शेयर बाजार में कदम रखने की इच्छा रखने वाले ज्यादातर नए निवेशकों के सामने सबसे बड़ी उलझन यही होती है कि किस कंपनी के शेयर चुने जाएं। जब कोई व्यक्ति किसी एक खास कंपनी का शेयर खरीदता है और उस कंपनी का प्रदर्शन किसी तिमाही में खराब रहता है, तो उसका सीधा नुकसान निवेशक की पूंजी पर पड़ता है। इस समस्या से बचने के लिए एक तैयार टोकरी जैसा विकल्प काम आता है, जिसे एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ कहा जाता है। इसे एक बेहद सरल उदाहरण से समझा जा सकता है। मान लीजिए कि दोस्तों का एक समूह पांच अलग-अलग रेस्तरां से खाना मंगवाना चाहता है, लेकिन कोई भी पांच अलग ऑर्डर देकर पांच बार डिलीवरी शुल्क नहीं भरना चाहता। ऐसे में एक कॉम्बो थाली चुन ली जाती है जिसमें हर जगह से थोड़ा-थोड़ा खाना शामिल होता है और भुगतान केवल एक बार करना पड़ता है। ईटीएफ भी ठीक इसी सिद्धांत पर काम करता है, बस यहाँ खाने की जगह विभिन्न कंपनियों के शेयर एक साथ बंधे होते हैं और निवेशक एक ही खरीद में पूरा समूह अपने नाम कर लेता है।
एक्सचेंज ट्रेडेड फंड की बुनियादी बनावट और कार्यप्रणाली
ईटीएफ का पूरा नाम एक्सचेंज ट्रेडेड फंड है। यह मूल रूप से शेयरों की एक तैयार टोकरी होती है जिसका कारोबार स्टॉक एक्सचेंज पर बिल्कुल आम शेयरों की तरह ही होता है। किसी एक कंपनी को चुनकर केवल उसकी किस्मत पर निर्भर रहने के बजाय, निवेशक एक ही सौदे के जरिए कई कंपनियों में छोटी-छोटी हिस्सेदारी हासिल कर लेता है। इस व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह है कि निवेशक को खुद यह अनुमान लगाने की माथापच्ची नहीं करनी पड़ती कि आने वाले दिनों में कौन सा कारोबारी घराना सबसे तेज भागेगा। जब निवेश कई कंपनियों में फैला होता है, तो किसी एक कंपनी की खराब तिमाही पूरे पोर्टफोलियो को बर्बाद नहीं करती। जिन लोगों को अभी तक बैलेंस शीट पढ़ना या वित्तीय आंकड़ों का गहराई से विश्लेषण करना नहीं आता, उनके लिए यह तरीका काफी हद तक गलतियों को माफ करने वाला साबित होता है।
अधिकतर ईटीएफ किसी न किसी इंडेक्स की नकल करते हैं। इंडेक्स दरअसल कंपनियों की एक ऐसी सूची होती है जो बाजार के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करने के लिए बनाई जाती है। उदाहरण के तौर पर निफ्टी 50 को देखा जा सकता है, जो एनएसई पर सूचीबद्ध पचास सबसे बड़ी कंपनियों पर नजर रखता है। एक निफ्टी 50 ईटीएफ केवल वही दोहराता है जो वे पचास कंपनियां कर रही होती हैं। इसमें कोई फंड मैनेजर अपनी व्यक्तिगत पसंद के आधार पर शेयर नहीं चुनता, बल्कि यह फंड बिना किसी फेरबदल के तय सूची के पीछे चलता है। चूंकि इसका कारोबार एक्सचेंज पर दिनभर चलता रहता है, इसलिए इसकी कीमतें लगातार बदलती रहती हैं। निवेशक इसे सुबह खरीदकर शाम को बेच सकते हैं, और उन्हें म्यूचुअल फंड की तरह दिन के अंत में किसी तय एनएवी के घोषित होने का इंतजार नहीं करना पड़ता।
भारतीय बाजार में लोकप्रिय प्रमुख इंडेक्स ईटीएफ
बाजार में शुरुआत करने वाले लोग जब विभिन्न विकल्पों की तलाश करते हैं, तो कुछ फंड्स के नाम सबसे ज्यादा सामने आते हैं। ये कोई आधिकारिक रूप से घोषित अंतिम सूची नहीं हैं, बल्कि ऐसे मजबूत और जाने-माने शुरुआती विकल्प हैं जिनसे इस व्यवस्था को समझना आसान हो जाता है।
1. एसबीआई ईटीएफ निफ्टी 50
यह फंड ठीक वही काम करता है जो इसके नाम से जाहिर होता है। यह निफ्टी 50 को ट्रैक करता है और इसके ढांचे में कोई अतिरिक्त जटिलता नहीं जोड़ी गई है। इसका प्रबंधन एसबीआई म्यूचुअल फंड करता है, जो देश के बड़े और स्थापित फंड घरानों में गिना जाता है। इस बड़े नाम से मिलने वाला भरोसा नए निवेशकों को मानसिक शांति देता है। यह फंड बाजार को पछाड़ने या कोई अतिरिक्त चतुराई दिखाने की कोशिश नहीं करता, बल्कि दिन-प्रतिदिन निफ्टी 50 के उतार-चढ़ाव को ही हूबहू दर्शाता है।
