अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें बुधवार को 4,400 डॉलर प्रति औंस के मनोवैज्ञानिक स्तर को फिर से पार करने की कोशिश में मजबूती दिखा रही हैं। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान बुलियन निवेशकों ने 4,350 डॉलर के नजदीकी निचले स्तरों के आसपास खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई, जिससे सोने को निचले स्तरों से समर्थन मिला। बाजार के विश्लेषक और निवेशक अब पूरी तरह से संयुक्त राज्य अमेरिका के आगामी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) यानी मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित किए हुए हैं। यह डेटा तय करेगा कि कीमती धातुओं में हालिया तेजी का सिलसिला आगे बढ़ेगा या कीमतों में कोई तेज गिरावट या करेक्शन देखने को मिलेगा।
सोने ने अपनी तेजी की रफ्तार को फिर से हासिल कर लिया है, जो मंगलवार को दर्ज किए गए दस सप्ताह के उच्चतम स्तर 4,435 डॉलर से मुनाफावसूली के कारण थोड़ी देर के लिए रुकी थी। मौजूदा लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, सोने का हाजिर भाव 4,460 डॉलर के आसपास बना हुआ है, जो पिछले बंद भाव 4,383 डॉलर से 1.77 प्रतिशत की बढ़त दर्शाता है। बाजार के बुनियादी परिदृश्य में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है, जिससे सोने को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में मजबूती मिल रही है।
मध्य पूर्व में भूराजनीतिक गतिरोध और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें
वैश्विक अर्थव्यवस्था और वित्तीय बाजारों के लिए भूराजनीतिक पृष्ठभूमि बेहद संवेदनशील बनी हुई है। संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से समुद्री व्यापार मार्ग को फिर से खोलने से जुड़ी वार्ताओं में गतिरोध बरकरार है। इसके साथ ही, लाल सागर और आसपास के जलक्षेत्रों में अमेरिका तथा यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच जहाजों पर हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। इस भूराजनीतिक अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी बनी हुई है, जिससे मुद्रास्फीति बढ़ने की आशंकाएं भी मजबूत हुई हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और उत्पादन लागत पर पड़ता है। जब ऊर्जा महंगी होती है, तो दैनिक उपभोग की वस्तुओं और सेवाओं के दाम भी बढ़ते हैं। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भूराजनीतिक जोखिम प्रीमियम (Geopolitical Risk Premium) अभी भी प्रभावी है। यदि अमेरिका के सीपीआई आंकड़े अल्पकालिक उतार-चढ़ाव लाते भी हैं, तो भी भूराजनीतिक तनाव सोने की कीमतों को पूरी तरह गिरने से रोकने के लिए एक मजबूत सहारा बना रहेगा।
अमेरिकी CPI मुद्रास्फीति आंकड़ों का विस्तृत विश्लेषण
शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज (CME) के FedWatch टूल के अनुसार, सितंबर महीने में अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती या वृद्धि की संभावना पर बाजार विभाजित है। सितंबर दर निर्णय की संभावनाएं लगभग 50-50 प्रतिशत के स्तर पर आ गई हैं। यही कारण है कि निवेशकों की पूरी नजर अमेरिका के कोर सीपीआई (Core CPI) आंकड़ों पर टिकी हुई है, क्योंकि कोर मुद्रास्फीति में ऊर्जा और खाद्य पदार्थों की अस्थिर कीमतों को शामिल नहीं किया जाता, जो युद्ध या मौसमी कारणों से अचानक बदलती हैं।
बाजार विशेषज्ञों के अनुमान के मुताबिक, जुलाई महीने के लिए वार्षिक कोर सीपीआई बढ़कर 2.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है, जो जून महीने के 2.6 प्रतिशत के आंकड़े से मामूली रूप से धीमी गति को दर्शाती है। वहीं, मासिक आधार (MoM) पर कोर सीपीआई मुद्रास्फीति जुलाई में 0.2 प्रतिशत तक बढ़ने का अनुमान जताया गया है, जबकि जून में यह आंकड़ा 0.0 प्रतिशत यानी स्थिर रहा था। ये आंकड़े केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर सीधा असर डालते हैं।
फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और दोतरफा बाजार जोखिम
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के पास दो मुख्य जिम्मेदारियां हैं: पहली, मूल्य स्थिरता बनाए रखना और दूसरी, अर्थव्यवस्था में अधिकतम रोजगार सुनिश्चित करना। इस जनादेश के अनुसार, मुद्रास्फीति की आदर्श दर 2 प्रतिशत प्रति वर्ष होनी चाहिए। हालांकि, वैश्विक महामारी के बाद से आपूर्ति श्रृंखला में आए व्यवधानों और विनिर्माण बाधाओं के कारण महंगाई दर लंबे समय से केंद्रीय बैंक के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। फेडरल रिजर्व ने महंगाई पर काबू पाने के लिए पहले भी सख्त मौद्रिक नीतियां अपनाई हैं और आगे भी सख्त रुख बनाए रखने के संकेत दिए हैं।
