हिन्दू कैलेंडर का छठा महीना भाद्रपद अब शुरू हो चुका है, जिसे आम बोलचाल में भादों के नाम से भी जाना जाता है। इस मास का नाम भाद्रपद नक्षत्र के आधार पर रखा गया है और धार्मिक दृष्टिकोण से इसे बेहद पवित्र तथा महत्वपूर्ण माना जाता है। यह महीना सामान्य तौर पर अगस्त के मध्य से लेकर सितंबर के मध्य तक चलता है। सावन के ठीक बाद आने वाले इस कालखंड में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी, गणेश चतुर्थी, हरतालिका तीज और ऋषि पंचमी जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं। मान्यता है कि इस अवधि में नियम-संयम से पूजा-पाठ, व्रत और दान-पुण्य करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा शास्त्रों और पारंपरिक मान्यताओं में इस पूरे महीने के दौरान खान-पान को लेकर भी कुछ सख्त नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से कई तरह के शारीरिक रोगों और परेशानियों से बचाव होता है।
भाद्रपद मास के दौरान किस तरह का भोजन करना चाहिए, इस पर गौर करें तो इस समय मौसम में बदलाव का दौर शुरू हो जाता है। लगातार बारिश और उमस भरे वातावरण के कारण मानव शरीर का पाचन तंत्र भी प्रभावित हो सकता है। यही कारण है कि इस समयावधि में ऐसा आहार लेने की सलाह दी जाती है जो हल्का हो, ताज़ा बना हो और पेट में आसानी से पच जाए। अपने रोजाना के खान-पान में घर का बना हुआ सादा भोजन, मूंग की दाल, अरहर की दाल और शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी शामिल करना फायदेमंद रहता है। इसके साथ ही टमाटर का सूप, अदरक, प्याज और लहसुन का सेवन किया जा सकता है। बेसन से बनी चीजें, हलवा, पारंपरिक काढ़ा और हल्दी वाला दूध पीना भी इस दौरान स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना गया है। जो लोग इस महीने व्रत रखते हैं, वे अपनी पारिवारिक परंपराओं के अनुसार फल, दूध, दही, मखाना, साबूदाना, कुट्टू के आटे या सिंघाड़े के आटे से तैयार व्यंजन खा सकते हैं। इन सब के साथ सेब, केला, अनार और नाशपाती जैसे ताजे मौसमी फल खाना सेहत के लिए बेहतर विकल्प है। हालांकि यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भोजन बहुत अधिक तला-भुना या मसालेदार न हो और इस बरसात के मौसम में साफ-सफाई का विशेष प्रबंध रखा जाए।
दूसरी ओर, भाद्रपद मास में कुछ खास चीज़ों के सेवन से सख्ती से बचने की सलाह दी जाती है ताकि सेहत दुरुस्त रहे और धार्मिक नियमों का भी पालन हो सके। इस महीने पूरी तरह सात्विक भोजन करने पर जोर दिया जाता है और अधिकांश परिवारों में मांस, मदिरा तथा किसी भी तरह के तामसिक भोजन का त्याग किया जाता है। इसके अतिरिक्त बहुत अधिक तेल में तले हुए खाद्य पदार्थ, बासी खाना या फिर लंबे समय से स्टोर करके रखे गए भोजन को खाने से बचना चाहिए। बारिश के इन दिनों में दूषित पानी और संक्रमण फैलाने वाले खाद्य पदार्थों की वजह से पेट से जुड़ी गंभीर बीमारियां होने का खतरा काफी हद तक बढ़ जाता है, इसलिए बाहर मिलने वाले अस्वच्छ स्ट्रीट फूड से भी पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। धार्मिक और स्वास्थ्य संबंधी मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद के दौरान मांस, शहद, गुड़, हरी सब्जियां और मूली खाने से परहेज करना चाहिए।
सब्जियों और दालों के मामले में इस महीने विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है। भादों के महीने में सब्जियों में खासतौर पर बैंगन खाने से मना किया जाता है क्योंकि इस मौसम में बैंगन में कीड़े होने की आशंका रहती है और इसके सेवन से पेट में गैस या अपच की समस्या पैदा हो सकती है। इसके अलावा इस पूरे मास में नारियल के तेल के इस्तेमाल से भी बचने की परंपरा है। इस दौरान किसी भी तरह की ठंडी या बासी चीज को खाने से दूर रहें तथा आइसक्रीम और ठंडी कोल्ड ड्रिंक्स पीने से बिल्कुल परहेज करें। चुकंदर, खीरा और ककड़ी जैसी चीजों को भी इस महीने खाने में शामिल नहीं करना चाहिए और पिज़्ज़ा-बर्गर जैसे फास्ट फूड से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। बारिश के मौसम के चलते इस अवधि में हरी पत्तेदार सब्जियों के साथ-साथ तरबूज खाने से भी बचना चाहिए। सब्जियों के साथ-साथ इस पूरे मास में मसूर की दाल और चने की दाल का सेवन करने की भी मनाही होती है। हालांकि, खान-पान से जुड़े ये तमाम नियम अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों, परिवारों और व्रत रखने की व्यक्तिगत परंपराओं के आधार पर भिन्न हो सकते हैं, इसलिए किसी भी नियम का पालन करते समय अपनी पारिवारिक परंपरा को ही सबसे पहले प्राथमिकता देनी चाहिए।



















