त्योहारों के मौसम में अक्सर घरों में सात्विक और बिना प्याज-लहसुन वाला भोजन पकाया जाता है। आमतौर पर बच्चे हरी सब्जियों को खाने में आनाकानी करते हैं, लेकिन झींगा यानी तोरई को अगर काले चने के साथ खास तरीके से पकाया जाए, तो यह बेहद स्वादिष्ट बन जाती है। रांची की एक गृहिणी उषा ने इस पारंपरिक और पौष्टिक सब्जी को बिना किसी तामझाम के केवल दो मुख्य चरणों में बनाने की आसान विधि साझा की है। इसे नवरात्र के व्रत या सामान्य दिनों में रोटी और पूरी के साथ परोसा जा सकता है।
सब्जी और चने की शुरुआती तैयारी
इस रेसिपी को तैयार करने के लिए सबसे पहले ताजे झींगे को अच्छी तरह छीलकर साफ पानी से धो लें। इसके बाद इसे बिल्कुल बारीक और छोटे टुकड़ों में काट कर अलग रख लें। सब्जी में इस्तेमाल होने वाले छोटे काले चने को रात में ही पानी में भिगो देना चाहिए। चने लगभग 8 घंटे तक पानी में रहने के बाद पूरी तरह फूलकर पकने के लिए तैयार हो जाते हैं।
तड़का लगाने और चना भूनने का तरीका
एक कड़ाही में 3 चम्मच सरसों का तेल डालकर मध्यम आंच पर अच्छी तरह गर्म होने दें। जब तेल गर्म हो जाए, तब इसमें साबुत जीरा, तेजपत्ता और सूखी लाल मिर्च का तड़का डालें। जैसे ही तड़का चटकने लगे, उसमें भीगे हुए काले चने मिला दें। चने को तड़के के साथ तेल में केवल एक मिनट तक लगातार चलाते हुए भूनें, जिससे उनका कच्चापन दूर हो जाए।
मसाले और पकाने की विधि
एक मिनट चना भूनने के बाद कड़ाही में कटे हुए झींगे के टुकड़े डाल दें। इसके साथ ही हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मिक्स मसाला और स्वादानुसार नमक मिलाएं। नवरात्र या पूजा-पाठ के दिनों में साधारण नमक की जगह सेंधा नमक का उपयोग किया जा सकता है। इसमें लहसुन और प्याज का उपयोग पूरी तरह वैकल्पिक है, इसलिए त्योहारों के हिसाब से इसे बिना इनके भी बेहतरीन बनाया जा सकता है।
धीमी आंच पर पकाना और परोसना
सभी मसालों को मिलाने के बाद सब्जी को ढककर लगभग 25 मिनट के लिए धीमी आंच पर पकने दें। थोड़ी देर में झींगा स्वाभाविक रूप से अपना पानी छोड़ने लगता है, जिससे चना और सब्जी उसी भाप में पूरी तरह गल जाते हैं। यदि पकने के बाद कड़ाही में अधिक पानी दिखाई दे, तो आंच तेज करके लगातार चलाते हुए पानी को अच्छी तरह सुखा लें। इस तरह बिना लहसुन-प्याज के तैयार यह चटपटी सब्जी गरमा-गर्म रोटी या पूरी के साथ परोसने के लिए तैयार हो जाती है।



















