असम और मेघालय की सीमा पर स्थित अति संवेदनशील जोरहाट-खानापाड़ा कॉरीडोर में बरसात के दिनों में जलभराव और ट्रैफिक बाधित होने की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए दोनों राज्यों ने संयुक्त रूप से कमर कस ली है। इस मार्ग पर हर साल भारी बारिश के कारण पानी भर जाता है, जिससे आम जनता और दैनिक यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसी गंभीर विषय को लेकर दोनों पड़ोसी राज्यों के प्रशासन ने आपसी सहयोग और समन्वय को बढ़ाते हुए व्यावहारिक समाधान खोजने की दिशा में गंभीर कदम उठाने का निर्णय लिया है।
नोंगपोह में हुई उच्चस्तरीय प्रशासनिक बैठक
इस सिलसिले में मेघालय के री-भोई जिले और असम के कामरूप (मेट्रो) जिले के प्रमुख अधिकारियों के बीच 17 अगस्त को नोंगपोह स्थित डीआरडीए हॉल में एक अहम बैठक आयोजित की गई। इस साझा बैठक की अध्यक्षता री-भोई की अतिरिक्त उपायुक्त बालाकिंट्यू रानी ने की, जबकि असम के कामरूप (मेट्रो) जिले का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त उपायुक्त राजा बैश्य ने किया। दोनों जिलों के अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी इस चर्चा में शामिल हुए, जिन्होंने इस समस्या के मूल कारणों पर गहराई से विचार-विमर्श किया।
मानसून की बाधाओं से निपटने के लिए स्थायी रणनीतियां
बैठक का मुख्य उद्देश्य केवल बरसात के मौसम में अस्थायी राहत उपायों पर निर्भर रहने के बजाय एक ठोस, स्थायी और दूरदर्शी रणनीति तैयार करना था। अधिकारियों ने उन सभी भौगोलिक और मानवीय कारकों की विस्तार से समीक्षा की जिनके कारण इस मार्ग पर जलभराव की स्थिति बार-बार पैदा होती है। चूंकि यह प्रभावित कॉरीडोर दोनों राज्यों की सीमा रेखा के साथ सटा हुआ है, इसलिए अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी प्रभावी समाधान के लिए दोनों राज्य सरकारों का मिलकर काम करना बेहद अनिवार्य है।
यातायात को सुचारू बनाने पर विशेष जोर
जोरहाट-खानापाड़ा का यह क्षेत्र भारी बारिश के दौरान पानी के अत्यधिक भराव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है, जिसके चलते राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही अक्सर ठप हो जाती है। कई बार जलभराव के कारण हाईवे का एक बड़ा हिस्सा पानी में पूरी तरह डूब जाता है, जिससे लंबी कतारें लग जाती हैं और यात्रियों को घंटों जाम में फंसना पड़ता है। चर्चा के दौरान इस बात पर भी मंथन हुआ कि कैसे यातायात को सुगम बनाया जाए और सड़क उपयोगकर्ताओं को होने वाली असुविधा को न्यूनतम किया जा सके।
भविष्य के लिए निरंतर सहयोग का संकल्प
बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने इस बात पर पूरी सहमति जताई कि इस पुरानी समस्या के दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों प्रशासनों के बीच निरंतर संवाद और सहयोग का होना जरूरी है। केवल आपसी तालमेल के जरिए ही इस क्षेत्र में जलभराव की समस्या पर स्थायी लगाम लगाई जा सकती है और भविष्य में मानसून के दौरान होने वाली यातायात बाधाओं से बचा जा सकता है।














