भारत में चीता प्रोजेक्ट को शुरू हुए आज चार साल पूरे हो चुके हैं। इस खास मौके पर देश के वन्यजीव संरक्षण इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ की ताजा हलचल और प्रमुख खबरों के बीच इस प्रोजेक्ट की प्रगति पर देश भर की नजरें टिकी हुई हैं। भोपाल, उज्जैन, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग जैसे बड़े शहरों के समाचारों के साथ-साथ पर्यावरण और वन्यजीव प्रेमियों के लिए यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि है। प्रोजेक्ट की शुरुआत के बाद से देश में लगातार सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
नामीबिया से हुई थी ऐतिहासिक शुरुआत
इस अनूठी परियोजना की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जब नामीबिया से चीतों की पहली खेप को विशेष विमान से लाकर मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा गया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से भी चीतों को भारत लाया गया ताकि देश में इस विलुप्तप्राय प्रजाति की आबादी को सफलतापूर्वक फिर से बसाया जा सके। भारत में चीता पुनर्स्थापना परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के जंगलों में एक बार फिर से इस शानदार शिकारी जानवर की मौजूदगी सुनिश्चित करना और उनकी एक स्वस्थ आबादी तैयार करना है।
बढ़कर 52 हुई देश में चीतों की कुल संख्या
इन चार वर्षों के लंबे सफर में देश के भीतर चीतों की संख्या में लगातार इजाफा दर्ज किया गया है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, भारत में अब चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 हो गई है। इनमें से 32 शावक या चीते ऐसे हैं जिनका जन्म भारतीय धरती पर ही हुआ है, जबकि शेष 20 चीते अफ्रीकी देशों से आयात करके लाए गए थे। मध्य प्रदेश इस पूरी परियोजना का मुख्य केंद्र और चीतों का प्रमुख ठिकाना बना हुआ है, जहां इनकी देखभाल और संरक्षण के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।
कूनो और गांधी सागर में हो रहा है संरक्षण
वर्तमान समय में मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में सबसे ज्यादा 49 चीते मौजूद हैं, जबकि इसके अलावा गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में 3 चीते रह रहे हैं। वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की एक विशेष टीम लगातार इन सभी चीतों की हर गतिविधि पर कड़ी नजर रख रही है। प्रोजेक्ट के तहत चीतों की सेहत, उनकी निगरानी और उनके प्राकृतिक आवास के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े और वे भारतीय परिवेश में पूरी तरह ढल सकें।



















