रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया सितंबर की मौद्रिक नीति बैठक में अपनी नकद दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 4.60 प्रतिशत करने की पूरी तैयारी में है। केंद्रीय बैंक यह कदम ऐसे नाजुक मोड़ पर उठाने जा रहा है जहां एक तरफ जुलाई महीने के महंगाई आंकड़े उम्मीद से कहीं अधिक गर्म आए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ देश के रोजगार बाजार में नरमी के संकेत साफ दिखाई देने लगे हैं। इस नीतिगत निर्णय की आधिकारिक घोषणा 04:30 GMT पर मौद्रिक नीति वक्तव्य के साथ साझा की जाएगी, जिसके ठीक बाद 05:30 GMT पर बैंक गवर्नर मिशेल बुलॉक की बहुप्रतीक्षित प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित होगी। वैश्विक मुद्रा विनिमय बाजार की नजरें मुख्य रूप से इस बात पर टिकी हैं कि केंद्रीय बैंक इस बढ़ोतरी के बाद आगे की दिशा को लेकर क्या रुख अपनाता है।
महंगाई का दबाव और लेबर मार्केट में बढ़ती नरमी का दोहरा संकट
ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था वर्तमान में एक विचित्र नीतिगत विरोधाभास का सामना कर रही है। देश में जुलाई महीने का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक उम्मीद के 0.8 प्रतिशत के मुकाबले 1.0 प्रतिशत उछल गया, जिसके कारण वार्षिक मुद्रास्फीति की दर 3.5 प्रतिशत पर दृढ़ बनी रही। केंद्रीय बैंक के लिए सबसे अधिक चिंता का सबब ट्रिम्ड-मीन इन्फ्लेशन रहा, जो बिना किसी बदलाव के 3.6 प्रतिशत पर स्थिर दर्ज किया गया। यह आंकड़ा स्पष्ट करता है कि बुनियादी कीमतों का दबाव अभी भी अर्थव्यवस्था में गहराई से बना हुआ है और आसानी से नीचे आने को तैयार नहीं है।
दूसरी ओर, आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती के प्रमाण भी सामने आने लगे हैं। अगस्त महीने के दौरान देश की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि बाजार को इसके 4.5 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान था। बेरोजगारी का यह स्तर वर्ष 2021 के अंतिम महीनों के बाद का सबसे उच्चतम स्तर है। इस स्थिति ने रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के नीति निर्माताओं के सामने एक जटिल दुविधा उत्पन्न कर दी है, जहां महंगाई को नियंत्रित करने के लिए मौद्रिक सख्ती जरूरी दिखती है, लेकिन ऊंची ब्याज दरें रोजगार सृजन और आर्थिक विकास की रफ्तार को धीमा कर रही हैं।
गवर्नर मिशेल बुलॉक के बयान और बुधवार के आंकड़ों पर टिकी निगाहें
वित्तीय बाजारों में सितंबर की बैठक में ब्याज दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी को लगभग तय माना जा रहा है। इसलिए निवेशकों का प्राथमिक ध्यान दरों के सीधे बदलाव के बजाय गवर्नर मिशेल बुलॉक के वक्तव्य और प्रेस कॉन्फ्रेंस के लहजे पर रहेगा। यदि गवर्नर अपने संबोधन में यह संकेत देती हैं कि मुद्रास्फीति को काबू में करने के लिए आगे भी दरों में वृद्धि की जा सकती है, तो इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को उल्लेखनीय मजबूती मिल सकती है। इसके विपरीत, यदि वह 4.60 प्रतिशत की दर को नीतिगत चक्र का उच्चतम स्तर बताती हैं या कमजोर पड़ती विकास दर और सुस्त होते श्रम बाजार पर अधिक चिंता जताती हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर तीव्र बिकवाली का दबाव बन सकता है।
हालांकि मुद्रा विश्लेषकों का मानना है कि मंगलवार के नीतिगत फैसले पर बाजार की तात्कालिक प्रतिक्रिया अल्पकालिक साबित हो सकती है। इसका कारण बुधवार को जारी होने वाला अगस्त महीने का सीपीआई डेटा है। बुधवार की यह महंगाई रिपोर्ट केंद्रीय बैंक के इस फैसले से भी अधिक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि वही वास्तविक रूप से तय करेगी कि बाजार सितंबर के बाद किसी अन्य ब्याज दर वृद्धि की संभावना को लेकर क्या रुख तय करेगा।
तकनीकी विश्लेषण और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का मौजूदा विनिमय स्तर
