फेडरल रिजर्व के प्रमुख अधिकारी ऑस्टिन गुल्सबी ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अत्यधिक उपभोक्ता मांग से पैदा हुई महंगाई अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। वर्तमान आर्थिक स्थितियों पर चर्चा करते हुए ऑस्टिन गुल्सबी ने जोर देकर कहा कि मूल्य वृद्धि का दबाव अनुमान से कहीं अधिक समय तक बना हुआ है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब केंद्रीय बैंक के नीति निर्माता ब्याज दरों की भावी दिशा और मौद्रिक प्रणाली में नकदी के प्रवाह को लेकर गहन मंथन कर रहे हैं।
ऑस्टिन गुल्सबी ने अर्थव्यवस्था के मूलभूत ढांचे से जुड़े कई अहम बिंदुओं पर अपने सहयोगी अधिकारी वॉर्श के विचारों से सहमति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि मांग के अत्यधिक बढ़ने से उत्पन्न हुई महंगाई को सामान्य उपायों के जरिए जल्दी नियंत्रित करना आसान नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने जुलाई में आयोजित FOMC बैठक के दौरान ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले का समर्थन किया। वार्षिक बैठकों की संख्या को लेकर ऑस्टिन गुल्सबी ने कहा कि इस विषय पर उनकी कोई कठोर राय नहीं है, और उन्होंने उन अटकलों को भी खारिज कर दिया कि फेडरल रिजर्व और अमेरिकी ट्रेजरी एक-दूसरे के विपरीत दिशा में काम कर रहे हैं।
फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और ब्याज दरों का प्रभाव
संयुक्त राज्य अमेरिका में मौद्रिक नीति का निर्धारण फेडरल रिजर्व द्वारा किया जाता है। केंद्रीय बैंक को कानून द्वारा दो मुख्य जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं: कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और देश में अधिकतम रोजगार के अवसर पैदा करना। इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए फेडरल रिजर्व का मुख्य हथियार ब्याज दरों में बदलाव करना है, जो वैश्विक वित्तीय बाजारों में कर्ज की लागत तय करता है।
जब बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं और महंगाई फेडरल रिजर्व के 2 प्रतिशत के लक्ष्य से ऊपर निकल जाती है, तो नीति निर्माता ब्याज दरों में बढ़ोतरी करते हैं। ब्याज दरें बढ़ने से बैंकों, कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे अर्थव्यवस्था में कुल मांग और खर्च में कमी आती है। इस सख्त मौद्रिक नीति का सीधा असर अमेरिकी डॉलर (USD) की मजबूती के रूप में सामने आता है। उच्च रिटर्न मिलने के कारण दुनिया भर के संस्थागत निवेशक अमेरिकी वित्तीय संपत्तियों में पूंजी लगाते हैं, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग और कीमत दोनों बढ़ जाती हैं।
इसके विपरीत, जब महंगाई की दर 2 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे गिर जाती है या देश में बेरोजगारी दर चिंताजनक स्तर पर पहुंच जाती है, तो फेडरल रिजर्व नरम मौद्रिक नीति अपनाता है। ब्याज दरों में कटौती करके केंद्रीय बैंक कर्ज सस्ता करता है ताकि व्यापारिक निवेश और उपभोक्ता खर्च को प्रोत्साहन मिल सके। हालांकि, ब्याज दरों में कमी से डॉलर में रिटर्न कम हो जाता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजारों में डॉलर के मूल्य पर दबाव बनता है।
फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) की संरचना और संचालन
अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े सभी महत्वपूर्ण निर्णय फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) द्वारा लिए जाते हैं। यह समिति एक वर्ष में आठ निर्धारित समीक्षा बैठकें आयोजित करती है। इन बैठकों में व्यापक आर्थिक आंकड़ों, वित्तीय स्थिरता के जोखिमों और देश की मौद्रिक स्थिति का विश्लेषण करके ब्याज दरों और केंद्रीय बैंक के बैलेंस शीट प्रबंधन पर मतदान किया जाता है।
