अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में न्यूजीलैंड डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले लगातार तीन कारोबारी सत्रों से 0.5650 के अहम निचले स्तर के करीब खुद को संभालने की जद्दोजहद कर रहा है। पिछले पांच हफ्तों की लगातार गिरावट ने मुद्रा जोड़ी को जून के अंतिम दिनों के बाद के अपने सबसे कमजोर पायदान पर धकेल दिया था। सोमवार के सत्र में निचला स्तर 0.5650 दर्ज किया गया, जो गुरुवार और शुक्रवार के निम्नतम स्तरों के बिल्कुल बराबर रहा। इस स्तर से मामूली तेजी के साथ बाजार बंद हुआ। वर्तमान में लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार यह जोड़ी 0.5664 के स्तर पर देखी जा रही है, जो पिछले 0.5651 के बंद भाव की तुलना में 0.23% की मामूली बढ़त दर्शाती है। 52-सप्ताह के कारोबार में यह दायरा 0.5584 से 0.6093 का रहा है और मौजूदा ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर है।
बाजार की चाल का मुख्य आधार रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड द्वारा उठाए जाने वाले आगामी कदम हैं। मौजूदा समय में बाजार 28 अक्टूबर की मौद्रिक नीति बैठक में आधिकारिक नकद दर यानी ऑफिशियल कैश रेट को 2.75% से बढ़ाकर 3% किए जाने की लगभग 80% संभावना मानकर चल रहा है। यह परिदृश्य 2 सितंबर को की गई ब्याज दर वृद्धि के तुरंत बाद की स्थिति से बिल्कुल अलग है, जब अगली बढ़ोतरी की उम्मीद केवल तीन में से एक यानी लगभग 33% आंकी जा रही थी। अब यह अनुमान चार में से पांच के मजबूत स्तर पर पहुंच चुका है। इसके ठीक दस दिन बाद 7 नवंबर को न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए मतदान होना है, जिससे नीतिगत फैसले के राजनीतिक और आर्थिक मायने काफी बढ़ गए हैं।
न्यूजीलैंड के घरेलू आंकड़े और नीतिगत परिदृश्य
न्यूजीलैंड के घरेलू मोर्चे पर आर्थिक आंकड़े जारी होने की प्रक्रिया जारी है। अगस्त महीने के बिल्डिंग परमिट के आंकड़े बुधवार को 21:45 GMT पर जारी होने हैं। इससे पहले जुलाई में इनमें -4.3% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। इसके तुरंत बाद गुरुवार को 21:00 GMT पर एएनजेड-रॉय मॉर्गन उपभोक्ता विश्वास सूचकांक सामने आएगा, जो पिछली बार 98 के स्तर पर रहा था। मुद्रा विश्लेषकों का स्पष्ट मानना है कि इनमें से कोई भी आंकड़ा 28 अक्टूबर को होने वाली ब्याज दर वृद्धि के रुख को बदलने की क्षमता नहीं रखता, क्योंकि बाजार में 80% संभावना पहले ही तय मानी जा रही है।
न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था और उसकी मुद्रा की आंतरिक संरचना काफी हद तक उसकी केंद्रीय बैंक की नीति पर निर्भर करती है। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड का मुख्य वैधानिक लक्ष्य मध्यम अवधि में मुद्रास्फीति की दर को 1% से 3% के दायरे में बनाए रखना है, जिसमें इसका केंद्रीय बिंदु 2% के आसपास केंद्रित रहता है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए बैंक ब्याज दरों का निर्धारण करता है। जब महंगाई दर बहुत अधिक हो जाती है, तो केंद्रीय बैंक आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को धीमा करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करता है। इस कदम से बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी होती है, जिससे देश में विदेशी निवेश का आकर्षण बढ़ता है और अंततः कीवी डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, कम ब्याज दरें मुद्रा को कमजोर करने का काम करती हैं।
न्यूजीलैंड और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों के बीच का अंतर भी इस मुद्रा जोड़ी की चाल को सीधे तौर पर तय करता है। यदि किसी अर्थव्यवस्था में उच्च आर्थिक विकास दर, कम बेरोजगारी और बेहतर कारोबारी विश्वास देखने को मिले, तो यह मुद्रा के लिए सकारात्मक माना जाता है। मजबूत आर्थिक वृद्धि विदेशी पूंजी को आकर्षित करती है और केंद्रीय बैंक को नीति सख्त करने का अवसर देती है। हालांकि, यदि घरेलू व्यापक आर्थिक आंकड़े कमजोर रहते हैं, तो न्यूजीलैंड डॉलर में मूल्यह्रास की प्रवृत्ति तेज हो जाती है।
चीन का प्रभाव और कमोडिटी बाजार का चक्र
