अमेरिकी वित्तीय बाजारों में इस समय डॉलर के अवमूल्यन यानी डिबेसमेंट की आशंकाओं, ट्रेजरी बायबैक अभियानों और राजकोषीय घाटे को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं। इन सबके बीच डॉलर इंडेक्स अपनी शुरुआती गिरावट से उबरने के बाद स्थिरता हासिल करने की कोशिश में जुटा है। हालांकि बाजार का एक बड़ा वर्ग इस बात को लेकर चिंतित है कि क्या अमेरिकी करेंसी अपनी चमक खो रही है, लेकिन हालिया विश्लेषण कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।
ऐतिहासिक आंकड़े क्या कहते हैं
एमयूएफजी के जाने-माने विश्लेषक डेरेक हाल्पेनी और अब्दुल-अहद लॉकहार्ट ने अपने हालिया अध्ययन में इस बात की गहराई से पड़ताल की है कि अतीत में जब-जब डॉलर पर दबाव बढ़ा, सोने की कीमतों में तेजी आई और बॉन्ड यील्ड ऊपर चढ़ी, तब-तब बाजार का रुख कैसा रहा। विशेषज्ञों के अनुसार, अतीत के ऐसे दौर में जब इन तीनों संकेतों ने चरम स्तर को छुआ, तो उसके तुरंत बाद डॉलर में कोई स्थायी या लंबी कमजोरी देखने को नहीं मिली। इसके विपरीत, ज्यादातर मामलों में डॉलर इंडेक्स ने कुछ समय बाद खुद को संभाल लिया और स्थिर हो गया।
सोने की चाल और ट्रेजरी बायबैक का असर
विश्लेषकों का यह भी कहना है कि ऐसी परिस्थितियों में अक्सर सोने की कीमतों में शुरुआती उछाल के बाद अगले एक से तीन महीनों के भीतर करेक्शन यानी गिरावट दर्ज की जाती है। इस बीच, अमेरिकी राजकोष विभाग ने एक बड़ा कदम उठाते हुए तरलता समर्थन के लिए चलाए जाने वाले बायबैक अभियानों के आकार को दोगुना करने का फैसला किया है। 10 साल से 20 साल और 20 साल से 30 साल की परिपक्वता अवधि वाले सेक्टरों में इस सहायता को प्रति ऑपरेशन दो अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम चार अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होगी और 4 नवंबर तक जारी रहेगी।
विदेशी मुद्रा बाजारों और कमोडिटी की स्थिति
वैश्विक करेंसी बाजार में विभिन्न जोड़ियों की चाल पर नजर डालें तो ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी यूरोपीय सत्र के शुरुआती कारोबार में थोड़ा ऊपर चढ़कर 1.3650 के आसपास कारोबार करती नजर आई। ईरान पर नए अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद डॉलर की रिकवरी कुछ सुस्त पड़ी है, क्योंकि पाकिस्तान द्वारा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के तहत सीजफायर और प्रतिबंध हटाने का प्रस्ताव ईरान तक ले जाने की खबरों के बीच कूटनीतिक प्रयासों की उम्मीदें फिर से जाग गई हैं। इसी तरह, यूरो और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी भी यूरोपीय कारोबार में 1.1700 की ओर सुधार दर्ज कर रही है, जिसे जर्मनी के सकारात्मक आईएफओ सर्वे से भी बल मिला है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी का हाल
कीमती धातुओं के बाजार में सोना यूरोपीय सत्र के शुरुआती आधे हिस्से में 4,650 डॉलर के नीचे नरम रुख के साथ कारोबार कर रहा है। हालांकि इस मंगलवार को शुरुआती दौर में सोने ने 4,700 डॉलर के आसपास का स्तर छुआ था, जो बीते 14 मई के बाद का सबसे उच्च स्तर था। इस स्तर से आई गिरावट के बाद बिकवाली का ज्यादा दबाव न दिखने से विश्लेषक सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं। दूसरी ओर, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव से जुड़ी महंगाई की चिंताओं के कारण अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कम से कम एक बार और बढ़ोतरी की संभावना बनी हुई है, जिससे डॉलर को निचले स्तरों से सहारा मिल रहा है। इसके अलावा, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में बिटकॉइन ने पिछले तीन वर्षों से अधिक समय में अपनी सबसे मजबूत साप्ताहिक तेजी दर्ज करने के बाद मंगलवार को 80,000 डॉलर के स्तर को पार कर लिया है, जिसे संस्थागत निवेशकों की भारी मांग और स्पॉट एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स में मिल रहे सकारात्मक इनफ्लो का पूरा समर्थन मिल रहा है।



















