चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी माइक्रोन (MU) का शेयर 9 जुलाई 2026 को 4.52% यानी 42.84 अंक की तेजी के साथ बंद हुआ था। इस उछाल की वजह थी कंपनी का वह बड़ा ऐलान, जिसमें उसने अमेरिका में 250 अरब डॉलर के निवेश की योजना सामने रखी। यह रकम पिछले साल जून में घोषित 200 अरब डॉलर की योजना से कहीं ज्यादा है। कंपनी अपने घरेलू उत्पादन को रफ्तार देना चाहती है और इसी कड़ी में उसने न्यूयॉर्क में अपने सेमीकंडक्टर प्लांट पर काम शुरू कर दिया है। इतना ही नहीं, माइक्रोन ने अमेरिका में अपने मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क को मजबूत करने के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन इकोसिस्टम में 3 अरब डॉलर लगाने की बात भी कही। हैरानी की बात यह रही कि इतने बड़े निवेश के ऐलान के बावजूद प्री-मार्केट कारोबार में शेयर लुढ़क गया। आइए समझते हैं ऐसा क्यों हुआ।
निवेश की खबर के बाद भी शेयर क्यों गिरा
9 जुलाई को हरे निशान में बंद होने के बाद माइक्रोन (MU) का शेयर प्री-मार्केट घंटों में 2.77% यानी 27.42 अंक टूट गया। 250 अरब डॉलर की ताजा निवेश योजना को देखते हुए यह गिरावट चौंकाने वाली है। दरअसल इसके पीछे एक नहीं, बल्कि कई कारण काम कर रहे हैं।
पूरे सेक्टर पर दबाव
माइक्रोन (MU) साल 2026 की सबसे चमकदार कंपनियों में से एक रही है। AI मेमोरी चिप बनाने की उसकी क्षमता ने शेयर की कीमत में जबरदस्त उछाल ला दिया। AI मेमोरी चिप सेक्टर की 'बिग थ्री' कंपनियों में माइक्रोन के साथ एसके हाइनिक्स और सैमसंग भी शामिल हैं। बीते कुछ दिनों में एसके हाइनिक्स और सैमसंग के शेयरों में तेज गिरावट देखी गई, क्योंकि बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया था। हालत यह हुई कि 7 जुलाई को दक्षिण कोरिया के कोस्पी बाजार में सर्किट ब्रेकर लगने के बाद कारोबार तक रोकना पड़ा। ऐसे में मुमकिन है कि पूरा सेक्टर ही इस समय गिरावट के दौर से गुजर रहा हो, और माइक्रोन उससे अछूता न रहा हो।
मुनाफावसूली का असर
जून 2026 के आखिर में जब माइक्रोन (MU) के तिमाही नतीजे सामने आए, उसके तुरंत बाद शेयर में बड़े पैमाने पर मुनाफावसूली हुई। निवेशकों ने ऊंचे भाव पर शेयर बेचकर मुनाफा काटा, और यही मुनाफावसूली शेयर की कीमत गिरने की एक और अहम वजह बनी।
जोखिम से दूरी और ब्याज दर की आशंका
इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के फिर से भड़कने के बाद निवेशक जोखिम से दूरी बनाते नजर आ रहे हैं। उन्हें डर है कि सप्लाई चेन में दिक्कतें आ सकती हैं और बड़े आर्थिक दबाव बढ़ सकते हैं। एक आशंका यह भी है कि फेडरल रिजर्व इस साल के अंत में ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अगर केंद्रीय बैंक ऐसा कदम उठाता है, तो बाजार से निवेशकों का पलायन और तेज हो सकता है। इन तमाम वजहों ने मिलकर माइक्रोन के शेयर पर दबाव बनाया, भले ही कंपनी की निवेश योजना अपने आप में बेहद बड़ी और सकारात्मक हो।











