झारखंड के जमशेदपुर की सड़कों पर जब एक चमचमाती लाल मोटरसाइकिल गुजरती है, तो राहगीर मुड़कर उसे देखे बिना नहीं रह पाते। यह कोई साधारण दोपहिया वाहन नहीं, बल्कि 17 साल पुरानी करिज्मा है जिसे कई लोग लोकप्रिय फिल्म के संदर्भ में 'धूम बाइक' भी कहते हैं। इस दोपहिया वाहन के मालिक हरि रामदास ने इसे बेहद अनोखे ढंग से सुसज्जित किया है, जिसके कारण यह जहां भी जाती है, वहां लोगों के आकर्षण का केंद्र बन जाती है।
स्वच्छता के उपकरणों और जागरूकता संदेशों से सजी सवारी
इस मोटरसाइकिल की पहचान केवल इसका चटख लाल रंग या पुराना मॉडल नहीं है, बल्कि इस पर जोड़े गए रोजमर्रा और आपातकालीन इस्तेमाल के साधन हैं। हरि रामदास ने अपनी इस सवारी पर पानी की बोतल, टायर में हवा भरने वाला पंप, झाड़ू, वाइपर और एक प्राथमिक उपचार बॉक्स (फर्स्ट एड बॉक्स) सलीके से फिट किया हुआ है। इसके साथ ही, पूरे वाहन पर स्वच्छ भारत मिशन से जुड़े कई प्रेरक स्टीकर चिपकाए गए हैं।
हरि रामदास का कहना है कि उन्हें साफ-सफाई से गहरा लगाव है और इसी व्यक्तिगत विचार को उन्होंने अपनी दिनचर्या और वाहन का हिस्सा बना लिया है। वह हर दिन अपनी मोटरसाइकिल को पानी से अच्छी तरह धोते हैं और उसके बाद उस पर पॉलिश लगाकर चमकाते हैं। उनके अनुसार, जब भी वह घर से बाहर निकलते हैं तो उनका मकसद केवल एक जगह से दूसरी जगह जाना नहीं होता, बल्कि राह चलते नागरिकों को स्वच्छता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना भी होता है।
1 लाख किलोमीटर से ज्यादा का सफर और धार्मिक यात्राएं
यह खास मोटरसाइकिल केवल जमशेदपुर की गलियों तक ही सीमित नहीं रही है। हरि रामदास इसी वाहन पर सवार होकर लंबी दूरी के कई सफर तय कर चुके हैं। उन्होंने पटना, देवघर, बासुकीनाथ धाम और बक्सर जैसे ऐतिहासिक शहरों तथा प्रमुख धार्मिक केंद्रों की यात्राएं इसी दोपहिया से पूरी की हैं। सफर का कुल दायरा देखा जाए तो वह अब तक इस दोपहिया वाहन से करीब 1 लाख किलोमीटर से भी अधिक की दूरी नाप चुके हैं।
नियमित देखभाल और रखरखाव की मिसाल
इतनी लंबी दूरी तय करने और लगभग 17 साल का समय बीत जाने के बाद भी यह मशीन आज भी बेहतरीन स्थिति में है। इसके पीछे का राज़ हरि रामदास द्वारा की जाने वाली नियमित देखभाल है। उनका कहना है कि जब भी वाहन में कोई छोटी या बड़ी तकनीकी खराबी आती है, तो वह उसे टालते नहीं बल्कि तुरंत मैकेनिक के पास ले जाकर दुरुस्त करवाते हैं।
लगातार सार-संभाल का ही नतीजा है कि करीब दो दशक पुरानी होने के बावजूद यह मोटरसाइकिल आज भी एक किक या सेल्फ स्टार्ट में चालू हो जाती है। जब भी यह सड़क पर रुकती है, लोग कौतूहलवश पास आकर इसके रखरखाव और इस पर लगे सामान के बारे में बातचीत करने लगते हैं। हरि रामदास के लिए यह साधन मात्र यात्रा का जरिया नहीं, बल्कि उनकी पर्यावरण के प्रति सोच और बीते वर्षों की स्मृतियों का प्रतीक है।





















