वैश्विक व्यापार मंच पर अमेरिका और चीन के बीच नए तनाव के संकेत मिल रहे हैं। चीन ने अमेरिका द्वारा संभावित रूप से प्रस्तावित नए सेक्शन 301 टैरिफ का पुरजोर विरोध किया है, लेकिन साथ ही वाशिंगटन के साथ राजनयिक और उच्च स्तरीय संचार के रास्ते खुले रखे हैं। बीएनवाई के विश्लेषक जेफ यू के अनुसार, बीजिंग का यह रुख दिखाता है कि वह अमेरिकी व्यापारिक दबाव का मजबूती से सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन वह दोनों महाशक्तियों के बीच व्यापक संबंधों को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता। यह संतुलित दृष्टिकोण ऐसे समय में सामने आया है जब दोनों देश बाद में संभावित डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग शिखर सम्मेलन की तैयारियों में लगे हुए हैं।
टैरिफ विवाद और सेक्शन 301 जांच का असर
व्यापारिक मोर्चे पर चीन का कड़ा रुख हालिया रिपोर्टों के बाद सामने आया है, जिनमें कहा गया है कि वाशिंगटन 16 अर्थव्यवस्थाओं में कथित अति-क्षमता (ओवरकैपेसिटी) की सेक्शन 301 जांच के तहत चीनी आयातों पर 7.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाने पर विचार कर रहा है। चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने इस कदम की तीव्र निंदा करते हुए इसे एकतरफा और संरक्षणवादी करार दिया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि बीजिंग किसी भी अनुचित व्यापारिक दबाव के आगे नहीं झुकेगा और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा।
बीजिंग ने यह भी रेखांकित किया है कि वह अमेरिकी प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले किसी भी अगले कदम का सूक्ष्मता से मूल्यांकन करेगा। इसके साथ ही चीन ने जवाबी कार्रवाई के रूप में सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखा है। इसके बावजूद, दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों ने इस बात की पुष्टि की है कि इस साल के अंत में नेताओं के बीच होने वाली संभावित बैठक के इंतजामों को लेकर द्विपक्षीय बातचीत जारी है। यह दोहरा रवैया दर्शाता है कि बीजिंग सख्त बयानों के जरिए अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, जबकि राजनयिक संवाद के जरिए टकराव को नियंत्रित सीमा के भीतर रखने का प्रयास कर रहा है।
विदेशी मुद्रा बाजार में अनिश्चितता और डॉलर का रुख
अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में अनिश्चितता और आगामी प्रमुख आर्थिक आंकड़ों के कारण विदेशी मुद्रा बाजार में सतर्कता का माहौल है। GBP/USD मुद्रा जोड़ी में शुरुआती गिरावट के बाद सुधार देखा गया। छह दिनों के निचले स्तर तक गिरने के बाद, ब्रिटिश पाउंड ने वापसी की और गुरुवार को 1.3600 के स्तर के ठीक नीचे कारोबार करता नजर आया। व्यापारियों में बनी सतर्कता अमेरिकी डॉलर को सहारा दे रही है, क्योंकि बाजार भागीदार शुक्रवार को जारी होने वाले महत्वपूर्ण आर्थिक आंकड़ों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
दूसरी ओर, EUR/USD जोड़ी में स्पष्ट दिशा का अभाव दिखा और यह 1.1650 के आसपास घूमती रही। इससे पहले इस जोड़ी में गिरावट आई थी और यह 1.630 के क्षेत्र तक पहुंच गई थी। यूरो में यह अनिश्चितता अमेरिकी डॉलर में बने सुस्त और अनिश्चित रुख का परिणाम है। निवेशक शुक्रवार को जारी होने वाले NFP वार्षिक संशोधन डेटा और जैक्सन होल संगोष्ठी में फेड अध्यक्ष के भाषण का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं, जिससे मुद्रा बाजार को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।
कमोडिटी बाजार: सोना और डीजल की कीमतों में हलचल
कमोडिटी और ऊर्जा बाजारों में भी महत्वपूर्ण हलचल देखने को मिल रही है। सोने की कीमतों में बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार को कुछ सुधार देखा गया। पीली धातु प्रति ट्रॉय औंस $4,600 के आंकड़े के करीब पहुंचने में सफल रही। हालांकि, अमेरिकी डॉलर में स्पष्ट दिशा की कमी और व्यापक बाजार में सतर्कता के बावजूद सोने की कीमतें अभी भी दबाव में बनी हुई हैं। वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की चाल पर पैनी नजर रखे हुए हैं।
दूसरी तरफ, ऊर्जा बाजार भले ही सतह पर शांत दिखाई दे रहा हो, लेकिन डीजल बाजार से एक अलग ही संदेश मिल रहा है। अमेरिका में डीजल क्रैक स्प्रेड (WTI क्रूड ऑयल की तुलना में अल्ट्रा-लो सल्फर डीजल फ्यूचर्स का प्रीमियम) हाल ही में पहली बार $100 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। कारोबार के दौरान यह $102.00 प्रति बैरल के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। डीजल की कीमतों में यह अभूतपूर्व उछाल शोधन क्षमता और आपूर्ति श्रृंखला पर बने दबाव को उजागर करता है।
जैक्सन होल में फेड अध्यक्ष के भाषण पर निगाहें
वित्तीय बाजार का पूरा ध्यान अब शुक्रवार को होने वाले जैक्सन होल संगोष्ठी पर केंद्रित है, जहां फेडरल रिजर्व (फेड) के अध्यक्ष के रूप में केविन वॉश अपना पहला संबोधन देने जा रहे हैं। केंद्रीय बैंक के इस महत्वपूर्ण आयोजन में केविन वॉश के भाषण से पहले दुनिया भर के निवेशकों में भारी उत्सुकता है।
बाजार की उम्मीदें केवल इस बात तक सीमित नहीं हैं कि सितंबर की आगामी नीतिगत बैठक में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की जाएगी या उन्हें अपरिवर्तित रखा जाएगा। निवेशक अमेरिकी अर्थव्यवस्था की समग्र स्थिति, मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण और आगामी मौद्रिक नीति के बारे में स्पष्ट संकेतों की तलाश कर रहे हैं। व्यापारिक तनाव, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और केंद्रीय बैंक की भविष्य की दिशा मिलकर वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों के लिए आने वाले दिनों का रुख तय करेंगी।



