न्यूजीलैंड डॉलर की पहचान वैश्विक वित्तीय बाजारों में एक प्रमुख कमोडिटी करेंसी के रूप में होती है। इसे कीवी के नाम से भी व्यापक रूप से जाना जाता है। इस मुद्रा का सीधा संबंध वैश्विक जोखिम की स्थिति से जुड़ा होता है। जब बाजार में जोखिम उठाने की धारणा यानी 'रिस्क-ऑन' का माहौल होता है और निवेशक वैश्विक आर्थिक विकास को लेकर आशावादी होते हैं, तो वे उच्च प्रतिफल वाली संपत्तियों और कमोडिटीज की तरफ रुख करते हैं। ऐसे दौर में न्यूजीलैंड डॉलर को उल्लेखनीय मजबूती मिलती है। वहीं दूसरी ओर, वैश्विक बाजार में अस्थिरता, मंदी की आशंका या आर्थिक अनिश्चितता के दौर में निवेशक जोखिम वाली संपत्तियों से निकलकर सुरक्षित निवेश विकल्पों की शरण लेते हैं, जिससे कीवी डॉलर तेजी से कमजोर होता है।
इसके अलावा न्यूजीलैंड की अर्थव्यवस्था की कुछ अपनी विशिष्टताएं हैं जो सीधे तौर पर विनिमय दर को प्रभावित करती हैं। चीन न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। यही वजह है कि चीनी अर्थव्यवस्था का हर उतार-चढ़ाव कीवी डॉलर पर सीधा असर डालता है। यदि चीनी अर्थव्यवस्था से नकारात्मक या सुस्त विकास के आंकड़े आते हैं, तो इसका सीधा अर्थ यह निकाला जाता है कि न्यूजीलैंड से चीन को होने वाले निर्यात में कमी आएगी। यह स्थिति घरेलू उत्पादन और व्यापार संतुलन को चोट पहुंचाती है, जिसका दबाव मुद्रा पर नजर आता है। दूसरी ओर, डेयरी उत्पाद न्यूजीलैंड का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र हैं। जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में डेयरी की कीमतें बढ़ती हैं, तो देश की निर्यात आय में जबरदस्त इजाफा होता है, जिससे अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और कीवी डॉलर को सीधा संबल मिलता है।
अमेरिकी वृहद आर्थिक आंकड़ों से राहत की उम्मीद
कीवी डॉलर के लिए गिरावट के इस सिलसिले से उबरने की एकमात्र उम्मीद अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के प्रदर्शन पर टिकी हुई है। बुधवार को अमेरिका की कोर पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर यानी पीसीई मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी होने वाले हैं, जिसके सालाना आधार पर 3.4% रहने का अनुमान लगाया गया है। इसके बाद गुरुवार को इंस्टीट्यूट फॉर सप्लाई मैनेजमेंट यानी आईएसएम विनिर्माण सर्वेक्षण के आंकड़े सामने आएंगे, जिसके 54.9 रहने की संभावना है। हफ्ते के अंत में शुक्रवार को सितंबर के नॉन-फार्म पेरोल यानी रोजगार के आंकड़े जारी किए जाएंगे, जिसके 84,000 रहने का अनुमान है, जबकि अगस्त में यह आंकड़ा 162,000 दर्ज किया गया था।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि रोजगार सृजन की संख्या कमजोर साबित होती है, तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व अक्टूबर की बैठक में ब्याज दर बढ़ाने के अपने संभावित फैसले से पीछे हट सकता है। कमजोर अमेरिकी आंकड़ों से डॉलर सूचकांक पर दबाव बनेगा, जिससे न्यूजीलैंड डॉलर को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, रोजगार आंकड़ों से दो दिन पहले आने वाला मुद्रास्फीति का 3.4% का मजबूत अनुमान दूसरी ही दिशा की ओर संकेत कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि अमेरिकी महंगाई अभी भी पूरी तरह काबू में नहीं आई है और सख्त मौद्रिक नीति का दौर जारी रह सकता है।
तकनीकी स्तर और बाजार का मौजूदा ढांचा
तकनीकी चार्ट पर न्यूजीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी का ढांचा बेहद नाजुक बना हुआ है। रेजिस्टेंस यानी प्रतिरोध के मोर्चे पर, 23 सितंबर के ब्रेकडाउन के बाद से 0.5700 के स्तर ने प्रत्येक कारोबारी सत्र में बढ़त को सीमित किया है, जिसमें सोमवार का सत्र भी शामिल है। यदि कीमत इस स्तर को पार करने में सफल होती है, तो अगला बड़ा प्रतिरोध 0.5750 पर स्थित है, जहां 22 सितंबर को शुरू हुआ पिछला उछाल आकर रुक गया था।
सपोर्ट यानी समर्थन के स्तरों पर नजर डालें तो 0.5650 का स्तर बेहद अहम साबित हुआ है, जिसने पिछले गुरुवार, शुक्रवार और सोमवार को लगातार तीन सत्रों में गिरावट को थामा है। यदि 0.5650 का यह स्तर नीचे की तरफ टूटता है, तो जून के अंतिम दिनों का 0.5600 के ठीक ऊपर बना निचला स्तर ही एकमात्र सहारा होगा। इसके भी टूटने पर मुद्रा सीधे 0.5550 के अगले सपोर्ट की ओर फिसल सकती है। दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी स्टोच आरएसआई रीडिंग सितंबर के मध्य से ही सिंगल डिजिट में बनी हुई है। इसका अर्थ यह है कि बाजार में 0.5700 की ओर एक अल्पकालिक तकनीकी उछाल की गुंजाइश बनी हुई है, लेकिन जब तक दैनिक आधार पर 0.5750 के ऊपर क्लोजिंग नहीं मिलती, तब तक समग्र मंदी का ढांचा बरकरार रहेगा।
