नागालैंड राज्य लॉटरी विभाग ने 2 अगस्त 2026 के अपने निर्धारित रविवार के ड्रॉ चक्र की शुरुआत करते हुए दोपहर 1 PM डियर विश संडे वीकली लॉटरी के परिणाम आधिकारिक रूप से घोषित कर दिए हैं। इस पहले ड्रॉ के पूरा होने के बाद, अब सभी टिकट धारकों की निगाहें दिन के बाकी बचे दो प्रमुख ड्रॉ पर टिकी हुई हैं। इनमें शाम 6 PM का डियर एम्पायर संडे ड्रॉ और रात 8 PM का डियर मैजिक संडे ड्रॉ शामिल हैं। इन दोनों बाद के ड्रॉ के आधिकारिक परिणाम उनके निर्धारित समय के तुरंत बाद सार्वजनिक किए जाने की उम्मीद है।
नागालैंड स्टेट लॉटरी का साप्ताहिक शेड्यूल और रविवार के बाकी ड्रॉ
भारत में सरकारी देखरेख में संचालित होने वाली लॉटरी प्रणालियों में नागालैंड की राज्य लॉटरी काफी लोकप्रिय मानी जाती है। 2 अगस्त 2026 को आयोजित तीन स्तरीय रविवार शेड्यूल का पहला चरण दोपहर 1 PM के डियर विश ड्रॉ के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है। विभाग की ओर से इस ड्रॉ की आधिकारिक विजेता संख्याओं की सूची जारी कर दी गई है।
इसके बाद अब सारा ध्यान दिन में बाद में होने वाले दो महत्वपूर्ण ड्रॉ की ओर स्थानांतरित हो गया है। शाम को आयोजित होने वाला डियर एम्पायर संडे ड्रॉ 6 PM के लिए निर्धारित है, जिसके परिणाम सत्यापन के बाद प्रकाशित किए जाते हैं। वहीं, दिन का अंतिम मुकाबला यानी डियर मैजिक संडे वीकली लॉटरी रात 8 PM पर आयोजित होगी। आमतौर पर पूरी सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आधिकारिक परिणाम रात लगभग 8:10 PM तक जारी कर दिए जाते हैं।
सरकारी पर्यवेक्षण और पारदर्शी लॉटरी व्यवस्था
नागालैंड राज्य द्वारा संचालित यह प्रणाली भारत में सरकार द्वारा अधिकृत उन चुनिंदा लॉटरी कार्यक्रमों में शामिल है जो पूर्ण कानूनी ढांचे के तहत काम करते हैं। इन सभी साप्ताहिक और दैनिक ड्रॉ का आयोजन राज्य सरकार के अधिकारियों की प्रत्यक्ष देखरेख में किया जाता है ताकि निष्पक्षता और पारदर्शिता बनी रहे।
हर दिन हजारों की संख्या में लोग इन ड्रॉ में भाग लेते हैं। सरकारी नियंत्रण में आयोजित होने के कारण यह लॉटरी खरीदारों के बीच अत्यधिक भरोसेमंद मानी जाती है। इसमें छोटे नकद पुरस्कारों से लेकर 1 करोड़ रुपये के भव्य जैकपॉट तक जीतने के अवसर उपलब्ध रहते हैं, जिससे देश भर के खिलाड़ियों का रुझान इसमें बना रहता है।
पुरस्कार श्रेणियां और 1 करोड़ रुपये का मुख्य जैकपॉट
नागालैंड स्टेट लॉटरी की प्रत्येक श्रृंखला में पुरस्कारों का एक विस्तृत ढांचा तैयार किया जाता है। इनमें सबसे बड़ा आकर्षण 1 करोड़ रुपये का प्रथम पुरस्कार यानी जैकपॉट होता है, जो टिकट धारकों के बीच सबसे अधिक उत्सुकता पैदा करता है।
केवल जैकपॉट ही नहीं, बल्कि विभाग निचले स्तर की कई अन्य पुरस्कार श्रेणियों की पेशकश भी करता है। इनमें द्वितीय, तृतीय, चतुर्थ और पंचम पुरस्कार शामिल होते हैं, जो छोटे पैमाने पर विजेताओं को नकद राशि प्रदान करते हैं। बहुस्तरीय पुरस्कार प्रणाली होने के कारण अधिक से अधिक प्रतिभागियों के पास कोई न कोई नकद इनाम हासिल करने की संभावना बनी रहती है।
परिणामों की जांच और धोखाधड़ी से बचने के निर्देश
लॉटरी विभाग ने सभी प्रतिभागियों को सलाह दी है कि वे अपने टिकटों की जांच केवल आधिकारिक रूप से जारी की गई परिणाम सूचियों से ही करें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों, मैसेजिंग ऐप और अनधिकृत वेबसाइटों पर प्रसारित होने वाली गैर-सरकारी सूचियों में त्रुटियां हो सकती हैं, जिससे खरीदारों को गलत जानकारी मिल सकती है।
विजेता संख्या का मिलान करते समय प्रतिभागियों को अपने टिकट का पूरा नंबर देखना चाहिए। इसमें केवल अंक ही नहीं, बल्कि टिकट की विशिष्ट श्रृंखला का मिलान करना भी अत्यंत आवश्यक है। पूरा नंबर और श्रृंखला आधिकारिक परिणाम पत्रक से मेल खाने के बाद ही पुरस्कार का दावा प्रस्तुत करना चाहिए।
आयकर अधिनियम 1961 की धारा 194B और TDS के नियम
लॉटरी में कोई भी नकद इनाम जीतने के बाद विजेता पर भारतीय कर कानूनों के तहत टैक्स की देनदारियां लागू होती हैं। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 194B के प्रावधानों के अनुसार, यदि लॉटरी से प्राप्त कुल जीत राशि 10,000 रुपये से अधिक होती है, तो उस पर स्रोत पर कर कटौती यानी TDS का भुगतान अनिवार्य है।
भारतीय निवासी विजेताओं के मामले में पुरस्कार राशि का भुगतान करने से पहले 30% की समतल दर से TDS काटा जाता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति बड़ा पुरस्कार जीतता है, तो कुल घोषित राशि में से 30 प्रतिशत टैक्स काटकर शेष राशि ही बैंक खाते या चेक के माध्यम से हस्तांतरित की जाती है।
अनिवासी विजेताओं के लिए कर और दस्तावेज रिकॉर्ड
गैर-निवासी भारतीय (NRI) या गैर-निवासी विजेताओं के लिए कर संरचना अधिक सख्त है। ऐसे विजेताओं पर 30% का मूल TDS तो लागू होता ही है, साथ ही लागू अधिभार (सर्चार्ज) और 4% का स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर (सेक) भी जोड़ा जाता है। इसके कारण गैर-निवासियों के लिए कुल कर देनदारी बढ़ जाती है।
चूंकि लॉटरी से होने वाली आय को कर योग्य आय के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, इसलिए सभी विजेताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने दावे से संबंधित सभी दस्तावेज, भुगतान की रसीदें और TDS प्रमाणपत्र सुरक्षित रखें। यह दस्तावेज भविष्य में आयकर रिटर्न दाखिल करते समय और कर विभाग के प्रश्नों का उत्तर देने में आवश्यक साबित होते हैं।



