यह विकल्प उन लोगों के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है जो बिना किसी तामझाम या अतिरिक्त लेयर के सीधे इंडेक्स में निवेश करना चाहते हैं। इसे एक तरह से ऐसा विकल्प कहा जा सकता है जिसे खरीदकर बार-बार सोचने की जरूरत नहीं पड़ती। एसबीआई ब्रांड के साथ जुड़ी विश्वसनीयता और संतोषजनक लिक्विडिटी इसकी मुख्य ताकत है, जिसका अर्थ है कि जरूरत पड़ने पर खरीदार या विक्रेता ढूंढने में दिक्कत नहीं आती। इसका जोखिम भी निफ्टी से जुड़े किसी भी ईटीएफ जैसा ही है। जब व्यापक बाजार में गिरावट आती है, तो यह फंड भी नीचे गिरता है। एसबीआई का नाम जुड़े होने मात्र से गिरावट के समय कोई अलग सुरक्षा कवच नहीं मिलता।
2. यूटीआई निफ्टी 50 ईटीएफ
यह भी निफ्टी 50 को ट्रैक करने वाला एक अन्य ईटीएफ है, जिसका प्रबंधन यूटीआई म्यूचुअल फंड करता है। यूटीआई देश के सबसे पुराने और स्थापित एसेट मैनेजरों में से एक है। व्यावहारिक रूप से यह फंड भी ठीक वही काम कर रहा है जो बाजार के बाकी निफ्टी 50 ईटीएफ करते हैं। ऐसे में इस तरह के विकल्पों के बीच मुख्य अंतर बहुत बारीक बातों पर निर्भर करता है, जैसे कि एक्सपेंस रेशियो और किसी कारोबारी दिन पर इसे कितनी आसानी से खरीदा या बेचा जा सकता है।
यह फंड उन नए निवेशकों के लिए बेहतर साबित होता है जो एक जैसे दिखने वाले कई विकल्पों की घंटों तक तुलना करने के बजाय एक पुराने और जाने-माने फंड हाउस के साथ टिके रहना पसंद करते हैं। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग में यूटीआई का लंबा ट्रैक रिकॉर्ड इस पूरी प्रक्रिया को एक स्थिरता देता है, भले ही यह फंड अपने प्रतिस्पर्धियों से अलग कुछ न कर रहा हो। इसका जोखिम भी पूरी तरह से बाजार के प्रदर्शन से बंधा है। चूंकि यह केवल निफ्टी 50 का अनुसरण करता है, इसलिए इंडेक्स के खराब दौर का सीधा असर इस फंड पर भी दिखता है।
3. निप्पॉन इंडिया ईटीएफ निफ्टी 50 बीईईएस
इसे भारतीय ईटीएफ बाजार की सबसे पुरानी नींव माना जा सकता है। वर्ष 2001 में शुरू किया गया यह फंड भारत का सबसे पहला ईटीएफ था। इतने लंबे समय से बाजार में मौजूद रहने का इसे एक बड़ा व्यावहारिक फायदा मिलता है। यह एक्सचेंज पर सबसे अधिक सक्रिय रूप से ट्रेड होने वाले ईटीएफ में से एक बना रहता है। शुरुआत करने वाले निवेशक अक्सर इस बात को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन सही और निष्पक्ष कीमत पर सौदा पूरा करने के लिए ट्रेडिंग वॉल्यूम बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह उन निवेशकों के लिए सबसे मुफीद है जो खरीदारी और बिकवाली की कीमतों के बीच बड़े अंतर का सामना किए बिना आसानी से फंड में प्रवेश और निकास चाहते हैं। लिक्विडिटी ही इसकी सबसे बड़ी ताकत है। दशकों के कारोबारी इतिहास का मतलब है कि आपके सौदे के सामने हमेशा कोई न कोई दूसरा पक्ष मौजूद रहता है। दूसरी ओर, इसका जोखिम पूरी तरह से बाजार से जुड़ा हुआ है। देश का सबसे पुराना ईटीएफ होना इसे किसी खराब दिन या मंदी के पूरे साल के नुकसान से नहीं बचा सकता। उम्र केवल ट्रेडिंग की सुविधा देती है, बाजार जोखिम से सुरक्षा नहीं।
4. यूटीआई बीएसई सेंसेक्स ईटीएफ