मुद्रा बाजार के तकनीकी ढांचे पर नजर डालें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर में एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ठहराव देखा गया। जोड़ी 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के ठीक ऊपर ट्रेड करती रही। लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, AUD/USD 0.7013 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 0.7009 के बंद भाव से 0.05 प्रतिशत की हल्की बढ़त दर्शाता है। इसका 52 हफ्तों का निचला और उच्चतम दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के ठीक 1.00 गुना के बराबर है।
तकनीकी संकेतकों में 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स 32 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि यह जोड़ी ओवरसोल्ड जोन के काफी करीब पहुंच रही है और मंदी का रुझान अभी बरकरार है। एमएसीडी -0.00 पर सिग्नल लाइन -0.00 के साथ मंदी का रुख दिखा रहा है। मूविंग एवरेज संरचना में 50-दिवसीय एसएमए 0.7094 पर और 200-दिवसीय एसएमए 0.7024 पर स्थित है। वहीं घातीय औसत में ईएमए20 0.7097, ईएमए50 0.7094 और ईएमए200 0.6965 पर बना हुआ है, जहां ईएमए50 का ईएमए200 के ऊपर होना दीर्घावधि अपट्रेंड में गोल्डन क्रॉस संरचना का संकेत देता है। बोलिंगर बैंड्स का दायरा 0.6992 से 0.7265 के बीच है और कीमत इस बैंड के भीतर केंद्रित है, जबकि एडीएक्स 29 पर एक सक्रिय ट्रेंडिंग स्थिति का संकेत दे रहा है। स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 4 और सिग्नल लाइन 2 पर स्थित है।
चार्ट विश्लेषक ध्वनि के अनुसार, AUD/USD का 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज एक अहम धुरी की तरह काम कर रहा है। ऊपर की तरफ शुरुआती प्रतिरोध 100-दिवसीय एसएमए 0.7068 पर मौजूद है, जिसके बाद 50-दिवसीय एसएमए 0.7094 और 21-दिवसीय एसएमए 0.7133 पर मुख्य बाधाएं बनी हुई हैं। दैनिक इंट्राडे लेवल्स में पिवट 0.7016 पर है, जिसमें पहला प्रतिरोध 0.7020 और दूसरा 0.7028 पर देखा जा रहा है। नीचे की ओर पहला समर्थन 0.7008 और दूसरा 0.7004 पर स्थित है। यदि दैनिक बंद भाव 200-दिवसीय एसएमए से नीचे चला जाता है, तो यह गिरावट को 0.6950 के स्तर और उसके बाद 0.6900 के राउंड लेवल की तरफ गहरा कर सकता है।
केंद्रीय बैंक का अधिदेश और आधुनिक मुद्रा प्रवाह के नियम
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश में ब्याज दरों के निर्धारण और मौद्रिक नीति संचालन की सर्वोच्च संस्था है। इसका संचालन बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा किया जाता है, जो सामान्यतः वर्ष में 11 नियमित बैठकें आयोजित करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तदर्थ आपातकालीन बैठकें भी बुलाते हैं। बैंक का प्राथमिक अधिदेश कीमतों में स्थिरता बनाए रखना है, जिसके तहत 2 से 3 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति का लक्ष्य रखा जाता है। इसके अतिरिक्त, मुद्रा की स्थिरता, पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना, और ऑस्ट्रेलियाई जनता की आर्थिक समृद्धि एवं कल्याण सुनिश्चित करना भी इसके मुख्य लक्ष्यों में शामिल है। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केंद्रीय बैंक का प्राथमिक हथियार ब्याज दरों को बढ़ाना या घटाना है। अपेक्षाकृत ऊंची ब्याज दरें आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती देती हैं, जबकि दरों में कटौती से मुद्रा कमजोर होती है।
पारंपरिक आर्थिक सिद्धांतों में मुद्रास्फीति को किसी भी मुद्रा के मूल्य के लिए नकारात्मक माना जाता था, क्योंकि यह पैसे की क्रय शक्ति को घटाती है। लेकिन आधुनिक दौर में सीमा पार पूंजी प्रवाह पर नियंत्रण हटने के बाद यह समीकरण उलट चुका है। जब किसी देश में महंगाई मध्यम स्तर से ऊपर जाती है, तो केंद्रीय बैंक अपनी ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं। इससे वैश्विक निवेशकों को वहां अपनी पूंजी पर बेहतर प्रतिफल मिलता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पूंजी का प्रवाह बढ़ता है। यह प्रवाह घरेलू मुद्रा की मांग को तेज कर देता है, जिसके चलते ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी मुद्राओं को सहारा मिलता है। इसके साथ ही सकल घरेलू उत्पाद, विनिर्माण और सेवा पीएमआई, रोजगार आंकड़े और उपभोक्ता विश्वास जैसे व्यापक आर्थिक संकेतक सीधे तौर पर मुद्रा के स्वास्थ्य को तय करते हैं।
