भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी के दामों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है, जिसके चलते ये कीमती धातुएं आम खरीदारों के सामान्य बजट से काफी ऊपर निकल गई हैं। बाजार के वर्तमान रुझानों में सबसे असाधारण बात यह सामने आई है कि चांदी अपने ऐतिहासिक स्तरों को छूते हुए सोने की तुलना में कहीं अधिक तेजी दिखा रही है। खुदरा स्तर पर जहां सोना 1 लाख 46000 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास पहुंच गया है, वहीं चांदी का भाव लगभग 2 लाख 75000 रुपये प्रति किलो पर बना हुआ है। इस अप्रत्याशित तेजी के बीच बाजार से जुड़े खरीदारों और निवेशकों के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि भारत में कीमती धातुओं के दाम तय करने की वास्तविक प्रक्रिया क्या है और किन वजहों से इनमें लगातार रिकॉर्ड बढ़त दर्ज की जा रही है।
भारत में सोने और चांदी के दाम तय होने का पूरा फॉर्मूला
घरेलू बाजार में सोने या चांदी की कीमतें सीधे तौर पर केंद्र सरकार द्वारा घोषित या निर्धारित नहीं की जाती हैं। इसके बजाय इनके दैनिक भाव कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू वित्तीय पैमानों के संयोजन से तय होते हैं। दि बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन, कूचा महाजनी के चेयरमैन राम अवतार वर्मा के अनुसार, इन धातुओं के अंतिम मूल्य निर्धारण में विदेशी मुद्रा विनिमय दर सबसे निर्णायक भूमिका निभाती है। वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी का कारोबार अमेरिकी डॉलर (USD) में दर्ज होता है, इसलिए डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपये की क्या कीमत चल रही है, इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर दिखाई देता है।
मूल्य निर्धारण के इस गणित को एक व्यावहारिक समीकरण से आसानी से समझा जा सकता है। भारत में सोने और चांदी की अंतिम उपभोक्ता कीमत अंतरराष्ट्रीय भाव, डॉलर विनिमय दर, आयात शुल्क, जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) और स्थानीय परिवहन या मेकिंग से जुड़े खर्चों को आपस में जोड़कर तैयार होती है। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में धातु महंगी होती है या फिर रुपये की तुलना में डॉलर मजबूत होता है, तो भारत में आयात होने वाला सोना और चांदी स्वतः ही अधिक महंगा हो जाता है। इसके ऊपर सरकारी आयात कर और स्थानीय जीएसटी जुड़ने के बाद खुदरा आभूषण दुकानों तक आते-आते यह भाव अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच जाता है।
कीमतों में रिकॉर्ड उछाल के पीछे के मुख्य कारण
वर्तमान बाजार में धातुओं के अप्रत्याशित रूप से महंगे होने के कई भू-राजनीतिक और आर्थिक कारण मौजूद हैं। राम अवतार वर्मा ने स्पष्ट किया कि जब से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर टैरिफ दरों में बढ़ोतरी की है, तब से सोने और चांदी की कीमतों में निरंतर और आक्रामक तेजी देखी जा रही है। वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ने से पारंपरिक मुद्राओं को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ी हैं।
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी डॉलर को लेकर निवेशकों और वित्तीय संस्थानों के भरोसे में कमी आई है। मुद्रा जोखिम से बचने के लिए वैश्विक स्तर पर सोने और चांदी को सबसे सुरक्षित परिसंपत्ति माना जाने लगा है। यही वजह है कि भारत, चीन और कई अन्य प्रमुख देशों ने अपनी राष्ट्रीय आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए भारी मात्रा में सोने और चांदी का भंडारण शुरू कर दिया है। केंद्रीय बैंकों और संप्रभु संस्थानों द्वारा की जा रही इस आक्रामक खरीदारी ने बाजार में आपूर्ति की तुलना में मांग को कई गुना बढ़ा दिया है, जिससे कीमतें तेजी से चढ़ी हैं।
क्या आने वाले दिनों में घटेंगे कीमती धातुओं के दाम?
बाजार के जानकारों का मानना है कि सोना और चांदी किसी भी देश की वित्तीय स्थिति को मजबूती देने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। जिस बड़े पैमाने पर दुनिया भर के देशों ने इन धातुओं को खरीदकर अपने भंडार में रखा है, उसने कीमतों को एक मजबूत आधार प्रदान कर दिया है। राम अवतार वर्मा के आकलन के मुताबिक, निकट भविष्य में सोने या चांदी के दामों में किसी बड़ी गिरावट या सस्ते होने की कोई संभावना नहीं दिखाई देती है।
आभूषण उद्योग और बुलियन विशेषज्ञों का मानना है कि ये भाव फिलहाल नीचे आने के बजाय और आगे बढ़ सकते हैं। पिछले कई महीनों से चली आ रही इस तेजी ने पूरे बाजार का स्वरूप बदल दिया है। जो धातुएं पहले कुछ हजार रुपयों के दायरे में बिका करती थीं, अब वे लाखों रुपयों के स्तर पर स्थापित हो चुकी हैं। आभूषण जगत को अब ऐसा बिल्कुल नहीं लगता कि भविष्य में सोना और चांदी दोबारा उन पुराने हजारों वाले स्तरों पर लौट पाएंगे।



















