भारतीय शेयर बाजार के लिए सितंबर की शुरुआत घरेलू अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों और वैश्विक मोर्चे पर गहराते संकट के बीच एक कड़े इम्तिहान के साथ हुई है। देश की आर्थिक वृद्धि दर ने तमाम अनुमानों को धता बताते हुए शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी बाजारों के कमजोर रुख ने निवेशकों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस महीने घरेलू तेजी और बाहरी जोखिमों के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा।
सोमवार के बाजार के आंकड़े और गिरावट का सिलसिला
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार को प्रमुख सूचकांक लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। निफ्टी 95.25 अंक या 0.39 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 24,080.40 पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स 307.24 अंक या 0.40 प्रतिशत फिसलकर 76,957.27 के स्तर पर आ गया। इस गिरावट में मुख्य रूप से धातु, रियल्टी और आईटी शेयरों ने अगुवाई की, हालांकि इसके विपरीत मझोले शेयरों का मिडकूप सेगमेंट 0.24 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज करने में कामयाब रहा। व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स और एटरनल में सबसे अधिक बिकवाली देखने को मिली।
पश्चिम एशिया का संकट और कच्चे तेल में उछाल
मंगलवार के शुरुआती कारोबार में भी बाजार को कोई खास राहत मिलती नहीं दिख रही है। गिफ्ट निफ्टी 24,188 से 24,200 के दायरे में ट्रेड कर रहा था, जो करीब 60 अंकों की सुस्त शुरुआत का संकेत दे रहा था। पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच हालिया सैन्य संघर्ष के कारण तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। पिछले एक महीने में कच्चा तेल करीब 8 प्रतिशत महंगा हो चुका है और यह 86.57 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है, जिससे पूरे एशियाई बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित हुई है।
पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े और घरेलू अर्थव्यवस्था की स्थिति
इस बीच सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े जारी कर दिए हैं। अप्रैल से जून की अवधि के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत दर्ज की गई, जो भारतीय रिजर्व बैंक के 7 प्रतिशत के अनुमान और रॉयटर के पोल में अर्थशास्त्रियों द्वारा लगाए गए 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से काफी बेहतर है। इस दौरान वास्तविक जीडीपी बढ़कर 81.36 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जो पिछले साल की इसी तिमाही में 75.46 लाख करोड़ रुपये थी।
एलएंडटी फाइनेंस की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी ठाकुर ने कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के चरम के बावजूद पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर एक सकारात्मक आश्चर्य है और अर्थव्यवस्था में रिकवरी की रफ्तार मजबूत बनी हुई है।
विदेशी बाजारों और बॉन्ड यील्ड का प्रभाव
घरेलू मोर्चे के उलट वैश्विक बाजारों में सुस्ती का माहौल है। अमेरिकी शेयर बाजार महीने के आखिरी सत्र में कमजोर बंद हुए, जहां डाउ जोन्स 374 अंक या 0.7 प्रतिशत गिरकर 53,185.90 पर, एसएंडपी 500 सूचकांक 0.33 प्रतिशत फिसलकर 7,686.14 पर और नैस्डैक 0.12 प्रतिशत की हल्की नरमी के साथ 26,370.89 पर बंद हुआ। हालांकि अगस्त के पूरे महीने को देखें तो तीनों प्रमुख अमेरिकी सूचकांकों ने अच्छी बढ़त दर्ज की थी, जिसमें डाउ जोन्स लगातार पांचवें महीने लाभ में रहा। एशियाई बाजारों में भी जापान का निक्केई 225 करीब 0.91 प्रतिशत टूटा, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी और कॉस्डाक दोनों में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई।
कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने वैश्विक रुख पर बात करते हुए बताया कि दुनिया भर में बॉन्ड यील्ड में तेजी इस बात का संकेत है कि बाजार इस साल फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की संभावनाओं को पूरी तरह से तय मान रहा है।
निफ्टी के लिए तकनीकी स्तर और आगे का दृष्टिकोण
तकनीकी मोर्चे पर बात करते हुए विश्लेषकों का कहना है कि यदि निफ्टी 23,975 के महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर टिकने में सफल रहता है, तो मौजूदा स्तरों से एक तेज तकनीकी रिकवरी देखने को मिल सकती है, जिससे यह उछलकर 24,200 से 24,300 के दायरे तक जा सकता है। हालांकि, यदि सूचकांक इस समर्थन स्तर से नीचे फिसलता है, तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और यह 23,850 से 23,800 के स्तर तक नीचे आ सकता है। बाजार के निवेशकों को इस महीने हर एक वैश्विक और घरेलू घटनाक्रम पर पैनी नजर रखनी होगी।



















