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मेघालय में श्री सीमेंट प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद: JNC ने CM कॉनराड संगमा से की जनसुनवाई और भूमि अधिकारों की जांच की मांगमेघालय
13 अग॰ 2026, 2:13 pm (49 दिन पहले)· 2

मेघालय में श्री सीमेंट प्रोजेक्ट पर बढ़ा विवाद: JNC ने CM कॉनराड संगमा से की जनसुनवाई और भूमि अधिकारों की जांच की मांग

जयंतिया नेशनल काउंसिल ने ईस्ट जयंतिया हिल्स में श्री सीमेंट की 217.394 हेक्टेयर परियोजना और वनीकरण मुद्दों को लेकर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा को ज्ञापन सौंपा है, जिसमें पांच दिनों के भीतर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

जयंतिया नेशनल काउंसिल (JNC) ने ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में श्री सीमेंट लिमिटेड की प्रस्तावित लम सिरमन लाइमस्टोन परियोजना को लेकर मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से हस्तक्षेप की मांग की है। 13 अगस्त को मुख्यमंत्री को सौंपे गए एक विस्तृत ज्ञापन में परिषद ने भूमि अधिकारों, जनसुनवाई की प्रक्रियात्मक निष्पक्षता और 217.394 हेक्टेयर की इस औद्योगिक परियोजना से स्थानीय किसानों और भूमि स्वामियों की आजीविका पर पड़ने वाले असर को लेकर गंभीर चिंताएं जताई हैं।

जनसुनवाई की प्रक्रियाओं पर उठाए गए सवाल

संगठन के इस ज्ञापन का मुख्य बिंदु 31 जुलाई को आयोजित की गई जनसुनवाई की समीक्षा करना है। JNC ने सवाल उठाया है कि क्या इस प्रक्रिया में सभी प्रभावित भूमि स्वामियों, पारंपरिक खेती करने वाले किसानों और स्थानीय हितधारकों को अपनी बात रखने का उचित अवसर दिया गया था। परिषद ने प्रशासन से मांग की है कि वह उपस्थिति रजिस्टर, लिखित आपत्तियों, दर्ज शिकायतों और जनसुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग सहित पूरी कार्यवाही की जांच करे। JNC का कहना है कि यदि जांच में प्रक्रियात्मक खामियां पाई जाती हैं, तो पुरानी सुनवाई को रद्द कर नए सिरे से जनसुनवाई आयोजित की जानी चाहिए।

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भूमि अधिकारों की जांच और किसानों को सुरक्षा

प्रक्रियात्मक जांच के अलावा JNC ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि वैधानिक प्रक्रिया में आगे बढ़ने से पहले भूमि स्वामित्व, कब्जा, पारंपरिक अधिकारों, खेती की स्थिति और सहमति से जुड़े सभी दावों का भौतिक सत्यापन किया जाए। स्थानीय निवासियों के हितों की रक्षा के लिए परिषद ने मांग की है कि प्रभावित भूमि स्वामियों और काश्तकारों को बेदखली, धमकी या किसी भी प्रकार की बाधा से बचाने के लिए अंतरिम सुरक्षा प्रदान की जाए। इसके साथ ही संस्था ने एक निश्चित समय सीमा के भीतर इस बात का आकलन कराने की मांग की है कि लाइमस्टोन खनन से क्षेत्र की कृषि गतिविधियों और ग्रामीण आजीविका पर क्या प्रभाव पड़ेगा।

पांच दिनों की समय सीमा और वनीकरण की मांग

परिषद ने मेघालय सरकार को प्राथमिक प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने के लिए पांच दिनों की समय सीमा दी है। JNC ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर सरकार ने कदम नहीं उठाए, तो वह जन लामबंदी और व्यापक प्रदर्शनों जैसे शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक उपायों का सहारा ले सकती है।

एक अन्य ज्ञापन में JNC ने प्रस्तावित हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना के कारण होने वाले वनों के नुकसान का मुद्दा भी उठाया। परिषद ने कहा कि ईस्ट जयंतिया हिल्स में खनन, सीमेंट कारखानों और सड़कों के निर्माण के लिए बड़े पैमाने पर जंगलों को काटा गया है, लेकिन जिले के भीतर क्षतिपूर्ति वनीकरण का काम पूरा नहीं किया गया। संगठन ने मांग की है कि हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना से प्रभावित होने वाले वन क्षेत्रों के बदले ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में ही पर्याप्त भूमि चिह्नित कर पौधरोपण कराया जाए।

सवाल-जवाब

JNC ने मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा से क्या मांग की है?
JNC ने मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के संगमा को ज्ञापन सौंपकर श्री सीमेंट के 217.394 हेक्टेयर लाइमस्टोन प्रोजेक्ट की जनसुनवाई, भूमि अधिकारों और वनीकरण मुद्दों की जांच करने की मांग की है।
श्री सीमेंट का लम सिरमन लाइमस्टोन प्रोजेक्ट कितना बड़ा है?
यह प्रस्तावित लाइमस्टोन प्रोजेक्ट मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में 217.394 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है।
31 जुलाई की जनसुनवाई को लेकर JNC की क्या आपत्तियां हैं?
JNC ने सवाल उठाया कि क्या जनसुनवाई में सभी प्रभावित भूमि स्वामियों और काश्तकारों को भाग लेने का अवसर मिला। संस्था ने वीडियो रिकॉर्डिंग और उपस्थिति विवरण की जांच और प्रक्रियात्मक खामी मिलने पर नई जनसुनवाई की मांग की है।
मांगें पूरी न होने पर JNC ने क्या चेतावनी दी है?
JNC ने सरकार को प्राथमिक कार्रवाई के लिए पांच दिनों की समय सीमा दी है और चेतावनी दी है कि कदम न उठाए जाने पर वह जन लामबंदी और लोकतांत्रिक प्रदर्शन शुरू करेगी।
हाई स्पीड कॉरिडोर परियोजना से जुड़ा वनीकरण का मुद्दा क्या है?
JNC का आरोप है कि ईस्ट जयंतिया हिल्स में विभिन्न परियोजनाओं के लिए वन भूमि का अधिग्रहण किया गया लेकिन जिले में क्षतिपूर्ति वनीकरण नहीं हुआ, इसलिए कॉरिडोर परियोजना के लिए जिले में ही भूमि चिह्नित करने की मांग की गई है।
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