अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतों में एक बार फिर जोरदार उछाल देखने को मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर के लगातार कमजोर प्रदर्शन और वाशिंगटन में बढ़ते राजकोषीय घाटे को लेकर जताई जा रही चिंताओं के कारण निवेशकों का रुख एक बार फिर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की तरफ तेजी से बढ़ा है। हाजिर बाजार में सोने के भाव 4,550 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहे हैं, जबकि हालिया सत्रों में इसमें और बढ़त दर्ज की गई है। वित्तीय बाजारों में अमेरिकी अर्थव्यवस्था के बढ़ते कर्ज बोझ को लेकर अनिश्चितता का माहौल है, जिसके चलते दुनिया भर के निवेशक कागजी मुद्राओं और बांड के मुकाबले कीमती धातुओं को प्राथमिकता दे रहे हैं।
40 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंचा अमेरिकी कर्ज और बांड बायबैक योजना
संयुक्त राज्य अमेरिका जल्द ही एक ऐसे वित्तीय पड़ाव पर पहुंचने वाला है जिसकी कुछ समय पहले तक कल्पना भी नहीं की गई थी। देश का कुल राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के ऐतिहासिक आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुका है। इस विशालकाय कर्ज बोझ को अर्थव्यवस्था के लिए एक प्रकार का ऋण का ब्लैक होल माना जा रहा है, जिसने पूरे वैश्विक वित्तीय ढांचे को तनाव में डाल दिया है। इसके अलावा अमेरिका का लगभग 1.4 ट्रिलियन डॉलर का प्राइवेट क्रेडिट मार्केट भी निवेशकों के लिए चिंता का मुख्य केंद्र बना हुआ है।
इसी बीच अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने अपनी नियमित व्यवस्था से अलग हटकर एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाया है। बुधवार को दोपहर 12:32 GMT पर ट्रेजरी विभाग ने घोषणा की कि वह दीर्घकालिक बांड बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए अपनी बायबैक प्रक्रियाओं को दोगुना करने जा रहा है। इसके तहत 10 वर्ष से 20 वर्ष और 20 वर्ष से 30 वर्ष की अवधि वाले सरकारी बांड की खरीद सीमा को प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह नई व्यवस्था 9 सितंबर से लागू होकर 4 नवंबर तक जारी रहेगी। इस कदम के बाद शुरुआती दौर में अमेरिकी बांड यील्ड और डॉलर इंडेक्स में तेज गिरावट देखी गई थी, हालांकि बाद में बांड यील्ड में कुछ सुधार आया लेकिन डॉलर पर दबाव लगातार बना हुआ है।
एमयूएफजी विश्लेषकों की चेतावनी और बाजार का संशय
वित्तीय बाजार के दिग्गजों को इस बात पर गहरा संदेह है कि अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट की यह आक्रामक बांड बायबैक योजना सरकार की बढ़ती उधारी लागत को नियंत्रित करने में सफल हो पाएगी या नहीं। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम उल्टे अमेरिकी डॉलर को और अधिक कमजोर बना सकता है। एमयूएफजी के वरिष्ठ विश्लेषकों के अनुसार, यदि स्कॉट बेसेंट और अमेरिकी नीति निर्माता बाजार की चिंताओं को दूर करने के प्रति वास्तव में गंभीर हैं, तो अमेरिकी ट्रेजरी को राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए कड़े कदम उठाने होंगे।
हालांकि एमयूएफजी के विश्लेषकों ने स्पष्ट रूप से कहा कि निकट भविष्य में व्यापक राजकोषीय समेकन की संभावना न के बराबर है। उन्होंने चेतावनी दी कि बांड बायबैक बढ़ाने का यह फैसला और साथ ही विदेशी हस्तक्षेप के बाद जापान को दी गई FIMA रिपोर्ट की टिप्पणियां विपरीत परिणाम दे सकती हैं। इससे वैश्विक निवेशकों का अमेरिकी परिसंपत्तियों को अपने पास बनाए रखने का रुझान कम हो सकता है, जिससे अमेरिकी ट्रेजरी बांड की बिकवाली और डॉलर में तेज गिरावट आ सकती है। एमयूएफजी का निष्कर्ष है कि भले ही ट्रेजरी की बायबैक योजना बांड यील्ड को एक सीमा में रखने में सफल हो जाए, फिर भी कम यील्ड के कारण अमेरिकी डॉलर के नीचे गिरने का जोखिम लगातार बना रहेगा, जो सीधे तौर पर सोने के लिए फायदेमंद है।
