक नीचे कारोबार कर रही थी। अमेरिकी डॉलर को व्यापक सतर्कता के माहौल से सहारा मिल रहा है, क्योंकि निवेशक आगामी आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, यूरो और डॉलर (EUR/USD) की जोड़ी 1.1650 के स्तर के आसपास स्थिर बनी हुई है। इससे पहले यह 1.630 (या 1.1630) के निचले स्तर तक फिसल गई थी। विदेशी मुद्रा बाजार में कोई स्पष्ट दिशा न दिखने का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की अनिश्चित चाल है। निवेशक शुक्रवार को जारी होने वाले नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के वार्षिक संशोधन और फेडरल रिजर्व के बयानों का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
डीजल क्रैक स्प्रेड का रिकॉर्ड और सोने के बाजार की स्थिति
ऊर्जा बाजार में कच्चे तेल की कीमतें भले ही अपेक्षाकृत शांत दिख रही हों, लेकिन डीजल बाजार से बहुत अलग संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड (US diesel crack spread)—जो WTI के मुकाबले अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स के प्रीमियम को मापता है—इतिहास में पहली बार प्रति बैरल $100 के पार पहुंच गया। इसने कारोबार के दौरान $102.00 प्रति बैरल से अधिक का सर्वकालिक उच्च स्तर छुआ, जो रिफाइनिंग उद्योग पर भारी दबाव को दर्शाता है।
उधर, कीमती धातुओं के बाजार में सोने (XAU/USD) ने अपनी बढ़त बनाए रखी है। गुरुवार को सोने के भाव में 0.17 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई और यह $4,601 प्रति औंस के स्तर पर कारोबार कर रहा था। अमेरिका में रोजगार के मजबूत आंकड़ों और बढ़ते व्यापार घाटे के बीच निवेशकों की नजरें केंद्रीय बैंक की भावी नीति पर टिकी हुई हैं।
फेडरल रिजर्व और जैक्सन होल संगोष्ठी पर नजरें
वित्तीय बाजारों की निगाहें अब फेडरल रिजर्व पर टिकी हैं। फेड चेयर केविन वॉर्श (Kevin Warsh) शुक्रवार को प्रतिष्ठित जैक्सन होल संगोष्ठी (Jackson Hole Symposium) में अपना पहला भाषण देने जा रहे हैं। बाजार सहभागी केवल सितंबर की ब्याज दर कटौती या बढ़ोतरी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे फेड की दीर्घकालिक मौद्रिक नीति और आर्थिक दृष्टिकोण को समझने के लिए उत्सुक हैं।



















