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पलामू में वन तुलसी से चमक रही किसानों की किस्मत, बिना सिंचाई के शहद से होगी लाखों की कमाईझारखंड
18 अक्तू॰ 2026, 5:47 am (19 मिनट पहले)· 0

पलामू में वन तुलसी से चमक रही किसानों की किस्मत, बिना सिंचाई के शहद से होगी लाखों की कमाई

पलामू जिले में पारंपरिक खेती से अलग हटकर किसान अब वन तुलसी के शहद का उत्पादन कर रहे हैं। बिहार के मुजफ्फरपुर से पहुंचे मधुमक्खी पालक इटालियन प्रजाति की मक्खियों की मदद से इस प्राकृतिक शहद को तैयार कर रहे हैं।

वर्तमान समय में खेती के तौर-तरीकों में लगातार बदलाव आ रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में किसान अन्न उपजाने के अलावा कई अन्य सहायक व्यवसायों को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं। इसी क्रम में झारखंड का पलामू जिला कृषि क्षेत्र में एक नए और अनोखे प्रयोग का केंद्र बन गया है। यहां के ग्रामीण इलाकों में पारंपरिक खेती के इतर अब बड़े पैमाने पर मधुमक्खी पालन का कार्य शुरू किया गया है, जिससे जुड़े लोगों को बंपर मुनाफा हो रहा है। इस पूरी प्रक्रिया की सबसे खास बात यह है कि इसके लिए न तो खेतों की जुताई की जरूरत पड़ती है और न ही फसलों को सींचने के लिए किसी कृत्रिम सिंचाई व्यवस्था की आवश्यकता होती है। प्रकृति खुद यहां के किसानों के लिए कमाई के रास्ते तैयार कर रही है।

बरसात के बाद प्राकृतिक रूप से खिलती है वन तुलसी

पलामू जिले की भौगोलिक स्थिति और जलवायु इस विशेष कार्य के लिए बेहद अनुकूल साबित हो रही है। जब भी बरसात का मौसम समाप्त होता है, तो जिले के तमाम खुले इलाकों और जंगलों के आसपास वन तुलसी के पौधे अपने आप उग आते हैं। जैसे ही ठंड का मौसम अपनी दस्तक देता है, इन पौधों पर अनगिनत फूल खिलने शुरू हो जाते हैं। इन जंगली फूलों से मकरंद और पराग इकट्ठा करने के लिए मधुमक्खियां बड़ी संख्या में यहां डेरा डालती हैं। इसी प्राकृतिक प्रक्रिया के जरिए एक बहुत ही खास और विशिष्ट गुणवत्ता वाला शहद तैयार होता है। वन तुलसी से मिलने वाले इस शहद का स्वाद बेहद अनूठा होता है और इसके औषधीय गुणों के कारण बाजार में इसकी मांग भी लगातार बनी रहती है। यही वजह है कि जैसे ही फूलों का यह सीजन शुरू होता है, दूसरे राज्यों के पेशेवर पालक भी इस इलाके की तरफ रुख करने लगते हैं।

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मुजफ्फरपुर से पहुंचे किसान और इटालियन प्रजाति का कमाल

इस अनूठी पहल को अमलीजामा पहनाने वाले लोगों में बिहार के मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाले सुमंत प्रसाद भी शामिल हैं। सुमंत प्रसाद पिछले पांच वर्षों से लगातार मधुमक्खी पालन के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं और इस कार्य में महारत हासिल कर चुके हैं। पलामू पहुंचकर वह पूरी तन्मयता के साथ शहद के उत्पादन में जुटे हुए हैं। उनके द्वारा उपयोग की जाने वाली मधुमक्खियां आम देसी किस्म की नहीं हैं, बल्कि वे इटालियन प्रजाति की विशेष मक्खियां हैं जो अधिक मात्रा में शहद का संकलन करने में सक्षम होती हैं। अपने इस व्यापार को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने सरकारी सहायता का भी पूरा लाभ उठाया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम यानी PMEGP योजना के तहत उन्होंने करीब 15 लाख रुपये का ऋण स्वीकृत कराया था। शुरुआत में उन्होंने महज 200 बक्से रखकर इस काम की नींव रखी थी, जो अब बढ़कर लगभग 250 बक्सों तक पहुंच चुके हैं। वह लगातार इन बक्सों की संख्या में इजाफा कर रहे हैं, ताकि आने वाले समय में उत्पादन और मुनाफे के आंकड़ों को और अधिक ऊंचा उठाया जा सके।