सोने के लिए आगामी सीपीआई डेटा दोतरफा जोखिम लेकर आ रहा है। यदि कोर सीपीआई आंकड़े अनुमान से अधिक गर्म या ऊंचे आते हैं, तो सितंबर में फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त नीति बनाए रखने या दरें ऊंची रखने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। ऐसी स्थिति में अमेरिकी डॉलर (USD) और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में उछाल आ सकता है, जिसका प्रतिकूल असर बिना ब्याज देने वाली कीमती धातु सोने पर पड़ेगा। इसके विपरीत, यदि कोर सीपीआई आंकड़े नरम आते हैं, तो यह सोने की तेजी को नए पंख दे सकता है, क्योंकि इससे फेड द्वारा दरें बढ़ाने की आशंकाएं समाप्त होंगी और डॉलर सूचकांक में गिरावट आएगी।
XAU/USD का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख ट्रेडिंग स्तर
दैनिक चार्ट पर सोने (XAU/USD) का रुख तकनीकी रूप से सकारात्मक बना हुआ है। हाजिर कीमत अपने 21-दिवसीय, 50-दिवसीय और 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) से ऊपर कारोबार कर रही है। 100-दिवसीय SMA लगभग 4,388.40 डॉलर के स्तर पर तात्कालिक ट्रेंड सपोर्ट प्रदान कर रहा है। वहीं, ऊपर की ओर 200-दिवसीय SMA 4,500.55 डॉलर (और लाइव EMA200 4,285 डॉलर व SMA200 4,483 डॉलर) के आसपास एक प्रमुख तकनीकी बाधा के रूप में खड़ा है।
तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) 67.03 के स्तर पर है, जबकि लाइव तकनीकी गणना में RSI 71 पर ओवरब्रॉट (Overbought) क्षेत्र में प्रवेश करता दिख रहा है। यह इस बात का संकेत है कि लंबी अवधि की रेजिस्टेंस बाधा के करीब पहुंचने पर हालिया तेजी में थोड़ा ठहराव आ सकता है। आज के कारोबारी सत्र के लिए प्रमुख पिवट पॉइंट 4,462 डॉलर पर स्थित है। सोने के लिए पहला रेजिस्टेंस R1 4,502 डॉलर और दूसरा रेजिस्टेंस R2 4,543 डॉलर पर है। नीचे की तरफ पहला सपोर्ट S1 4,420 डॉलर और दूसरा सपोर्ट S2 4,380 डॉलर पर बना हुआ है। 14-दिवसीय एटीआर (ATR) 78.06 डॉलर के दैनिक उतार-चढ़ाव को दर्शाता है।
सोने में निवेश की अवसर लागत और मुद्रा बाजार की गणित
आम तौर पर जब किसी देश में मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो वहां की केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाती है ताकि अर्थव्यवस्था में नकदी के प्रवाह को नियंत्रित किया जा सके। ऊंची ब्याज दरें विदेशी निवेशकों को आकर्षित करती हैं जो अधिक रिटर्न की तलाश में रहते हैं, जिससे उस देश की मुद्रा मजबूत होती है। सोने के मामले में यही सिद्धांत एक अलग चुनौती पेश करता है। सोना स्वयं कोई ब्याज या लाभांश नहीं देता है।
जब मुद्रास्फीति के जवाब में केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियों की तुलना में सोना रखने की अवसर लागत (Opportunity Cost) बढ़ जाती है। निवेशक सोने के बजाय ऐसी संपत्तियों को तरजीह देने लगते हैं जहां निश्चित ब्याज मिलता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति नियंत्रित होती है या गिरती है, तो ब्याज दरें कम होने की उम्मीद बनती है, जिससे सोना एक अधिक आकर्षक और प्रतिस्पर्धी निवेश विकल्प बन जाता है।
व्यापक वित्तीय बाजार: फॉरेक्स और क्रिप्टोकरेंसी का हाल
मुद्रास्फीति आंकड़ों के इंतजार में केवल सोना ही नहीं, बल्कि विदेशी मुद्रा बाजार (Forex) और क्रिप्टोकरेंसी बाजार भी एक सीमित दायरा बना रहे हैं। ब्रिटिश पाउंड (GBP/USD) 1.3500 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास मामूली उतार-चढ़ाव दिखा रहा है। मध्य पूर्व में तनाव और डॉलर की स्थिरता के बीच पाउंड में बड़ी तेजी नहीं आ पा रही है। इसी तरह, यूरो (EUR/USD) 1.1550 के दायरे में सीमित कारोबार कर रहा है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन (BTC) पिछले छह महीनों से 60,000 डॉलर और 80,000 डॉलर के दायरे में फंसा हुआ है। यह बाजार में घटते ट्रेडिंग वॉल्यूम और अनिश्चितता को दर्शाता है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि कम वॉल्यूम के साथ उच्च ओपन इंटरेस्ट (Open Interest) अचानक लिक्विडेशन और कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव का कारण बन सकता है। जब तक अमेरिकी सीपीआई आंकड़े कोई बड़ा सरप्राइज नहीं देते, तब तक अमेरिकी डॉलर एक सीमित दायरे में रहने की संभावना है।



















