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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में कैसे बदला भारत, जानिए पूरी कहानीराजनीति
17 सित॰ 2026, 5:43 am (1 घंटे पहले)· 1

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 साल के कार्यकाल में कैसे बदला भारत, जानिए पूरी कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर उनके 12 साल के कार्यकाल का विश्लेषण किया गया है। इस दौरान देश की राजनीति, नीतियों और जनता की सोच में आए बड़े बदलावों को रेखांकित किया गया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन एक ऐसा अवसर है जिस पर देश के राजनीतिक सफर और विकास यात्रा का आकलन किया जाता है। पिछले डेढ़ दशक से इस खास मौके पर लगातार लिखने के बाद यह सवाल उठता है कि जब लक्ष्य और नीतियां वही हैं और कार्यशैली की रफ्तार में कोई कमी नहीं आई है, तो आखिर बदला क्या है। असल में इस दौरान जो चीजें बदली हैं, उनमें देश की दिशा, जनता की सोच और वैश्विक मंच पर भारत को देखने का नजरिया शामिल है। ब्रिक्स 2026 के सफल आयोजन ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि भारत अब दुनिया के अग्रणी राष्ट्रों की पंक्ति में मजबूती से खड़ा है, और किसी भी वैश्विक मंच पर उसकी अनदेखी करना आसान नहीं रह गया है।

2014 से पहले की स्थिति और बदलाव की शुरुआत

अगर वर्ष 2014 से पहले के भारत की तस्वीर पर नजर डालें, तो नीतिगत मोर्चे पर ठहराव यानी पॉलिसी पैरालिसिस, भ्रष्टाचार का बोलबाला और कमजोर नेतृत्व साफ दिखाई देता था। ऐसी सरकार जिसने जनता का विश्वास पूरी तरह खो दिया था, उसके स्थान पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का आना देश के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हुआ। मई 2014 में जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली, तो गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर मिलने वाली पूरी तनख्वाह उन्होंने वहां की बालिकाओं की शिक्षा के लिए दान कर दी थी। वे गुजरात से केवल दो सूटकेस लेकर आए थे, लेकिन उनके साथ उनकी पुरानी टीम भी थी जो रसोई से लेकर उनकी दैनिक कार्यप्रणाली तक को संभालती थी और जिसने दिल्ली में भी पूरी मुस्तैदी से मोर्चा संभाल लिया। पीएम मोदी का अपनी टीम पर अटूट भरोसा है और उनकी यह विशेषता रही है कि जो लोग उनके साथ जुड़ जाते हैं, वे लंबे समय तक उनके साथ बने रहते हैं। देश भर के उन नेताओं और कार्यकर्ताओं से इस बात की पुष्टि होती है जिन्होंने पिछले 50 वर्षों में उनके साथ काम किया है।

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चुनौतियां और राजनीतिक उतार-चढ़ाव का दौर

यह सफर चुनौतियों से रहित नहीं रहा है। पहले कार्यकाल यानी 2014 से 2019 के बीच सूटबूट की सरकार के आरोप, बिहार विधानसभा चुनाव में हार और नोटबंदी जैसे कड़े फैसलों के बाद ऐसा प्रतीत हुआ था कि सरकार की पकड़ कमजोर हो रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री की नीयत और नीतियों पर देश की जनता ने अपना विश्वास बनाए रखा और 2019 के चुनावी परिणामों ने यह साबित कर दिया कि मोदी गारंटी पर भरोसा लगातार मजबूत हुआ है। इसके बाद 2019 से 2024 के दूसरे कार्यकाल यानी मोदी 2.0 में भी मुश्किलें कम नहीं थीं। इसकी शुरुआत धारा 370 को हटाने और तीन तलाक को समाप्त करने जैसे कड़े निर्णयों से हुई। इसके तुरंत बाद कोरोना महामारी ने वैश्विक स्तर पर विकास की गति को रोकने का प्रयास किया। इस गंभीर संकट से देश को उबारते हुए भारत ने न केवल स्वदेशी दवा का निर्माण किया, बल्कि उसे अपने देश की जनता के साथ-साथ दुनिया भर के कई देशों में मुफ्त वितरित किया। इस आपदा के दौर में भारत ने दुनिया के सामने एक सच्चे मित्र की भूमिका निभाई।