मौसम की चाल और उत्पादन का पूरा गणित

शहद उत्पादन का यह पूरा व्यवसाय पूरी तरह से प्राकृतिक कारकों और मौसम की चाल पर निर्भर करता है। सुमंत प्रसाद के अनुसार, वन तुलसी के फूलों का यह पूरा सीजन अमूमन एक महीने तक ही टिकता है। इस एक महीने के भीतर भी शुरुआती या कहें कि अनुकूल पंद्रह दिन उत्पादन की दृष्टि से सबसे ज्यादा अहम होते हैं। यदि इस दौरान मौसम पूरी तरह से मेहरबान रहता है और धूप-छांव का संतुलन ठीक रहता है, तो एक बक्से से पूरे सीजन के दौरान लगभग 2 से 2.5 किलोग्राम तक शुद्ध शहद आसानी से मिल जाता है। हालांकि, इस प्रक्रिया में मौसम की अनिश्चितता एक बड़ा फैक्टर साबित होती है। यदि अचानक बारिश आ जाए, तापमान में भारी गिरावट दर्ज हो या फूलों की उपलब्धता पर असर पड़े, तो सीधा असर शहद के कुल उत्पादन पर पड़ता है। सुहाने मौसम में जहां बंपर पैदावार से बक्सा मालिकों के चेहरे खिल उठते हैं, वहीं प्रतिकूल मौसम होने पर उत्पादन घटने से आमदनी भी प्रभावित हो जाती है।

बिक्री के आंकड़े और लाखों की कमाई का लक्ष्य

इस बार के सीजन को लेकर मधुमक्खी पालकों ने खासे ऊंचे अरमान पाल रखे हैं। सुमंत प्रसाद ने इस बार के पूरे सीजन के दौरान लगभग 1000 किलोग्राम यानी एक टन वन तुलसी का शुद्ध शहद तैयार करने का बड़ा लक्ष्य तय किया है। उनका मानना है कि यदि मौसम का मिजाज पूरी तरह से उनके अनुकूल बना रहा, तो इस लक्ष्य को समय रहते आसानी से पूरा कर लिया जाएगा। तैयार होने वाले इस शहद को बाजार में 100 से 140 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचे जाने की योजना है। इन सभी समीकरणों को साधते हुए उन्हें उम्मीद है कि एक सीजन के भीतर करीब 2 से 2.5 लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट है कि वास्तविक लाभ पूरी तरह से कुल उत्पादन की मात्रा, बाजार में मिलने वाले बिक्री मूल्य और बीच में होने वाले खर्चों पर ही निर्भर करेगा। इस प्रकार के नवाचार से न केवल जुड़े हुए किसानों की आर्थिक सेहत सुधर रही है, बल्कि पलामू की प्राकृतिक संपदा भी एक नए रूप में सामने आ रही है।

सवाल-जवाब

पलामू में किस पौधे के फूलों से शहद तैयार किया जा रहा है?
पलामू में वन तुलसी के फूलों से प्राकृतिक तरीके से शहद तैयार किया जा रहा है।
मधुमक्खी पालन के लिए किस प्रजाति की मक्खियों का उपयोग हो रहा है?
इस कार्य के लिए इटालियन प्रजाति की मधुमक्खियों का उपयोग किया जा रहा है।
शहद उत्पादन के लिए किसान किस राज्य से पलामू पहुंचे हैं?
बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से किसान पलामू पहुंचे हैं।
सुमंत प्रसाद ने व्यवसाय शुरू करने के लिए कितना ऋण लिया था?
उन्होंने PMEGP योजना के तहत लगभग 15 लाख रुपये का ऋण लिया था।
वन तुलसी के शहद का सीजन कितने दिनों तक रहता है?
वन तुलसी के शहद का सीजन लगभग एक महीने तक रहता है।
इस सीजन में कितने किलोग्राम शहद उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है?
इस सीजन में लगभग 1000 किलोग्राम शहद तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।
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