फेडरल रिजर्व का रुख और जैक्सन होल सम्मेलन पर नजरें
मौद्रिक नीति के मोर्चे पर केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के आगामी कदमों को लेकर भी बाजार में व्यापक चर्चा जारी है। वित्तीय बाजारों का अनुमान है कि फेड की आगामी सितंबर बैठक में ब्याज दरों को मौजूदा स्तर पर ही स्थिर रखा जाएगा। हाल ही में जारी हुए अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों में कीमतों के दबाव में कमी के संकेत मिले थे, जिसके बाद व्यापारियों ने तत्काल ब्याज दरों में बढ़ोतरी की अपनी संभावनाओं को काफी कम कर दिया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच अब सभी की निगाहें जैक्सन होल में आयोजित होने वाले वार्षिक आर्थिक सम्मेलन पर टिक गई हैं, जो 27 अगस्त से 29 अगस्त तक निर्धारित है। इस सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के अध्यक्ष केविन वॉरश का संबोधन अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाला है। हालांकि ऐतिहासिक आंकड़े और पुराना रिकॉर्ड बताता है कि फेड अध्यक्ष आमतौर पर भविष्य की मौद्रिक नीति की दिशा को लेकर कोई स्पष्ट और अग्रिम वादा करने से बचते रहे हैं। फिर भी निवेशक उनके भाषण से भविष्य की ब्याज दरों और आर्थिक परिदृश्य का संकेत पाने की कोशिश करेंगे।
XAU/USD का विस्तृत तकनीकी विश्लेषण और मुख्य स्तर
तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो सोने (XAU/USD) का ढांचा बेहद मजबूत और तेजी का संकेत दे रहा है। सोना फिलहाल 4,550 डॉलर प्रति औंस के आसपास कारोबार कर रहा है और यह अपने 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 4,325.64 डॉलर से काफी ऊपर बना हुआ है। हाजिर कीमत और 20-दिवसीय EMA के बीच की यह बड़ी दूरी यह दर्शाती है कि बाजार में केवल सामान्य तेजी नहीं है, बल्कि एक मजबूत अपवर्ड ट्रेंड बना हुआ है। हालिया आंकड़ों के अनुसार दैनिक चार्ट पर सोना अपने 52-सप्ताह के दायरे 3,327 डॉलर से 5,586 डॉलर के बीच मजबूती से आगे बढ़ रहा है और दैनिक व्यापारिक आयतन 20-दिवसीय औसत से 4.76 गुना अधिक दर्ज किया गया है।
तकनीकी संकेतकों में रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI 14) 68.39 के स्तर पर है, जो ओवरबॉट क्षेत्र के करीब है और यह बताता है कि तेजी का रुझान बेहद मजबूत है। वहीं लाइव संकेतकों में RSI 73 तक पहुंच चुका है। MACD इंडिकेटर 104.14 पर सिग्नल लाइन 70.19 से ऊपर बना हुआ है, जो तेजड़िया गति की पुष्टि करता है। ट्रेंड की मजबूती मापने वाला ADX इंडिकेटर 28 पर है, जबकि स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 100 और सिग्नल लाइन 97 के स्तर पर है। सोने के लिए नीचे की तरफ पहला प्रमुख डायनेमिक सपोर्ट 20-दिवसीय EMA पर 4,325.64 डॉलर के आसपास है। यदि इसमें कोई गिरावट आती है तो सपोर्ट S1 4,582 डॉलर और सपोर्ट S2 4,548 डॉलर पर देखा जाएगा। ऊपर की तरफ तेजी जारी रहने पर सोना 29 मई के अपने उच्चतम स्तर 4,595.34 डॉलर और उसके बाद रेजिस्टेंस R1 4,633 डॉलर व रेजिस्टेंस R2 4,650 डॉलर की ओर बढ़ सकता है।
डॉलर की गिरावट से पौंड और यूरो को मिला सहारा
अमेरिकी मुद्रा में कमजोरी का सीधा लाभ दुनिया की अन्य प्रमुख मुद्राओं को भी मिल रहा है। यूरोपीय व्यापारिक सत्र के दौरान ब्रिटिश पौंड (GBP/USD) 1.3650 के स्तर के करीब बढ़त के साथ कारोबार करता दिखा। यद्यपि ब्रिटेन के खुदरा बिक्री के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे थे, फिर भी अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा दीर्घकालिक बांड खरीद बढ़ाए जाने के बाद डॉलर में आई व्यापक गिरावट ने पौंड को मजबूती प्रदान की।
