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तकनीकी निर्यात से चमकी थाईलैंड की आर्थिक सेहत और फेड की सख्ती से डगमगाए वैश्विक बाजारबाज़ार
2 घंटे पहले· 0

तकनीकी निर्यात से चमकी थाईलैंड की आर्थिक सेहत और फेड की सख्ती से डगमगाए वैश्विक बाजार

एचएसबीसी के मुताबिक एआई क्षेत्र में आई तेजी ने थाईलैंड के इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को नई मजबूती दी है, जबकि वैश्विक बाजार फेडरल रिजर्व के नए नीतिगत बदलावों और डॉलर की मजबूती के आगे दबाव महसूस कर रहे हैं।

Ravikash GuptaRavikash GuptaSenior Correspondent 5 मिनट पढ़ें AI के लिए
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वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि विभिन्न क्षेत्रों के आर्थिक कारक और प्रमुख केंद्रीय बैंकों की नीतियां नया आकार ले रही हैं। दक्षिण-पूर्वी एशिया में, थाईलैंड की अर्थव्यवस्था ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई है, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बढ़ता चलन और निर्यात में आई तेजी है। हालांकि, आने वाले समय में इस रफ्तार के सामने कई चुनौतियां भी खड़ी हो सकती हैं। दूसरी ओर, दुनिया भर के विदेशी मुद्रा, कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों में अमेरिकी डॉलर की मजबूती और नए नेतृत्व में फेडरल रिजर्व (फेड) के बदले रुख ने निवेशकों को अपनी रणनीतियों पर नए सिरे से विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

थाईलैंड का एआई आधारित आर्थिक उछाल और आने वाली बाधाएं

साल 2026 की पहली तिमाही (1Q26) के आर्थिक आंकड़ों से पता चलता है कि मध्य पूर्व में जारी उथल-पुथल के बावजूद थाईलैंड का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) अनुमान से बेहतर रहा और इसमें सालाना आधार पर 2.8% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इस मजबूत प्रदर्शन के पीछे मुख्य वजह निजी निवेश, घरेलू खपत में बढ़ोतरी और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में आया उछाल रहा, जिसे वैश्विक स्तर पर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से काफी मदद मिली है। डेटा सेंटर और एआई सप्लाई चेन से जुड़े उद्योगों में भारी तेजी देखी गई, जिसने घरेलू अर्थव्यवस्था के अन्य कमजोर हिस्सों को संभालने का काम किया है।

इस दौरान देश के निर्यात में सालाना आधार पर 15.5% की भारी वृद्धि दर्ज की गई। कोरोना वायरस महामारी के कारण लगे लॉकडाउन के बाद से यह निर्यात की सबसे तेज रफ्तार है। निर्यात में इस शानदार प्रदर्शन का बड़ा हिस्सा इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से आया है। थाईलैंड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड और हार्ड डिस्क ड्राइव का एक बहुत बड़ा उत्पादक देश है। ये दोनों उपकरण उन जरूरी हार्डवेयर में शामिल हैं, जो किसी आधुनिक डेटा सेंटर के निर्माण और संचालन के लिए आवश्यक होते हैं। इस तकनीकी मांग ने देश के विनिर्माण क्षेत्र को काफी सहारा दिया है।

इस आर्थिक रफ्तार को बनाए रखने के लिए सरकार ने राजकोषीय उपाय किए हैं। इसके तहत 400 अरब थाई बहत (THB) के ऋण अध्यादेश को मंजूरी दी गई है, जो देश की कुल जीडीपी का लगभग 2.1% है। इस राशि का आधा हिस्सा ग्राहकों को दी जाने वाली सब्सिडी के लिए इस्तेमाल किया जाएगा ताकि घरेलू बाजार में खरीदारी को बढ़ावा दिया जा सके। हालांकि, देश के सामने कुछ बुनियादी चुनौतियां भी हैं। एआई से अलग अन्य विनिर्माण क्षेत्रों को चीनी सामानों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। जैसे ही सरकारी सब्सिडी का असर कम होगा, निजी खपत के भी धीमे होने की आशंका है। यही वजह है कि साल 2026 के लिए विकास दर के अनुमान को तो बढ़ाया गया है, लेकिन 2027 के विकास अनुमान में कटौती की गई है। इसके साथ ही, साल 2027 की दूसरी तिमाही (2Q27) तक महंगाई दर घटकर सालाना 2% से नीचे आने की उम्मीद है, क्योंकि कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ सीधे ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो रहा है।

डॉलर की मजबूती से विदेशी मुद्रा बाजारों में हलचल

विदेशी मुद्रा बाजारों में अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत ने कई बड़ी मुद्राओं पर दबाव बना दिया है। पाउंड और डॉलर (GBP/USD) की जोड़ी अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए संघर्ष करती दिखी और यह गिरकर 1.3200 के स्तर के आसपास पहुंच गई। निवेशक इस समय ब्रिटेन के राजनीतिक घटनाक्रमों के साथ-साथ अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव पर करीब से नजर रख रहे हैं, जिससे बाजार में सतर्कता का माहौल बना हुआ है।

