सोमवार को भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में जोरदार वापसी देखने को मिली और यह सेक्टर दलाल स्ट्रीट पर सबसे ज्यादा चमकने वाले सेक्टरों में से एक बनकर उभरा। इस तेजी की सबसे बड़ी वजह निवेशकों के रुख में आया साफ बदलाव रही। दुनियाभर में जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर बिकवाली की चपेट में आए, तो निवेशकों ने अपना पैसा उन सॉफ्टवेयर सर्विसेज कंपनियों की तरफ मोड़ दिया, जो AI हार्डवेयर के इस शोर से कहीं कम प्रभावित मानी जाती हैं।
निफ्टी आईटी में करीब 4% की छलांग
निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.81% यानी 1,122.85 अंक चढ़कर सुबह 11:49 बजे (IST) 30,564.75 पर पहुंच गया। इंडेक्स ने कारोबार की शुरुआत 29,825.40 पर की थी। दिन के दौरान इसने 29,820.05 का निचला स्तर और 30,572.40 का ऊपरी स्तर छुआ और फिर मजबूती के साथ आगे बढ़ता रहा। जिस दिन दुनियाभर का टेक्नोलॉजी कारोबार दबाव में था, उस दिन इस तरह की तेजी यह साफ कर रही थी कि निवेशक भारतीय आईटी को पैसा लगाने के लिए एक ज्यादा सुरक्षित ठिकाना मान रहे थे।
दिग्गज कंपनियों ने संभाली कमान
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) इस तेजी में सबसे आगे रहने वालों में शामिल रही। टीसीएस का शेयर 5.07% चढ़कर 2,411.90 रुपये पर पहुंच गया। इसने कारोबार की शुरुआत 2,325.00 रुपये पर की और दिन में 2,412.90 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जो इसके पिछले बंद भाव 2,295.60 रुपये से काफी ऊपर था। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर निर्यातक कंपनी में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की।
टेक महिंद्रा भी इस रैली में शामिल रही। 28 जुलाई को दोपहर 12:08 बजे (IST) यह शेयर 1,634.80 रुपये पर कारोबार कर रहा था, जो पिछले बंद भाव से 3.80% ऊपर था। शेयर 1,599.00 रुपये पर खुला, ऊपर में 1,634.00 रुपये तक गया और नीचे में 1,595.80 रुपये तक फिसला।
एचसीएलटेक का शेयर दोपहर 12:09 बजे (IST) 3.19% की बढ़त के साथ 1,337.30 रुपये पर था। यह 1,301.00 रुपये पर खुला और दिन में 1,342.00 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ, जो इसके पिछले बंद भाव 1,295.90 रुपये से आराम से ऊपर रहा।
इंडेक्स की एक और बड़ी कंपनी इंफोसिस दोपहर 12:10 बजे (IST) 1,114.60 रुपये पर कारोबार कर रही थी, जो पिछले बंद भाव से 3.28% ऊपर था। शेयर 1,097.00 रुपये पर खुला और 1,115.80 रुपये के ऊपरी स्तर तक चढ़ा, जिससे पूरे सेक्टर की तेजी को और बल मिला।
कोफोर्ज ने सबका ध्यान खींचा
इस पूरी लिस्ट में सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर कोफोर्ज रहा, जो दोपहर 12:10 बजे (IST) 9.26% उछलकर 1,670.00 रुपये पर पहुंच गया। यह 1,570.00 रुपये पर खुला और दिन में 1,680.00 रुपये के ऊपरी स्तर तक गया, और पूरी सुबह आईटी सेक्टर में सबसे आगे बना रहा।
इस शेयर के पीछे कुछ खास वजहें भी थीं। कोफोर्ज ने पहली तिमाही में 1.1% की ऑर्गेनिक रेवेन्यू ग्रोथ दर्ज की, जबकि एनकोरा के अधिग्रहण ने कंपनी की कुल ग्रोथ को और बढ़ाया। स्थिर ऑर्गेनिक ग्रोथ और अधिग्रहण की इस जोड़ी ने निवेशकों को शेयर में खरीदारी की ठोस वजह दी, जबकि बाकी सेक्टर एक बड़ी लहर पर सवार था।
इसके अलावा कंपनी ने तिमाही के दौरान 691 मिलियन डॉलर के नए ऑर्डर मिलने की जानकारी दी, जिससे इसकी कुल एग्जीक्यूटेबल ऑर्डर बुक बढ़कर करीब 2.23 बिलियन डॉलर हो गई। इतनी बड़ी डील पाइपलाइन ने कोफोर्ज की मध्यम अवधि की ग्रोथ को लेकर बाजार का भरोसा और मजबूत किया, और शेयर ने आराम से पूरे आईटी इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन किया।
आखिर आईटी में क्यों लौटा पैसा
यह तेजी अचानक नहीं आई। इससे पहले दुनियाभर की AI इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर कंपनियों में भारी बिकवाली हुई थी। निवेशकों को यह चिंता सताने लगी थी कि AI में लगाया जा रहा भारी-भरकम पैसा शायद उतना रिटर्न न दे पाए, जितनी उम्मीद की जा रही है। जैसे ही दुनियाभर की चिप बनाने वाली कंपनियां लड़खड़ाईं, पैसे ने कोई ज्यादा स्थिर ठिकाना तलाशना शुरू किया, और भारतीय टेक्नोलॉजी सर्विसेज कंपनियां इस कसौटी पर खरी उतरीं।
इसकी असली वजह इन कंपनियों के कारोबार के ढांचे में छिपी है। सेमीकंडक्टर बनाने वाली कंपनियों के उलट, भारतीय आईटी कंपनियां अपनी ज्यादातर कमाई सॉफ्टवेयर सर्विसेज, क्लाउड कंप्यूटिंग, कंसल्टिंग और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन से करती हैं, न कि AI चिप या डेटा सेंटर हार्डवेयर बनाकर। यही वजह है कि इन कंपनियों पर AI से जुड़े शेयरों की हालिया बिकवाली का असर कम दिखता है, और सोमवार को निवेशकों ने इस सेक्टर को एक तुलनात्मक रूप से सुरक्षित ठिकाने की तरह देखा।
अब फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर
अब बाजार की निगाहें अमेरिका के फेडरल रिजर्व पर टिकी हैं, जो इसी हफ्ते अपने नीतिगत फैसले का ऐलान करने वाला है। अगर ब्याज दरों के स्थिर रहने का कोई संकेत मिलता है और साथ ही अमेरिकी कंपनियों के अपने टेक्नोलॉजी बजट बढ़ाने के संकेत दिखते हैं, तो इससे भारतीय आईटी कंपनियों को और सहारा मिल सकता है। यह इसलिए मायने रखता है क्योंकि ये कंपनियां अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा नॉर्थ अमेरिका से हासिल करती हैं, जिससे अमेरिकी मांग और अमेरिकी मौद्रिक नीति इनके भविष्य के लिए बेहद अहम हो जाती है। फिलहाल तो दलाल स्ट्रीट की कहानी सॉफ्टवेयर सर्विसेज में पैसे की जोरदार वापसी की रही।



