इसी तरह यूरो (EUR/USD) भी 1.1700 के स्तर पर अपनी साप्ताहिक बढ़त को संभाले हुए है। निवेशक अब जर्मनी, यूरोजोन और अमेरिका के आगामी अगस्त PMI आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं। जब तक डॉलर में कमजोरी का रुख बना रहेगा, तब तक यूरो और पौंड जैसी प्रमुख मुद्राएं डॉलर के मुकाबले मजबूत स्थिति में बनी रह सकती हैं। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को मापने वाला अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.1% गिरकर 98.73 के स्तर पर आ गया है, जो इसके तीन महीने के निचले स्तर 98.55 के काफी करीब है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की ऐतिहासिक प्रासंगिकता
मानव इतिहास में सोने की भूमिका हमेशा से एक विश्वसनीय मूल्य भंडार और विनिमय के माध्यम के रूप में रही है। आभूषणों के निर्माण और औद्योगिक उपयोग के अलावा, आधुनिक वित्तीय प्रणाली में सोने को सबसे सुरक्षित परिसंपत्ति के रूप में देखा जाता है। संकट और आर्थिक उथल-पुथल के समय में यह निवेशकों की पहली पसंद बनता है। सोने को मुद्रास्फीति और गिरती कागजी मुद्राओं के खिलाफ एक बेहतरीन हेज माना जाता है क्योंकि यह किसी विशेष सरकार या केंद्रीय प्राधिकरण की देनदारी पर निर्भर नहीं नहीं करता है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के सबसे बड़े धारक हैं। संकट के समय अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं की साख बचाए रखने और अर्थव्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए केंद्रीय बैंक अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाते हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022 में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने रिकॉर्ड 1,136 टन सोना अपने भंडार में जोड़ा, जिसकी कुल कीमत लगभग 70 अरब डॉलर थी। यह आंकड़ा रिकॉर्ड दर्ज किए जाने की शुरुआत के बाद से किसी भी एक वर्ष में की गई सबसे बड़ी सोने की खरीदारी थी। विशेष रूप से भारत, चीन और तुर्की जैसे उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक अपनी वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए तेजी से अपने स्वर्ण भंडार का विस्तार कर रहे हैं।
बाजार चक्र और inverse correlation का सिद्धांत
सोने का अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी ट्रेजरी बांड के साथ विपरीत संबंध (inverse correlation) होता है। जब भी डॉलर के मूल्य में गिरावट आती है, तो सोने के दाम में तेजी आती है क्योंकि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित करने के लिए सोने का रुख करते हैं। इसी तरह, सोने का जोखिम भरी परिसंपत्तियों जैसे शेयर बाजार के साथ भी विपरीत संबंध देखा जाता है। जब शेयर बाजार में बड़ी तेजी आती है, तो सोने की मांग में थोड़ी नरमी आती है, जबकि शेयर बाजार में बिकवाली होने पर सोने की कीमतें उछलती हैं।
एक बिना ब्याज देने वाली परिसंपत्ति (yield-less asset) होने के कारण, कम ब्याज दरों के माहौल में सोना अधिक आकर्षक हो जाता है, जबकि उच्च ब्याज दरें इसके ऊपर दबाव डालती हैं। वाणिज्य में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के दौरान वर्ष 2014 से चार्ट विश्लेषण और वित्तीय बाजारों का गहन अध्ययन करने वाले विशेषज्ञ सागर दुआ के अनुसार, सोने की कीमतों में होने वाली अधिकतर हलचलें सीधे तौर पर अमेरिकी डॉलर के व्यवहार से तय होती हैं। जब तक डॉलर में कमजोरी बनी रहेगी और अमेरिका के कर्ज को लेकर चिंताएं कायम रहेंगी, तब तक सोने में तेजी का यह दौर जारी रहने की पूरी संभावना है।



















