घरेलू शेयर बाजार में टेक कंपनियों के शेयरों ने अमेरिकी पाबंदियों के दबाव को पूरी तरह पीछे छोड़ते हुए शुक्रवार को जोरदार तेजी दर्ज की। 9 अक्टूबर 2026 के कारोबारी सत्र में बाजार के जानकारों को चौंकाते हुए आईटी इंडेक्स ने अप्रत्याशित मजबूती दिखाई। टाटा समूह की प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनी के दूसरी तिमाही के वित्तीय परिणामों ने पूरे सेक्टर में नया उत्साह भर दिया, जिससे बिकवाली की आशंकाएं धरी की धरी रह गईं।
निफ्टी आईटी में जबरदस्त तेजी का रुख
शुरुआती कारोबार के दौरान निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.75 प्रतिशत से अधिक चढ़कर 28,776.75 अंक के इंट्राडे उच्च स्तर तक जा पहुंचा था। कारोबार के अगले चरण में सूचकांक 2.4 प्रतिशत की मजबूती के साथ 28,394.95 अंक पर बना रहा। सूचकांक में शामिल दिग्गज कंपनियों में खरीदारी का जबर्दस्त माहौल देखने को मिला, जिसमें सबसे आगे टीसीएस रही। टीसीएस के शेयरों ने 6 प्रतिशत से ज्यादा की छलांग लगाई, जिससे पूरे बेंचमार्क को भारी सहारा मिला।
क्षेत्र की अन्य प्रमुख कंपनियों ने भी इस तेजी में कदम से कदम मिलाया। इंफोसिस के शेयर में 3.4 प्रतिशत से अधिक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि विप्रो और एचसीएल टेक के शेयर मुनाफावसूली से पहले लगभग 4 प्रतिशत तक उछले। मध्यम दर्जे की आईटी कंपनियों में कोफोर्ज, पर्सिस्टेंट सिस्टम्स, एलटीआईमाइंडट्री और एम्फैसिस ने भी तकरीबन 4 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। इसके अलावा टेक महिंद्रा में कम से कम 2.70 प्रतिशत और ओएफएसएस में 2.4 प्रतिशत तक की उछाल देखी गई। बाद के घंटों में यह बढ़त 1 से 4 प्रतिशत के दायरे में टिक गई, जिससे व्यापक बाजार को मजबूती मिलती रही।
टीसीएस के दूसरी तिमाही के आंकड़े रहे उम्मीद के मुताबिक
इस तेज खरीदारी के केंद्र में टीसीएस के वित्तीय नतीजे रहे, जो बाजार के अनुमानों पर पूरी तरह खरे उतरे हैं। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 13,884 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ दर्ज किया। यह पिछली तिमाही यानी Q1FY27 के 13,349 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ की तुलना में 4 प्रतिशत अधिक है। वहीं पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही यानी Q2FY26 के 12,075 करोड़ रुपये के लाभ के मुकाबले कंपनी के मुनाफे में 14.98 प्रतिशत का जोरदार इजाफा देखा गया। सालाना आधार पर शुद्ध लाभ ने बाजार के आकलनों को पीछे छोड़ दिया।
राजस्व के मोर्चे पर भी कंपनी ने मजबूत प्रदर्शन किया। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में समेकित आय 73,188 करोड़ रुपये रही, जिसमें तिमाही आधार पर 1.26 प्रतिशत और सालाना आधार पर 11.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इसके मुकाबले पहली तिमाही में कुल आय 72,275 करोड़ रुपये और पिछले वर्ष की समान तिमाही में 65,799 करोड़ रुपये रही थी। स्थिर मुद्रा आधार पर कंपनी की आय में तिमाही दर तिमाही 0.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ, जो विश्लेषकों के अनुमान के अनुकूल रहा। अंतरराष्ट्रीय राजस्व में स्थिर मुद्रा पर 1.2 प्रतिशत की क्रमिक वृद्धि दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त, कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से होने वाली सालाना आय 3.1 अरब डॉलर के पार निकल गई, जो अब कंपनी के कुल कारोबार के 10 प्रतिशत से अधिक हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है।