FOMC नीति निकाय में कुल 12 मतदान सदस्य शामिल होते हैं। इनमें वाशिंगटन स्थित फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 7 सदस्य शामिल हैं, जिनकी नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। इनके अलावा न्यू यॉर्क फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष के पास स्थायी मतदान का अधिकार होता है, क्योंकि न्यू यॉर्क बैंक खुले बाजार के परिचालन को संचालित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। समिति के शेष 4 मतदान पद देश के अन्य 11 क्षेत्रीय फेडरल रिजर्व बैंकों के अध्यक्षों के बीच एक-एक वर्ष के चक्रीय आधार पर बांटे जाते हैं, जिससे पूरे देश का संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होता है।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की कार्यप्रणाली
गंभीर वित्तीय संकट या लंबे आर्थिक मंदी के दौर में, जब पारंपरिक ब्याज दर कटौती के उपाय अप्रभावी हो जाते हैं, तो फेडरल रिजर्व गैर-पारंपरिक मौद्रिक नीतियों का सहारा लेता है। क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) एक ऐसी नीति है जिसके माध्यम से केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी का प्रवाह तेजी से बढ़ाता है। वर्ष 2008 के महान वित्तीय संकट के दौरान फेडरल रिजर्व ने इस हथियार का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया था। इसके तहत केंद्रीय बैंक नई मुद्रा छापकर वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले सरकारी बॉन्ड खरीदता है। इससे बाजार में कर्ज की उपलब्धता बढ़ती है और दीर्घकालिक ब्याज दरें गिरती हैं, हालांकि इससे डॉलर के कमजोर होने का खतरा रहता है।
दूसरी ओर, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) इसकी ठीक विपरीत प्रक्रिया है। QT के अंतर्गत फेडरल रिजर्व अपनी बैलेंस शीट को छोटा करने के लिए नए बॉन्ड खरीदना बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड से मिलने वाली मूल राशि का पुनर्निवेश नहीं करता। इससे बैंकिंग प्रणाली से अतिरिक्त नकदी वापस खींच ली जाती है और क्रेडिट आपूर्ति सीमित हो जाती है। यह नीति आमतौर पर अमेरिकी डॉलर के मूल्य को मजबूती प्रदान करती है और वित्तीय परिसंपत्तियों की कीमतों पर नियंत्रण रखती है।
जैक्सन होल सम्मेलन के संकेत और विदेशी मुद्रा बाजार में हलचल
केंद्रीय बैंक के अधिकारियों के वक्तव्यों और नए आर्थिक आंकड़ों के जारी होने के बाद वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजारों में बड़ी हलचल देखने को मिली। जैक्सन होल सम्मेलन में अधिकारी वॉर्श द्वारा दिए गए बयानों से सख्त मौद्रिक नीति के संकेत मिले, जिससे निवेशकों को लगा कि ब्याज दरों में कटौती में देरी हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिका के नॉन-फार्म पेरोल (NFP) के वार्षिक आंकड़ों में संशोधन जारी किया गया, जिसमें नौकरियों की संख्या में -79,000 का नकारात्मक संशोधन दर्ज किया गया।
महंगाई की चिंता और मजबूत होते डॉलर के कारण प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं में भारी गिरावट आई। ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (GBP/USD) शुक्रवार को अपनी साप्ताहिक गिरावट को बढ़ाते हुए 1.3530 के स्तर की ओर खिसक गई। इसी तरह, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (EUR/USD) में भी बिकवाली तेज हुई और सप्ताह के अंत तक यह सात दिनों के निचले स्तर sub-1.1600 क्षेत्र में पहुंच गई।
सोना 200-दिवसीय SMA पर और डीजल क्रैक स्प्रेड ने बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड पर बढ़ते प्रतिफल और मजबूत डॉलर का असर कीमती धातुओं पर भी साफ दिखाई दिया। शुक्रवार को सोने की कीमतों में गिरावट की रफ्तार तेज हो गई और यह अपने महत्वपूर्ण 200-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के करीब $4,530 प्रति ट्रॉय औंस के निचले स्तर को छूने लगा। निवेशक फेडरल रिजर्व की आगामी सितंबर बैठक को ध्यान में रखते हुए अपनी स्थिति में बदलाव कर रहे हैं।