यह फंड निफ्टी के पैटर्न से थोड़ा अलग हटकर सेंसेक्स को ट्रैक करता है। इसका मतलब यह है कि निवेशक को एनएसई की 50 कंपनियों के बजाय बीएसई के प्रमुख इंडेक्स में शामिल 30 कंपनियों में निवेश का मौका मिलता है। सेंसेक्स और निफ्टी की कंपनियों में एक बड़ा हिस्सा साझा होता है, इसलिए दोनों का दैनिक उतार-चढ़ाव काफी हद तक एक जैसा महसूस होता है, हालांकि वह बिल्कुल एक समान नहीं होता।
यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है जो खास तौर पर सेंसेक्स से जुड़ाव चाहते हैं, शायद इसलिए कि वे बीएसई से अधिक परिचित हैं या फिर लार्ज-कैप शेयरों में थोड़ा अलग तरह का संयोजन चाहते हैं। इसकी खूबी यह है कि यह सीधे निफ्टी ईटीएफ की तुलना में बाजार का थोड़ा अलग हिस्सा पेश करता है, जो तब काम आता है जब कोई पहले से रखे गए निवेश के साथ बहुत ज्यादा दोहराव से बचना चाहता हो। इसका जोखिम भी वही पुराना है जो उन 30 बड़ी कंपनियों के सामूहिक प्रदर्शन पर निर्भर करता है। चूंकि इनमें से कई दिग्गज नाम निफ्टी फंड्स में भी पाए जाते हैं, इसलिए इसका जोखिम स्तर भी काफी हद तक वैसा ही रहता है।
शुरुआती लागत और ट्रैकक जैसे विश्लेषण टूल्स की भूमिका
कई लोग यह मान बैठते हैं कि शेयर बाजार में निवेश के लिए लाखों रुपये की जरूरत होती है, जबकि ईटीएफ में ऐसा बिल्कुल नहीं है। कुछ ईटीएफ प्रति यूनिट केवल 50 रुपये से 300 रुपये के भाव पर उपलब्ध होते हैं, जो कई लोगों के नियमित कॉफी खर्च से भी कम है। किसी को अपनी बचत के लाखों रुपये एक साथ लगाने की जरूरत नहीं होती, बल्कि अपनी सुविधानुसार छोटी रकम से शुरुआत करके समय के साथ धीरे-धीरे पूंजी बढ़ाई जा सकती है। पहले ही दिन बहुत बड़ी रकम लगा देने से बेहतर रिटर्न की गारंटी नहीं मिलती, बल्कि नियमित रूप से निवेश जारी रखना शुरुआती खरीदारी के आकार से कहीं अधिक मायने रखता है।
जब निवेशक दो या तीन विकल्पों को छांट लेते हैं, तो ट्रैकक का कंपेयर स्टॉक्स फीचर दो ईटीएफ को आमने-सामने रखकर मूल्यांकन, उतार-चढ़ाव और रिस्क मीटर की जांच करने की सुविधा देता है। इससे निवेशक किसी सोशल मीडिया फीड पर चल रहे ट्रेंड के बजाय वास्तविक आंकड़ों के आधार पर फैसला ले पाते हैं। एक निवेश प्लेटफॉर्म के रूप में ट्रैकक का पूरा विचार यही है कि बाजार शुरू करने के लिए किसी को पहले से विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
निवेश से पहले जांचने योग्य मुख्य मानक
किसी भी ईटीएफ में पैसा लगाने से पहले निवेशकों को कुछ बुनियादी बातों की पड़ताल जरूर कर लेनी चाहिए
- एक्सपेंस रेशियो: यह वह वार्षिक शुल्क होता है जो ईटीएफ को संभालने के एवज में काटा जाता है। कम शुल्क से लंबी अवधि में बचत बढ़ती है।
- लिक्विडिटी: इसका मतलब यह है कि जब आप यूनिट्स खरीदना या बेचना चाहें, तो उस समय कीमतों में बिना किसी बड़े अंतर के सौदा कितनी आसानी से पूरा हो जाता है।
- ट्रैकिंग एरर: यह पैमाना बताता है कि ईटीएफ अपने मूल इंडेक्स की कितनी सटीकता से नकल कर पा रहा है। ट्रैकिंग एरर जितना कम होगा, फंड इंडेक्स के उतना ही करीब रहेगा।
- जोखिम उठाने की क्षमता: निवेशक को यह ईमानदारी से समझना चाहिए कि वह कितना उतार-चढ़ाव झेल सकता है, क्योंकि उदाहरण के तौर पर एक गोल्ड ईटीएफ और एक नैस्डैक 100 ईटीएफ बिल्कुल अलग-अलग जोखिम और संपत्ति वर्ग पर काम करते हैं।
रातों-रात व्यक्तिगत शेयर चुनने का विशेषज्ञ बने बिना निवेश की दुनिया में कदम रखने के लिए ईटीएफ आज भी सबसे आसान रास्तों में से एक बने हुए हैं। चाहे कोई पहली बार किसी शीर्ष ईटीएफ की पड़ताल कर रहा हो या पूरी व्यवस्था को समझने की कोशिश में हो, सही विश्लेषणात्मक साधनों का साथ रिसर्च की इस पूरी प्रक्रिया को काफी सुगम बना देता है।



