वर्तमान लाइव तकनीकी संकेतकों पर गौर करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 28 पर है, जो अत्यधिक बिकवाली यानी ओवरसोल्ड जोन को दर्शाता है। एमएसीडी -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल स्तर -0.00 है और इसका हिस्टोग्राम -0.00 के साथ मंदी का संकेत दे रहा है। मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय ईएमए 0.5756, 50-दिवसीय ईएमए 0.5806 और 200-दिवसीय ईएमए 0.5824 पर स्थित है। वहीं 50-दिवसीय एसएमए 0.5839 और 200-दिवसीय एसएमए 0.5851 है। 50-दिवसीय ईएमए का 200-दिवसीय ईएमए से नीचे जाना डेथ क्रॉस की पुष्टि करता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति को दर्शाता है। 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 0.5610 से 0.5940 के दायरे में फैले हैं और मध्य बैंड 0.5775 पर है। एडीएक्स की 48 की रीडिंग एक मजबूत ट्रेंडिंग बाजार की पुष्टि करती है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 7 और सिग्नल लाइन 3 पर दर्ज की गई है। पिवट स्तर 0.5667 पर है, जिसमें पहला रेजिस्टेंस R1 0.5676 और दूसरा R2 0.5687 है, जबकि पहला सपोर्ट S1 0.5656 और दूसरा S2 0.5647 पर है। 20-दिवसीय सपोर्ट 0.5651 और रेजिस्टेंस 0.5903 के आसपास बना हुआ है।
अन्य वैश्विक संपत्तियों और केंद्रीय बैंकों की हलचल
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की आक्रामकता और भू-राजनीतिक तनाव का असर देखने को मिल रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.10% की गिरावट के साथ 0.7016 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ताओं की उम्मीदें धुंधली पड़ने से बाजार की धारणा बिगड़ी है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में तेजी आई है और अमेरिकी शेयर बाजारों में गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के आगामी मौद्रिक नीतिगत फैसले से पहले भी कारोबारी गतिविधियां काफी हद तक सीमित रहीं।
दूसरी ओर, डॉलर और जापानी येन की जोड़ी में निचले स्तरों पर खरीदार सक्रिय हुए हैं। इस जोड़ी ने शुक्रवार की उस तेज गिरावट के कुछ हिस्से की भरपाई की, जो अधिकारियों द्वारा जापानी मुद्रा को सहारा देने के लिए बाजार में हस्तक्षेप करने की अटकलों के कारण आई थी। हालांकि, बैंक ऑफ जापान के नरम रुख वाले मिनट्स ने येन की बढ़त पर लगाम लगाई। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे वैश्विक स्तर पर मुद्रास्फीति का खतरा फिर से गहरा गया है। इस घटनाक्रम ने फेडरल रिजर्व द्वारा अक्टूबर में दरें बढ़ाने के दांव को मजबूती दी है, जिससे डॉलर इंडेक्स को समर्थन मिला और डॉलर-येन जोड़ी वापस 158.00 के स्तर की तरफ बढ़ गई।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमत मंगलवार को शुरुआती एशियाई सत्र के दौरान गिरकर 4,125 डॉलर के करीब पहुंच गई। गैर-प्रतिफल वाली इस कीमती धातु पर बिकवाली का दबाव इसलिए देखा जा रहा है क्योंकि बढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और फेडरल रिजर्व द्वारा आगे भी ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंकाओं ने सोने की मांग को कमजोर कर दिया है। इसके साथ ही, आर्थिक चिंताओं के बीच ब्रिटेन में डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी कुछ चिंताएं दूर होने के बावजूद कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी हुई है। मौद्रिक नीति के मोर्चे पर फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान दोनों ने पिछले हफ्ते एक जैसा कदम उठाते हुए ब्याज दरों में 25 आधार अंकों की वृद्धि की थी, दोनों ही मुद्रास्फीति के जोखिमों का सामना कर रहे हैं और दोनों ने ही संकेत दिया है कि उनके भविष्य के फैसले पूरी तरह से आने वाले आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेंगे।

















