जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) ने ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में श्री सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित लम सिरमन लाइमस्टोन परियोजना को लेकर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से हस्तक्षेप की मांग की है। 13 अगस्त को मुख्यमंत्री को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में परिषद ने भूमि अधिकारों, जनसुनवाई की प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और 217.394 हेक्टेयर की इस औद्योगिक परियोजना से स्थानीय किसानों और भूमि स्वामियों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।
जनसुनवाई की प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवाल
संगठन के इस ज्ञापन का मुख्य बिंदु 31 जुलाई को आयोजित की गई जनसुनवाई की समीक्षा करना है। JNC ने सवाल उठाया है कि क्या इस प्रक्रिया में सभी प्रभावित भूमि स्वामियों, पारंपरिक खेती करने वाले किसानों और स्थानीय हितधारकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया गया था। परिषद ने प्रशासन से मांग की है कि वह उपस्थिति रजिस्टर, लिखित आपत्तियों, दर्ज शिकायतों और जनसुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग सहित पूरी कार्यवाही की जांच करे। JNC का कहना है कि यदि जांच में प्रक्रियात्मक खामियां पाई जाती हैं, तो पुरानी सुनवाई को रद्द कर नए सिरे से जनसुनवाई आयोजित की जानी चाहिए।
भूमि अधिकारों की जांच और किसानों को सुरक्षा
प्रक्रियात्मक जांच के अलावा JNC ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वैधानिक प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले भूमि स्वामित्व, कब्जा, पारंपरिक अधिकारों, खेती की स्थिति और सहमति से जुड़े सभी दावों का भौतिक सत्यापन किया जाए। स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा के लिए परिषद ने मांग की है कि प्रभावित भूमि स्वामियों और काश्तकारों को बेदखली, धमकी या किसी भी प्रकार की बाधा से बचाने के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके साथ ही संस्था ने एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस बात का आकलन कराने की मांग की है कि लाइमस्टोन खनन से क्षेत्र की कृषि गतिविधियों और ग्रामीण आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
पांच दिनों की समय सीमा और वनीकरण की मांग
परिषद ने मेघालय सरकार को प्राथमिक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने के लिए पांच दिनों की समय सीमा दी है। JNC ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सरकार ने कदम नहीं उठाए, तो वह जन लामबंदी और व्यापक प्रदर्शनों जैसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक उपायों का सहारा ले सकती है।
एक अन्य ज्ञापन में JNC ने प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना के कारण होने वाले वनों के नुकसान का मुद्दा भी उठाया। परिषद ने कहा कि ईस्ट जयंतिया हिल्स में खनन, सीमेंट कारखानों और सड़कों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटा गया है, लेकिन जिले के भीतर क्षतिपूर्ति वनीकरण का काम पूरा नहीं किया गया। संगठन ने मांग की है कि हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना से प्रभावित होने वाले वन क्षेत्रों के बदले ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में ही पर्याप्त भूमि चिह्नित कर पौधरोपण कराया जाए।



