संकट के बीच जनसमर्थन और राजनीतिक मजबूती

अपने पहले कार्यकाल के दौरान राफेल विमान खरीद में कथित भ्रष्टाचार और सूटबूट की सरकार के आरोपों का सामना करते हुए सरकार ने नोटबंदी जैसा बड़ा कदम उठाया। इस कठिन दौर में भी जनता का भरोसा अडिग रहा। मोदी 2.0 के समय शाहीन बाग और देश के अन्य हिस्सों में हुए विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री के संयम और जनहित में लिए गए फैसलों ने एक बार फिर राजनीतिक समीकरण बदल दिए। विपक्ष की बांटो और राज करो की नीति को जनता ने खारिज कर दिया। एक दशक की एंटी इनकंबेंसी के बावजूद मोदी गारंटी का असर साफ तौर पर दिखाई दिया। वर्ष 2024 के आम चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को 240 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए गठबंधन ने 290 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की। इन आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि प्रधानमंत्री की लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई है। इसके बाद महाराष्ट्र, बिहार और बंगाल में मिली रिकॉर्ड जीत ने इस भरोसे को और अधिक पुख्ता कर दिया है।

बदलती राजनीति और नई पीढ़ी के साथ संवाद

वर्तमान में विपक्ष नई पीढ़ी यानी जेन जी के नाम पर प्रधानमंत्री मोदी के विरोध को एक नया स्वरूप देने का प्रयास कर रहा है। इसके जवाब में प्रधानमंत्री ने खुद छात्रों और युवाओं के बीच जाकर यह साझा किया है कि उनके कार्यकाल में देश में क्या बदलाव आए हैं। प्रधानमंत्री स्वयं इंस्टाग्राम और अन्य डिजिटल माध्यमों पर खासी सक्रियता दिखा रहे हैं। पूरी पार्टी और सरकार के मंत्रियों को भी यह निर्देश दिए गए हैं कि बदलते वक्त के साथ वे जनता के बीच जाएं और उनकी ही भाषा एवं शैली में संवाद स्थापित करें। चुनावी राजनीति की जो भी स्थिति हो, यह स्पष्ट है कि 15 साल की सत्ता के बाद 2029 की लड़ाई आसान नहीं होगी। यही कारण है कि अपने जन्मदिन पर किसी भी तरह का जश्न मनाने के बजाय प्रधानमंत्री और पूरी पार्टी ने 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया है।

जब प्रधानमंत्री के रूप में 12 साल पूरे हो रहे हैं, तो यह मूल्यांकन करना आवश्यक हो जाता है कि वास्तविक जमीन पर क्या बदलाव आया है।

गांव और गरीब तक पहुंची योजनाओं की रोशनी

देश में आए वास्तविक बदलावों की बात करें तो कोरोना काल से शुरू हुई 80 करोड़ गरीब जनता को मुफ्त राशन देने की योजना को सरकार ने देश के दूर-दराज के गांवों तक पहुंचाया है। आकांक्षी जिला योजना के तहत सबसे गरीब और पिछड़े सवा सौ जिलों की पहचान करके उनके चहुंमुखी विकास की जिम्मेदारी अधिकारियों को सौंपी गई। सीमावर्ती गांवों तक विकास पहुंचे, इसके लिए सभी मंत्रियों को सीमावर्ती क्षेत्रों के एक-एक गांव में प्रवास करने का निर्देश दिया गया। जन धन योजना के माध्यम से गरीब नागरिकों के बैंक खाते खोले गए और महिलाओं के खातों में सीधे सहायता राशि भेजी गई। पीएम किसान सम्मान निधि के अंतर्गत एक बटन दबाकर करोड़ों किसानों के खातों में राशि ट्रांसफर की गई। आजादी के 70 साल बाद पहली बार यह बदलाव देखा गया है कि कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति तक सरकारी अनुदान और योजनाओं का लाभ सीधे पहुंच रहा है।