वहीं दूसरी ओर, ऊर्जा बाजार में भले ही ऊपरी तौर पर शांति दिख रही हो, लेकिन डीजल बाजार से तनावपूर्ण संकेत मिल रहे हैं। अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड, जो अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स और WTI क्रूड ऑयल के बीच के अंतर को दर्शाता है, इतिहास में पहली बार $100 प्रति बैरल के पार निकल गया। कारोबारी सत्र के दौरान यह अंतर $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया, जो रिफाइनिंग क्षमता पर दबाव और आपूर्ति की कमी को उजागर करता है।
क्रिप्टो बाजार में करेक्शन और बिटकॉइन का तकनीकी विश्लेषण
आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच क्रिप्टो परिसंपत्तियों में बिकवाली देखने को मिली। बिटकॉइन (BTC) शुक्रवार को एक बार फिर $80,000 के स्तर से नीचे आ गया, जब वह $81,000 से $82,000 के प्रतिरोध क्षेत्र को तोड़ने की अपनी दूसरी कोशिश में विफल रहा। इसका असर अन्य प्रमुख डिजिटल संपत्तियों पर भी पड़ा, जहां एथेरियम (ETH) गिरकर $2,500 के स्तर पर पहुंच गया और रिपल (XRP) $1.40 के सपोर्ट स्तर की तरफ फिसल गया।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, बिटकॉइन (BTC-USD) कारोबारी सत्र के अंत में $77,295 पर बंद हुआ, जो पिछले बंद भाव $80,258 की तुलना में 3.69 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। इस दौरान ट्रेडिंग वॉल्यूम इसके 20-दिवसीय औसत से 1.25 गुना अधिक रहा। बीते 52 हफ्तों के दौरान बिटकॉइन $57,748 से $97,861 के व्यापक दायरे में कारोबार कर चुका है।
तकनीकी संकेतकों के अनुसार, बिटकॉइन का 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 69 के स्तर पर है, जो ओवरबॉट क्षेत्र के करीब मजबूत तेजी का संकेत देता है। MACD इंडिकेटर 4047.28 के स्तर पर है जो सिग्नल लाइन 3086.95 से ऊपर बना हुआ है और 960.34 का बुलिश हिस्टोग्राम दर्शा रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज के संदर्भ में, 20-दिवसीय EMA $72,526, 50-दिवसीय EMA $68,570 और 200-दिवसीय EMA $73,204 पर मौजूद हैं। वहीं 50-दिवसीय SMA ($66,711) और 200-दिवसीय SMA ($69,260) के बीच डेथ क्रॉस का पैटर्न बना हुआ है।
अल्पकालिक विश्लेषण से पता चलता है कि बिटकॉइन ने अपने बढ़ते ट्रेंड चैनल की सीमा को तोड़ा है। निचले स्तरों पर बिटकॉइन को $63,000 और $62,488 के आसपास मजबूत सपोर्ट प्राप्त है, जबकि दैनिक अस्थिरता ATR 2377.87 मापी गई है। मुख्य पिवट स्तरों की बात करें तो मध्य पिवट $78,507 पर है, तात्कालिक प्रतिरोध R1 $79,936 और R2 $82,578 पर हैं, जबकि नीचे की तरफ सपोर्ट स्तर S1 $75,866 और S2 $74,436 पर बने हुए हैं।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों का रुख और आगामी आर्थिक आंकड़े
फेडरल रिजर्व के अलावा अन्य वैश्विक केंद्रीय बैंक भी अपनी मौद्रिक नीतियों में संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) द्वारा आगामी बैठक में ब्याज दरें बढ़ाने की व्यापक उम्मीद की जा रही है, जहां बाजार की नजर उनके भावी नीतिगत मार्गदर्शन पर रहेगी। दूसरी ओर, बैंक ऑफ कनाडा (BoC) द्वारा हाल-फिलहाल दरों को यथावत रखने की संभावना है, हालांकि बाजार में 2027 तक दर वृद्धि को लेकर चर्चा जारी है।
सप्ताह के अंत में वैश्विक वित्तीय बाजारों की निगाहें आगामी अमेरिकी ISM मैन्युफैक्चरिंग PMI डेटा और नॉन-फार्म पेरोल (NFP) की रिपोर्ट पर टिकी हैं। ये आंकड़े स्पष्ट करेंगे कि फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीतियों के बीच अमेरिकी अर्थव्यवस्था और श्रम बाजार किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।


















