मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड के. संगमा ने मंगलवार को कहा कि राज्य में उत्पादित होने वाला शहद गुणवत्ता के मामले में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ में गिना जाता है और यदि इसका उत्पादन तथा विपणन सही तरीके से किया जाए, तो यह राज्य की आय का एक बहुत बड़ा जरिया बन सकता है। मुख्यमंत्री ने दक्षिण पश्चिम गारो हिल्स जिले के रेरापारा ब्लॉक के मेलिम में एपिकल्चर मल्टी फैसिलिटी सेंटर सह प्रोसेसिंग यूनिट का उद्घाटन करने के दौरान यह बात कही।
शहद मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने की पहल
लगभग 1.52 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस नए केंद्र का उद्देश्य शहद की फसल कटाई के बाद की पूरी प्रक्रिया को संभालना है। इसमें कच्चे शहद का संग्रह, प्रोसेसिंग, बॉटलिंग, टेस्टिंग, मार्केटिंग और मधुमक्खी के बक्से (बी-बॉक्स) का निर्माण शामिल है। इस मौके पर विधायक महताब चांदी संगमा, संजय संगमा और सुबीर मारक के अलावा कई स्थानीय मधुमक्खी पालक, स्वयं सहायता समूह के सदस्य तथा बागवानी विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।
अत्याधुनिक सुविधाओं और मिशन 2.0 का विस्तार
मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि सरकार राज्य में एक बी म्यूजियम और इंटरप्रिटेशन सेंटर स्थापित करने पर भी विचार कर रही है, जहां जैविक शहद की बिक्री की जा सकेगी और आने वाले आगंतुकों को शहद उत्पादन की प्रक्रिया डिजिटल डिस्प्ले के जरिए दिखाई जाएगी। एपिकल्चर मिशन 2.0 के तहत राज्य के सभी 12 जिलों में तीन चरणों में इस योजना को लागू किया जा रहा है, जिसमें 87 क्लस्टर और 6,491 मधुमक्खी पालक शामिल हैं। अब तक कुल 32,455 बी-बॉक्स और 6,491 उपकरण सेट बांटे जा चुके हैं, जिसके तहत प्रत्येक मधुमक्खी पालक को पांच बक्से और एक उपकरण सेट दिया गया है। इसके अलावा, तीसरे चरण के तहत आने वाले 39 क्लस्टर ने वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 157.69 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन किया है। राज्य के उत्तरी गारो हिल्स के संब्रक में पहले से ही एक इंटीग्रेटेड बी डेवलपमेंट सेंटर भी स्थापित है, जो प्रशिक्षण, परीक्षण, प्रोसेसिंग, हाइव निर्माण, भंडारण और खुदरा बिक्री जैसी सुविधाएं प्रदान करता है।
ग्रामीण आजीविका और कनेक्टिविटी पर विशेष जोर
कोनार्ड के. संगमा ने इस बात पर जोर दिया कि केवल मधुमक्खी के बक्से बांटने तक ही काम सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका संचालन कॉलोनी प्रबंधन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और संगठित बाजार पहुंच तक फैलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम रेरापारा के लिए ग्रामीण आजीविका, कनेक्टिविटी और सरकारी सेवाओं तक पहुंच जैसी तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को एक साथ जोड़ता है। इस क्षेत्र में एक नए पुल के निर्माण से स्थानीय उत्पादकों और निवासियों के लिए बाजार, स्कूल, अस्पताल तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि वैज्ञानिक तरीके से की गई बीकीपिंग, उच्च गुणवत्ता वाली प्रोसेसिंग और मजबूत ब्रांडिंग के दम पर मेघालय के जैविक शहद को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाया जा सकता है।


