इसी तरह, यूरो और डॉलर (EUR/USD) की जोड़ी भी अपनी पिछली बढ़त खोकर 1.1400 के मजबूत सपोर्ट स्तर की तरफ वापस लौट आई है। यूरो की इस कमजोरी के बीच निवेशक मध्य पूर्व के घटनाक्रमों और वैश्विक स्तर पर तकनीकी कंपनियों के शेयरों के प्रदर्शन पर नजर रख रहे हैं। यूरो के पास इस समय कोई नया सकारात्मक ट्रिगर नहीं है, जिसके कारण वह डॉलर के मुकाबले कमजोर हो रहा है। बाजार की नजरें अब यूरो क्षेत्र की शुरुआती महंगाई रिपोर्ट और यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) फोरम पर टिकी हुई हैं।

सोना ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब, जबकि क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट

कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में तेजी का दौर जारी है। सोने की कीमतें मजबूती के साथ आगे बढ़ते हुए प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के ऐतिहासिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गई हैं। हालांकि वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बढ़ी है, लेकिन फेडरल रिजर्व के सख्त मौद्रिक नीति रुख की वजह से इसकी कीमतों में बहुत ज्यादा उछाल आने की संभावना सीमित बनी हुई है। निवेशक वैश्विक जोखिमों और अमेरिका की ऊंची ब्याज दरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके विपरीत, डिजिटल एसेट यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में इस समय दबाव देखा जा रहा है। बिटकॉइन (BTC), एथेरियम (ETH) और रिपल (XRP) जैसी प्रमुख डिजिटल मुद्राएं लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद लाल निशान में कारोबार कर रही हैं। ये सभी इस समय अपने महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों का परीक्षण कर रही हैं, जो आने वाले समय में उनकी दिशा तय कर सकते हैं। निवेशकों के बीच जोखिम से बचने की भावना मजबूत होने से क्रिप्टोकरेंसी बाजार में यह सुस्ती देखी जा रही है।

केविन वार्श के नेतृत्व में फेडरल रिजर्व की नई दिशा

वैश्विक वित्तीय बाजार इस समय फेडरल रिजर्व के नए नेतृत्व और उनकी नीतियों के अनुसार खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं। नए फेड चेयरमैन केविन वार्श की अध्यक्षता में हुई फेडरल ओपन接मार्केट कमेटी (FOMC) की पहली बैठक में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया गया। बेंचमार्क ब्याज दर को लगातार चौथी बैठक में 3.50% से 3.75% के दायरे पर ही बरकरार रखा गया है। बाजार को पहले से ही इस फैसले की पूरी उम्मीद थी।

हालांकि, बाजार में असली हलचल तब शुरू हुई जब नए चेयरमैन ने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस की। केविन वार्श ने अपने संबोधन में उन नीतिगत ढांचों और संचार प्रणालियों में बदलाव के संकेत दिए, जिन पर बाजार पिछले एक दशक से भरोसा करता आ रहा था। उनके इस रुख ने भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की गिरती कीमतों के असर को भी पीछे छोड़ दिया है, जिससे वैश्विक बाजारों में अमेरिकी डॉलर का दबदबा और बढ़ गया है। निवेशकों का ध्यान अब आगामी नॉन-फार्म पेरोल्स (NFP) के आंकड़ों पर केंद्रित है, जो सितंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर बाजार की उम्मीदों को तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।

इसका आप पर असर

  • निवेशकों और खरीदारों पर असर: वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मजबूती और फेड की नीतियों में आ रहे बदलावों के कारण भारत सहित अन्य बाजारों में आयातित सामान महंगे हो सकते हैं। इसके अलावा, तकनीकी और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव से घरेलू निवेशकों को अपनी निवेश योजनाओं में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी।

सवाल-जवाब

साल 2026 की पहली तिमाही में थाईलैंड की अर्थव्यवस्था उम्मीदों से बेहतर क्यों रही?
थाईलैंड की जीडीपी में सालाना आधार पर 2.8% की बढ़ोतरी हुई, जिसका मुख्य कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े उपकरणों के निर्यात में आई तेजी, मजबूत निजी निवेश और सरकारी मदद है।
थाईलैंड की अर्थव्यवस्था के सामने कौन सी बड़ी चुनौतियां हैं?
एआई सेक्टर से अलग अन्य विनिर्माण उद्योगों को चीन से मिलने वाली कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही, सरकारी सब्सिडी खत्म होने पर घरेलू खपत के भी कमजोर होने की आशंका है।
फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया बैठक में क्या फैसला लिया है?
फेडरल रिजर्व ने लगातार चौथी बार अपनी बेंचमार्क ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करते हुए इन्हें 3.50% से 3.75% के स्तर पर बरकरार रखा है।
फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन कौन हैं और उन्होंने क्या बदलाव किए हैं?
फेडरल रिजर्व के नए चेयरमैन केविन वार्श हैं, जिन्होंने अपनी पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में पिछले एक दशक से चली आ रही फेड की पारंपरिक संचार रणनीतियों में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं।
इन बाजार बदलावों के बीच सोने और क्रिप्टोकरेंसी का प्रदर्शन कैसा रहा?
भू-राजनीतिक तनावों के बीच सोना 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के करीब पहुंच गया है, जबकि बिटकॉइन, एथेरियम और रिपल जैसी क्रिप्टोकरेंसी लगातार तीन दिनों की गिरावट के बाद महत्वपूर्ण सपोर्ट स्तरों पर बनी हुई हैं।
#बाज़ार#थाईलैंडअर्थव्यवस्था#फेडरलरिजर्व#केविनवार्श#एआईनिर्यात#वैश्विकबाजार#क्रिप्टोकरेंसी#यूएसडॉलर

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