मात्रात्मक ढील बनाम मात्रात्मक सख्ती के मौद्रिक उपकरण
पारंपरिक ब्याज दर समायोजन के अलावा केंद्रीय बैंक चरम परिस्थितियों में अपरंपरागत उपायों का सहारा लेते हैं। ऐसा ही एक उपकरण क्वांटिटेटिव ईजिंग यानी मात्रात्मक ढील है। इसका उपयोग तब किया जाता है जब ब्याज दरों को न्यूनतम स्तर तक घटाने के बाद भी अर्थव्यवस्था में ऋण का प्रवाह बहाल नहीं हो पाता। इस प्रक्रिया में रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नई मुद्रा बनाकर वित्तीय संस्थानों से सरकारी या कॉर्पोरेट बॉन्ड खरीदता है, जिससे बैंकिंग प्रणाली में तरलता का प्रवाह बढ़ जाता है। बड़े पैमाने पर नकदी डालने की इस प्रक्रिया से अक्सर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर कमजोर होता है।
इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग यानी मात्रात्मक सख्ती पूरी तरह से मात्रात्मक ढील की उल्टी प्रक्रिया है। जब अर्थव्यवस्था में सुधार आ जाता है और महंगाई बढ़ने लगती है, तब केंद्रीय बैंक नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और अपने पोर्टफोलियो में परिपक्व होने वाले बॉन्ड की मूल राशि का दोबारा निवेश रोक देता है। इससे बाजार से अतिरिक्त नकदी वापस खिंच जाती है, जो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए सकारात्मक या तेजी का कारक बनती है।
वैश्विक आर्थिक परिदृश्य: डॉलर का दबदबा, येन और सोने की चाल
ऑस्ट्रेलियाई नीतिगत बैठक के समय व्यापक वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी हलचल मची हुई है। अमेरिकी डॉलर वर्तमान में दो महीने के उच्च स्तर के करीब बना हुआ है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है, जिसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा आगे भी दरें बढ़ाने की अटकलें तेज हो गई हैं। इन अटकलों ने अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड को बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर धकेल दिया है। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को मजबूत बनाए रखा है, जिससे कई प्रतिस्पर्धी मुद्राओं पर दबाव है।
उधर डॉलर बनाम जापानी येन जोड़ी 157.00 के मध्य स्तर पर कारोबार करती दिखी। डोनाल्ड ट्रंप द्वारा जापानी येन की कमजोरी पर जताई गई चिंताओं ने अमेरिका और जापान के संयुक्त बाजार हस्तक्षेप की अटकलों को जन्म दिया है। बैंक ऑफ जापान के सख्त रुख ने येन को सहारा देकर इस जोड़ी की बढ़त को सीमित रखा है, हालांकि मजबूत अमेरिकी बॉन्ड यील्ड डॉलर को सहारा दे रही है। कमोडिटी बाजार में, सोने की कीमतें भारी गिरावट के बाद 4,100 डॉलर प्रति औंस के स्तर के आसपास समेकित होती नजर आईं, जहां फेडरल रिजर्व की अक्टूबर बैठक में संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों और ऊंची बॉन्ड यील्ड ने बिना ब्याज वाली इस परिसंपत्ति पर दबाव बनाए रखा है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य केंद्रीय बैंक भी समान चुनौतियों से जूझ रहे हैं। हाल ही में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने ही अपनी ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की है। दोनों ही संस्थान महंगाई के जोखिमों का सामना कर रहे हैं और आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की नीति तय करने का संकेत दे चुके हैं। इसी बीच ब्रिटेन में डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं, जिसने वैश्विक ऊर्जा बाजार और विकास दर को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
















