अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में कैनेडियन डॉलर (CAD) लगातार मजबूती दर्ज कर रहा है। अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक बातचीत में प्रगति के संकेतों और अमेरिकी डॉलर में आई चौतरफा कमजोरी ने कैनेडियन मुद्रा की रफ्तार को बल दिया है। हालांकि शुरुआती कारोबार में कैनेडियन डॉलर की बढ़त सीमित रही, लेकिन प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले इसके 0.3 प्रतिशत के उछाल ने इसे न्यूजीलैंड डॉलर के ठीक बाद दूसरे स्थान पर ला खड़ा किया है। विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबारियों की नजर अब अमेरिका और कनाडा के नए व्यापारिक संबंधों पर टिकी है।
अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापारिक राहत के संकेत
दोनों देशों के बीच तैयार हो रहे अनंतिम व्यापार समझौते से कनाडा के इस्पात (स्टील) और एल्युमीनियम क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके साथ ही वाहन (ऑटो) उद्योग पर लगने वाले टैरिफ में भी कटौती की बात सामने आ रही है। हालांकि, इस समझौते की बारीकियों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। कनाडाई सरकार द्वारा इस सौदे को अंजाम देने के लिए दी गई रियायतों का घरेलू स्तर पर कैसा स्वागत होता है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा। वर्तमान में कैनेडियन डॉलर का स्पॉट भाव 1.3800 के अपने उचित मूल्य (फेयर वैल्यू) अनुमान से नीचे कारोबार कर रहा है।
तकनीकी विश्लेषण और 1.35 से 1.37 का लक्ष्य
स्कॉशियाबैंक के तकनीकी विश्लेषण के अनुसार अमेरिकी डॉलर में लगातार गिरावट का रुख देखा जा रहा है। यूएसडी (USD) ने 1.3817 के अपने रीट्रेसमेंट सपोर्ट को नीचे की तरफ तोड़ दिया है। इसके अलावा इंट्राडे, डेली और वीकली चार्ट्स पर डायरेक्शनल मूवमेंट इंडेक्स (DMI) ऑसिलेटर में भी मंदी के संकेत बने हुए हैं। इन तकनीकी संकेतकों के कारण अमेरिकी डॉलर की वापसी की संभावनाएं काफी सीमित हो गई हैं। ऊपर की तरफ रजिस्टेंस 1.3825 से 1.3850 के स्तर तक नीचे आ गया है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिकी डॉलर में और गिरावट आएगी, जिससे कैनेडियन डॉलर मजबूत होकर 1.35 से 1.37 के दायरे में पहुंच सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी का अभूतपूर्व बॉन्ड बायबैक फैसला
वैश्विक मुद्रा बाजार में आए इस बदलाव के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग का एक अप्रत्याशित निर्णय भी शामिल है। ट्रेजरी विभाग ने अपने तय कैलेंडर से अलग हटकर 12:32 GMT पर तरलता सहायता कार्यक्रम के तहत बॉन्ड बायबैक की सीमा को दोगुना करने का ऐलान किया। 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की अवधि वाले दीर्घकालिक बॉन्ड्स के लिए अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक प्रभावी रहेगी। इस अप्रत्याशित कदम से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में हाल ही में आई तेजी को थामने में मदद मिली है और 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 4.672 प्रतिशत पर आकर स्थिर हो गई है।
ब्रिटिश पाउंड और यूरो की स्थिति
अमेरिकी डॉलर पर बने दबाव का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) मामूली गिरावट के बावजूद 1.3600 के स्तर से काफी ऊपर सकारात्मक दायरे में बना हुआ है। इससे पहले कारोबारी सत्र के दौरान पाउंड 1.3650 के छह महीने के उच्चतम स्तर को छू चुका था। दूसरी ओर यूरो (EUR/USD) अपनी शुरुआती तेजी को बरकरार नहीं रख सका और 1.1700 के नीचे स्थिर बना रहा, जबकि दिन के शुरुआती समय में इसने तीन महीने के नए शिखर को छुआ था। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के बॉन्ड बायबैक फैसले के बाद अमेरिकी डॉलर में मजबूती नहीं आ पा रही है, जिससे इन जोड़ों को सहारा मिल रहा है।
सोने में गिरावट और क्रिप्टो बाजार में तेजी
बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी डॉलर के स्थिर होने से सोने की कीमतों (XAU/USD) पर दबाव देखने को मिला है। अमेरिकी कारोबारी घंटों की शुरुआत में सोने में हल्की गिरावट दर्ज की गई। वहीं दूसरी तरफ, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में जोरदार तेजी का माहौल है। बिटकॉइन (BTC) $70,000 के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर गया है, जिससे पूरे डिजिटल एसेट मार्केट को बल मिला है। इथेरियम (ETH) भी $2,200 के ऊपर मजबूती से टिका हुआ है, जबकि रिपल (XRP) में सुधार देखा गया है और यह $1.15 के पार पहुंच गया है।



















