नेपाल और चीन के सीमावर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। इस हफ्ते भोटेकोशी नदी और आसपास के जलग्रहण क्षेत्रों में आई अचानक बाढ़ ने कई गांवों और कस्बों में भारी तबाही मचाई है। बचावकर्मी नेपाल के रसुवा जिले से लेकर तिब्बत के इलाकों तक मलबे में जिंदगियां तलाश रहे हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर लगभग 400 हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। गायब होने वालों में 30 से अधिक देशों के नागरिक शामिल हैं, जिनमें 290 भारतीय तीर्थयात्री भी हैं।
दो नदियों के संगम पर बनी खतरनाक बैरियर झीलें
राहत और बचाव कार्यों के बीच चीन और नेपाल की ओर से अगले 3 दिनों के लिए नया रेड अलर्ट जारी किया गया है। दो नदियों के संगम पर पानी रुकने से सीमा के दोनों तरफ विशाल बैरियर झीलें बन गई हैं। अनुमान के मुताबिक इन प्राकृतिक बांधों में लगभग 5,000 करोड़ लीटर पानी जमा हो चुका है। यदि यह पानी अचानक बाहर निकला तो निचले इलाकों में तबाही की दूसरी लहर आ सकती है। चीन ने चेतावनी जारी करते हुए अगले 72 घंटों को नेपाल और तिब्बत के निचले मैदानी इलाकों के लिए बेहद संवेदनशील बताया है।
भारत के सीमावर्ती राज्यों में भी सतर्कता
नेपाल से निकलने वाली नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने की आशंका को देखते हुए भारत के पड़ोसी राज्यों को भी सतर्क कर दिया गया है। अगले 48 घंटे उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। स्थानीय प्रशासन को तटीय बस्तियों को खाली कराने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। आपदा प्रबंधन टीमें हालात पर लगातार नजर रख रही हैं।



















