केंद्रीय कर्मचारियों के लिए आठवें वेतन आयोग को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। यदि इस नए वेतन आयोग को पिछली किसी तिथि से प्रभावी किया जाता है, तो पे मैट्रिक्स के लेवल 4 से लेकर लेवल 7 तक के कर्मचारियों के खाते में भारी-भरकम एरियर की राशि आ सकती है। हालांकि, यह पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार अंतिम रूप से कौन सा फिटमेंट फैक्टर तय करती है और प्रभावी तिथि से लेकर वास्तविक वेतन संशोधन के बीच कुल कितने महीनों का अंतर रहता है।
अब तक आधिकारिक घोषणा नहीं
सरकार की ओर से आठवें वेतन आयोग के लिए अभी तक आधिकारिक तौर पर फिटमेंट फैक्टर का ऐलान नहीं किया गया है। इसलिए जितने भी आंकड़े या अनुमान सामने आ रहे हैं, वे सब केवल काल्पनिक फिटमेंट फैक्टर पर आधारित हैं। इन्हें किसी भी तरह से पक्के और अंतिम एरियर के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। जब तक सरकार की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक सटीक आंकड़े मिलना असंभव है।
वेतन आयोग में पिछली तिथि से लागू होने का नियम
ऐतिहासिक रूप से देखा जाए तो वेतन आयोगों की सिफारिशें अक्सर उस तारीख से पहले की तिथि से लागू कर दी जाती हैं, जिस तारीख को कर्मचारियों को असल में संशोधित वेतन मिलना शुरू होता है। उदाहरण के लिए, सातवें वेतन आयोग को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी किया गया था, हालांकि बढ़ा हुआ वेतन कर्मचारियों को कुछ समय बाद मिलना शुरू हुआ था।
यदि आठवें वेतन आयोग के मामले में भी यही तरीका अपनाया जाता है, तो कर्मचारियों को उस अवधि के लिए एरियर मिलेगा जो प्रभावी तिथि और वास्तविक कार्यान्वयन के बीच गुजरेगी। यदि यह अंतराल लंबा होता है, तो मिलने वाली एरियर की राशि भी उतनी ही बड़ी होगी, बशर्ते नया वेतनमान पिछली तारीख से लागू हो।
एरियर की बुनियादी गणना का गणित
एरियर की पूरी गणित इस बात पर टिकी होती है कि किसी कर्मचारी के पुराने मूल वेतन और नए संशोधित मूल वेतन के बीच कितना अंतर आ रहा है। सबसे पहले मौजूदा मूल वेतन को तय फिटमेंट फैक्टर से गुना किया जाता है जिससे नया मूल वेतन निकलकर आता है। इसके बाद जो अंतर आता है, उसे उन महीनों की संख्या से गुना किया जाता है जितने समय तक संशोधित वेतन का भुगतान नहीं हुआ हो।
इस अनुमान को समझाने के लिए 20 महीनों की देरी को आधार माना गया है। इसके अलावा 2.00, 2.15, 2.28 और 2.57 के चार संभावित फिटमेंट फैक्टरों को ध्यान में रखकर आकलन किया गया है। चूंकि सरकार ने अभी तक वास्तविक फिटमेंट फैक्टर तय नहीं किया है, इसलिए ये केवल और केवल उदाहरण के तौर पर समझे जाने वाले आंकड़े हैं।
लेवल 4 से लेकर लेवल 7 तक के अनुमानित आंकड़े
पे मैट्रिक्स के लेवल 4 के तहत 25,500 रुपये के मूल वेतन पर विचार करें, तो 2.00 के फिटमेंट फैक्टर के हिसाब से 20 महीनों का एरियर लगभग 5.10 लाख रुपये बन सकता है। यदि सरकार 2.57 का फिटमेंट फैक्टर तय करती है, तो यह आंकड़ा बढ़कर करीब 8.01 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।
लेवल 5 के कर्मचारियों की बात करें तो 29,100 रुपये के मूल वेतन पर यह एरियर 2.00 के फैक्टर के साथ 5.82 लाख रुपये और 2.57 के फैक्टर के साथ लगभग 9.14 लाख रुपये तक हो सकता है। इसी तरह लेवल 6 में 35,400 रुपये के मूल वेतन पर 2.00 फैक्टर के तहत 7.08 लाख रुपये और 2.57 फैक्टर के तहत करीब 11.12 लाख रुपये मिलने का अनुमान लगाया गया है।
लेवल 7 के कर्मचारियों का मूल वेतन 44,900 रुपये माना गया है, जिस पर 2.00 के फिटमेंट फैक्टर के साथ लगभग 8.98 लाख रुपये का एरियर बन सकता है। यदि फिटमेंट फैक्टर 2.57 रहता है, तो यह राशि बढ़कर लगभग 14.10 लाख रुपये तक हो सकती है।
फिटमेंट फैक्टर वह सबसे बड़ा पैमाना होगा जो संशोधित वेतन और संभावित एरियर की पूरी तस्वीर तय करेगा। उच्च फिटमेंट फैक्टर का सीधा मतलब मूल वेतन में बड़ी छलांग है, जिससे कई महीनों के अंतर पर गणना करने पर एरियर की कुल राशि में बहुत बड़ा उछाल आ जाता है।
उदाहरण के लिए, 35,400 रुपये के मूल वेतन वाले लेवल 6 के किसी कर्मचारी को 2.00 के फैक्टर पर 35,400 रुपये की बढ़ोतरी मिलेगी, जबकि 2.57 के फैक्टर पर यह वृद्धि 55,578 रुपये हो जाएगी। यदि इन दोनों परिदृश्यों को 20 महीनों के अंतराल पर देखा जाए, तो दोनों के बीच का अंतर बहुत बड़ा हो जाता है।
कर्मचारियों को यह गलतफहमी नहीं पालनी चाहिए कि उनके पूरे मासिक वेतन को फिटमेंट फैक्टर से गुना किया जाएगा। इस पूरी गणना का मुख्य केंद्र बिंदु केवल मूल वेतन होता है। जहां तक महंगाई भत्ता, मकान किराया भत्ता और परिवहन भत्ते का सवाल है, वे सभी भत्ते पूरी तरह से अलग नियमों के अधीन होते हैं।
महंगाई भत्ते की समीक्षा महंगाई के आंकड़ों के आधार पर समय-समय पर होती है और इसे पूरी प्रतीक्षा अवधि के लिए मूल वेतन के एरियर की तरह नहीं जोड़ा जाता है। मकान किराया भत्ता शहर की श्रेणी और मूल वेतन से जुड़ा होता है, जबकि परिवहन भत्ते के अपने अलग प्रावधान हैं। इन तमाम घटकों का अंतिम स्वरूप सरकार के आधिकारिक नियमों पर ही निर्भर करेगा।


