अमेरिकी श्रम प्रमाणन निलंबन का असर और विशेषज्ञों की राय
बाजार में यह तेजी ऐसे समय में आई है जब अमेरिका से भारतीय सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के भविष्य को लेकर चिंताजनक खबर आई थी। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने विदेशी कामगारों की स्थायी नागरिकता से जुड़े नियमों पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। प्रशासन ने आठ प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी कंपनियों को पर्म यानी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम में नए आवेदन दाखिल करने से रोक दिया है। इस प्रतिबंध के दायरे में भारतीय दिग्गज टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के साथ-साथ कॉग्निजेंट, कैपजेमिनी, माइक्रोसॉफ्ट और एडोब भी शामिल हैं।
यह निर्णय ट्रंप के 'अमेरिका फर्स्ट' एजेंडे के तहत घरेलू स्तर पर रोजगार को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस कदम से भारतीय पेशेवरों के लिए ग्रीन कार्ड हासिल करने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है, हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों पर पड़ने वाले दीर्घकालिक प्रभाव को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम पर एचएसटी वेल्थ के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हरिशेलवन राधाकृष्णन ने विश्लेषणात्मक नजरिया पेश किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कदम से मौजूदा कामगारों के वीजा पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ेगा। हरिशेलवन राधाकृष्णन ने कहा, "निर्णय मौजूदा एच-1बी रोजगार को निलंबित नहीं करता है, इसलिए तत्काल परिचालन प्रभाव सीमित हो सकता है।" हालांकि उन्होंने यह भी आगाह किया कि यदि यह रोक लंबे समय तक खिंचती है तो कंपनियों के लिए कर्मचारियों को बनाए रखना, उनकी आवाजाही, स्थानीय भर्ती और कानूनी अनुपालन का खर्च बढ़ सकता है।
वीजा आंकड़ों की तस्वीर और आगामी कंपनियों के नतीजे
संयुक्त राज्य अमेरिका में कुशल विदेशी पेशेवरों के लिए जारी होने वाले एच-1बी वीजा में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी 71 प्रतिशत बताई जाती है। 30 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अमेज़न 9,337 एच-1बी वीजा के साथ इस सूची में सबसे ऊपर रही। इसके बाद टीसीएस 4,450 वीजा के साथ दूसरे स्थान पर दर्ज की गई। अन्य प्रमुख कंपनियों में इंफोसिस के पास 4,113, एप्पल के पास 3,879, माइक्रोसॉफ्ट के पास 3,688, कॉग्निजेंट के पास 3,510, एचसीएल के पास 1,516, विप्रो के पास 1,175 और कैपजेमिनी के पास 1,074 एच-1बी वीजा दर्ज थे।
इन आंकड़ों से साफ है कि प्रमुख भारतीय टेक कंपनियां अमेरिकी कार्यबल पर काफी हद तक निर्भर हैं। फिर भी निवेशकों ने नियामक अनिश्चितता की अनदेखी करते हुए आय वृद्धि को प्राथमिकता दी। टीसीएस के उत्साहजनक प्रदर्शन के बाद अब निवेशकों की नजरें आने वाले नतीजों पर टिक गई हैं। आगामी शेड्यूल के मुताबिक, एचसीएल टेक अपने नतीजे 12 अक्टूबर को जारी करेगी। इसके बाद टाटा समूह से जुड़ी कंपनी टाटा टेक्नोलॉजीज 14 अक्टूबर को अपने आंकड़े पेश करेगी, जबकि विप्रो और टेक महिंद्रा के नतीजों की घोषणा 15 अक्टूबर को की जाएगी। इसके अलावा, एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज के आंकड़े 19 अक्टूबर को आएंगे, कोफोर्ज और इंफोसिस 23 अक्टूबर को अपने वित्तीय रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे, और केफिन टेक के नतीजे 26 अक्टूबर को घोषित होंगे।

















