ऑस्ट्रेलियन केंद्रीय बैंक इस समय इस बात की समीक्षा कर रहा है कि क्या पूर्व में की गई ब्याज दरों में बढ़ोतरी महंगाई को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त है। सिडनी में मंगलवार को अनिका फाउंडेशन के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर मिशेल बुलॉक ने स्पष्ट किया कि नीति निर्माता दरों में किए गए बदलावों के असर को ध्यान से देख रहे हैं। बुलॉक ने कहा कि "मुख्य सवाल यह है कि क्या पहले की गई सख्ती महंगाई को धीमा करने के लिए काफी है।" इसके साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि आने वाले समय में महंगाई के आंकड़े ऊंचे बने रहते हैं, तो बैंक कैश रेट में और बढ़ोतरी करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
महंगाई की स्थिति और मौद्रिक नीति का असर
केंद्रीय बैंक की गवर्नर ने स्पष्ट किया कि चालू वर्ष के दौरान की गई दर वृद्धि का पूर्ण प्रभाव अभी अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह से दिखाई नहीं दिया है। मौद्रिक नीति के फैसले हमेशा कुछ समय के अंतराल के बाद अपना असर दिखाते हैं, इसलिए पिछली सख्ती का पूरा परिणाम सामने आने में थोड़ा वक्त लगेगा। बुलॉक के अनुसार, केंद्रीय बैंक का सबसे बड़ा दायित्व देश में कम और स्थिर मुद्रास्फीति का माहौल बनाए रखना है, जो लंबे समय के आर्थिक विकास की नींव बनता है।
देश में अंतर्निहित मुद्रास्फीति यानी अंडरलाइंग इन्फ्लेशन की गति हालांकि अनुमान के मुताबिक ही रही है, लेकिन वर्तमान में यह स्वीकृत स्तर से काफी ऊपर बनी हुई है। व्यावसायिक संस्थानों से मिले फीडबैक से संकेत मिलता है कि गैर-श्रम लागत यानी नॉन-लेबर कॉस्ट में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे कंपनियों पर दबाव बढ़ रहा है। वहीं वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के झटकों के कारण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले पूर्ण प्रभाव का आकलन करने में अभी थोड़ा समय लग सकता है।
मांग, श्रम बाजार और प्रॉपर्टी क्षेत्र का आकलन
महंगाई दर को बैंक के लक्षित दायरे में वापस लाने के लिए कुल मांग की वृद्धि में कुछ और नरमी आना आवश्यक माना जा रहा है। इसके साथ ही लेबर मार्केट यानी श्रम बाजार में भी थोड़ी ढील की जरूरत महसूस की जा रही है। बुलॉक ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था का समग्र समायोजन अब तक काफी हद तक वैसा ही रहा है जैसी उम्मीद मई के पूर्वानुमानों में जताई गई थी।
दूसरी ओर, देश के आवास यानी हाउसिंग मार्केट में उम्मीद से अधिक गिरावट और नरमी देखने को मिली है। ब्याज दरों में वृद्धि के कारण प्रॉपर्टी बाजार की गति पहले लगाए गए अनुमानों से अधिक धीमी हुई है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि मौद्रिक नीति के जरिए देश की धीमी उत्पादकता वृद्धि यानी प्रॉडक्टिविटी ग्रोथ की समस्या को हल नहीं किया जा सकता, क्योंकि इसके लिए संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता होती है।
आरबीए का जनादेश और मुद्रा मूल्य का गणित
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश की मौद्रिक नीति का संचालन करता है और ब्याज दरें तय करता है। इसके लिए गवर्नर बोर्ड वर्ष में 11 बार बैठकें करता है, जबकि आवश्यकता पड़ने पर आपातकालीन बैठकें भी बुलाई जाती हैं। RBA का मुख्य लक्ष्य महंगाई को 2% से 3% के बीच बनाए रखना है। इसके अलावा बैंक का दायित्व ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की स्थिरता, पूर्ण रोजगार को बढ़ावा देना और आम जनता के आर्थिक कल्याण को सुनिश्चित करना भी है।
ब्याज दरों का सीधा संबंध विदेशी मुद्रा विनिमय और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) की ताकत से होता है। पारंपरिक रूप से माना जाता था कि अधिक महंगाई किसी भी देश की मुद्रा के मूल्य को कम करती है। हालांकि आधुनिक वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में जब केंद्रीय बैंक महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो विदेशी निवेशक ऊंचे रिटर्न की तलाश में उस देश में पूंजी निवेश करते हैं। इस वजह से स्थानीय मुद्रा की मांग बढ़ती है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती मिलती है।
सकल घरेलू उत्पाद (GDP), मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI, रोजगार के आंकड़े तथा उपभोक्ता भावना सूचकांक जैसे व्यापक आर्थिक आंकड़े अर्थव्यवस्था की सेहत दर्शाते हैं। यदि ये आंकड़े मजबूत रहते हैं तो केंद्रीय बैंक को दरें बढ़ाने या उन्हें ऊंची बनाए रखने का अवसर मिलता है, जिससे मुद्रा को समर्थन प्राप्त होता है।
क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) और क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की कार्यप्रणाली
जब असाधारण परिस्थितियों में केवल ब्याज दरों में कटौती अर्थव्यवस्था में ऋण प्रवाह को सुचारू करने के लिए पर्याप्त नहीं होती, तब क्वांटिटेटिव ईज़िंग (QE) का सहारा लिया जाता है। QE के तहत रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया नई मुद्रा प्रिंट करके वित्तीय संस्थानों से सरकारी और कॉरपोरेट बॉन्ड खरीदता है, जिससे बाजार में पर्याप्त तरलता उपलब्ध कराई जाती है। इस प्रक्रिया से आमतौर पर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) में कमजोरी आती है।
इसके विपरीत, क्वांटिटेटिव टाइटनिंग (QT) की प्रक्रिया तब शुरू की जाती है जब अर्थव्यवस्था रिकवरी की ओर बढ़ती है और महंगाई सिर उठाने लगती है। QT के दौरान RBA नई संपत्तियों की खरीद बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बॉन्ड की परिपक्वता राशि को दोबारा निवेश नहीं करता। बाजार से अतिरिक्त तरलता वापस खींचने की यह प्रक्रिया ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD) के लिए सकारात्मक या बुलिश साबित होती है।
वैश्विक बाजार का रुख और अन्य वित्तीय घटनाक्रम
ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक के इस रुख के बीच एशियाई कारोबारी सत्र में वैश्विक बाजारों में मिला-जुला माहौल देखने को मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी नीतिगत बैठक से पहले निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। इस दौरान GBP/USD में थोड़ी गिरावट देखी गई और यह 1.3290 के स्तर के करीब कारोबार कर रहा था, जबकि अमेरिकी डॉलर की मजबूती से इस पर दबाव बना रहा।
इसी तरह EUR/USD जोड़ी अपने एक महीने के निचले स्तर के पास 1.1300 से ऊपर समेकित होती नजर आई। सर्राफा बाजार में भी सोने की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जहां पीली धातु $4,100 के ऊपर से फिसलकर $4,050 के स्तर के आसपास कारोबार कर रही थी। इसके अलावा वाशिंगटन में अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन नेता क्लैरिटी एक्ट (CLARITY Act) को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं, जिसको लेकर विधायी हलचल तेज हो गई है।



















