अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में कीमती धातुओं के लिए यह सप्ताह काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा। वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी की कीमतों में दबाव बना रहा, जिसके चलते सोने ने इस सप्ताह 1.5% की साप्ताहिक गिरावट दर्ज की है, जबकि चांदी की कीमतों में 4% का बड़ा नुकसान देखा गया है। घरेलू बाजार में, MCX पर सोना 1,43,500 रुपये के नीचे बंद हुआ और MCX चांदी 2.23 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर से नीचे आ गई है।
बाजार का भविष्य और फेडरल रिजर्व की भूमिका
आने वाले समय में बाजार के रुख को लेकर सतर्कता बनी रहने की उम्मीद है। MCX सोना अगले सप्ताह 1.42 लाख रुपये से 1.45 लाख रुपये के दायरे में रह सकता है। निवेशकों की निगाहें अब अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी US CPI डेटा पर टिकी हैं, जिससे ब्याज दरों को लेकर स्पष्ट तस्वीर सामने आ सकती है। इसके अतिरिक्त, फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की गवाही बाजार को भविष्य की नीतियों के संकेत देगी। हाल ही में जारी फेडरल रिजर्व की जून बैठक के मिनट्स से पता चला है कि नीति निर्माताओं के बीच महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं और कुछ सदस्यों ने ब्याज दरों में बढ़ोतरी का भी समर्थन किया था, हालांकि अंततः दरों को स्थिर रखा गया।
रुपये और कच्चे तेल की स्थिति
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.2 के आसपास मजबूती की ओर बढ़ा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सरकारी बैंकों के माध्यम से डॉलर की बिक्री और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली नरमी ने रुपये को समर्थन दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें ईरान पर अमेरिकी हमलों के प्रभाव के आकलन के बाद 75 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रही हैं। रुपया घरेलू मोर्चे पर RBI द्वारा डॉलर के प्रवाह को आकर्षित करने के लिए उठाए गए कदमों से भी प्रभावित हुआ है, जिससे इसकी गिरावट की उम्मीदें कम हुई हैं।
वैश्विक संघर्ष और ऊर्जा बाजार
मध्य पूर्व में तनावपूर्ण स्थिति का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर साफ देखा जा सकता है। ब्रेंट क्रूड ने इस सप्ताह लगभग 5% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज की है। हालांकि शुक्रवार को कीमतों में गिरावट देखी गई, लेकिन ईरान और अमेरिका के बीच जारी सैन्य झड़पों ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल और गैस व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है, वहां यातायात बाधित है, जिससे तेल की कीमतों में रिस्क प्रीमियम बना हुआ है।
सोना और चांदी पर दबाव का कारण
शुक्रवार को सोना 2,100 डॉलर प्रति औंस के करीब कारोबार कर रहा था। अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई का डर बढ़ गया है। बाजार अब इस बात की संभावना तलाश रहे हैं कि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है, जिसकी संभावना करीब 60% आंकी जा रही है। चांदी भी दबाव में है और 30 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है। भारत में जहां सोने पर भारी डिस्काउंट देखा गया, वहीं चीन में मांग स्थिर रही है। डेटा के अनुसार, चीन के केंद्रीय बैंक ने जून में ढाई साल से अधिक के अंतराल में सबसे बड़ी मासिक वृद्धि सोने के भंडार में की है।