महिलाओं के जीवन स्तर में भी अभूतपूर्व सुधार आया है। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। स्वच्छता अभियान के तहत गांवों में शौचालयों का निर्माण अनिवार्य किया गया ताकि महिलाओं को खुले में शौच की समस्या से मुक्ति मिल सके। उज्ज्वला योजना के माध्यम से दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में मुफ्त गैस सिलेंडर पहुंचाए गए ताकि महिलाओं को धुएं से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से छुटकारा मिल सके। प्रधानमंत्री ने कई बार यह उल्लेख किया है कि उन्होंने अपनी मां और परिवार की महिलाओं को धुएं वाले चूल्हे पर खाना बनाते देखा है, और वे देश की हर गरीब मां और बहन को इस कठिनाई से मुक्त करना चाहते थे। इसके साथ ही लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी नई योजनाओं के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के रूप में पदभार कब संभाला था?
नरेंद्र मोदी ने मई 2014 में देश के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन को कितनी सीटों से अधिक पर जीत मिली थी?
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में एनडीए गठबंधन को 290 से अधिक सीटों पर जीत मिली थी।
कोरोना काल से देश के कितने गरीब नागरिकों को मुफ्त राशन देने की योजना चलाई जा रही है?
कोरोना काल से देश की 80 करोड़ गरीब जनता को मुफ्त राशन देने की योजना पहुंचाई जा रही है।
आकांक्षी जिला योजना के तहत कितने पिछड़े जिलों की पहचान की गई है?
आकांक्षी जिला योजना के तहत सवा सौ सबसे गरीब और पिछड़े जिलों की पहचान की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन किस रूप में मनाने का निर्णय लिया गया है?
प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर किसी भी प्रकार का जश्न मनाने के बजाय 17 सितंबर से सेवा पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया गया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·20 मिनट पहले

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारह वर्षों के कार्यकाल का यह विश्लेषण घरेलू राजनीति और अंतरराष्ट्रीय छवि के बड़े बदलावों को रेखांकित करता है। पाकिस्तान संवाददाता के रूप में यह देखना अहम है कि कैसे भारत ने आर्थिक प्राथमिकताओं और वैश्विक मंचों पर अपनी स्थिति को मजबूत किया है, विशेषकर तब जब देश के भीतर और बाहर कई जटिल चुनौतियां मौजूद थीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·45 मिनट पहले

एक अपराध संवाददाता के रूप में मेरा मानना है कि पिछले बारह वर्षों में देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे और कानूनी सुधारों में जो नीतिगत बदलाव आए हैं, उन्होंने अपराधियों पर नकेल कसने में बड़ी भूमिका निभाई है। 2014 से पहले जहां पॉलिसी पैरालिसिस और प्रशासनिक ढिलाई के कारण कानून-व्यवस्था प्रभावित थी, वहीं इस कार्यकाल के दौरान कड़े विधायी कदमों और संगठित अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति ने न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को मजबूत किया है। भविष्य में इस दिशा में आंतरिक सुरक्षा और साइबर अपराध से निपटने के लिए तकनीक आधारित सुरक्षा तंत्र को और अधिक पुख्ता करने की आवश्यकता होगी।

Vikram Yadav@vikram-yadav·41 मिनट पहले

बिहार और देश के क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य में पिछले बारह वर्षों के दौरान आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर आए बदलाव काफी महत्वपूर्ण रहे हैं। संगठित अपराध और वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सख्त प्रशासनिक रुख ने क्षेत्रीय स्तर पर व्यवस्था को सुधारने में मदद की है। हालांकि, बिहार जैसे राज्यों में साइबर अपराध और स्थानीय स्तर पर संगठित गिरोहों की बदलती प्रवृत्ति से निपटने के लिए पुलिस बल के आधुनिकीकरण और खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है।

Ravikash Gupta@ravikash·58 मिनट पहले

इस विश्लेषण में 2014 से पहले के नीतिगत ठहराव और भ्रष्टाचार से निकलकर भारत के वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक रूप से मजबूत होने की यात्रा को गहराई से रेखांकित किया गया है। ब्रिक्स 2026 के सफल आयोजन और महामारी के दौरान वैश्विक स्तर पर निभाई गई राहतकर्ता की भूमिका यह साबित करती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और कूटनीति अब वैश्विक पटल पर एक निर्णायक और आत्मनिर्भर शक्ति के रूप में स्थापित हो चुकी है।

Rohan Verma@rohan-verma·54 मिनट पहले

इस विकास यात्रा का सबसे बड़ा जमीनी असर उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में दिखा है। एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर और लॉजिस्टिक्स हब जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने राज्य को सिर्फ उपभोक्ता बाजार से निकालकर देश के प्रमुख औद्योगिक विकास इंजन में बदल दिया है। ज़मीनी स्तर पर कानून-व्यवस्था में सुधार और बेहतर होती कनेक्टिविटी ने क्षेत्रीय राजनीति और सामाजिक प्राथमिकताओं की धुरी को पूरी तरह से विकासोन्मुख बना दिया है, जिसका सीधा प्रभाव आगामी राजनीतिक और चुनावी दिशा पर पड़ रहा है।

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