अगर आपके शॉप ऐप में किसी ऐसी खरीदारी की रसीद दिख जाए जो आपने की ही नहीं, तो तुरंत सतर्क हो जाइए। ठगों ने एक नया तरीका निकाला है, जिसमें वे यूजर्स की ऑर्डर हिस्ट्री में फर्जी ऑर्डर डाल देते हैं। ये फर्जी बिल देखने में ऐपल, नॉर्टन और पेपाल जैसी भरोसेमंद कंपनियों की तरफ से आए हुए लगते हैं, लेकिन असल में यह एक सोची-समझी कॉलबैक फिशिंग साजिश का हिस्सा है।
इस पूरे खेल का मकसद आपको डराकर या उलझाकर एक नंबर पर कॉल कराना है। इसलिए सबसे पहली और सबसे जरूरी बात यही है कि ऐसी किसी भी अनजान खरीदारी के साथ दिए गए फोन नंबर या ईमेल पर संपर्क बिल्कुल न करें।
कैसे काम करता है यह फर्जीवाड़ा
इन फर्जी रसीदों के साथ ठग एक ईमेल पता या फोन नंबर भी लिख देते हैं और दावा करते हैं कि अगर आपको इस खरीदारी पर आपत्ति है तो यहां संपर्क करें। जैसे ही कोई घबराया हुआ यूजर उस नंबर पर कॉल करता है, दूसरी तरफ मौजूद ठग खुद को कंपनी का सपोर्ट एजेंट बताकर बात करने लगते हैं।
यहीं से असली ठगी शुरू होती है। ये लोग बातों में उलझाकर आपसे लॉगिन आईडी और पासवर्ड, क्रेडिट कार्ड की जानकारी या ऑथेंटिकेशन कोड जैसी संवेदनशील चीजें उगलवाने की कोशिश करते हैं। कई मामलों में वे यूजर को कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के लिए भी उकसाते हैं, जो असल में मैलवेयर होता है। यह मैलवेयर इंस्टॉल होते ही ठगों को आपके डिवाइस का रिमोट एक्सेस दे देता है, यानी वे दूर बैठे आपके फोन या कंप्यूटर पर नियंत्रण पा सकते हैं।
आपकी शॉप हिस्ट्री में ऑर्डर आते कहां से हैं
यह समझना जरूरी है कि शॉप ऐप की हिस्ट्री में ऑर्डर दिखते कैसे हैं। यह ऐप उन ऑर्डर को ट्रैक करता है जिनका भुगतान शॉप पे से हुआ हो और जो शॉपिफाई इस्तेमाल करने वाली दुकानों से खरीदे गए हों, बशर्ते चेकआउट के वक्त आपने वही ईमेल डाला हो जो आपके शॉप अकाउंट से जुड़ा है।
इसके अलावा यह ऐप जीमेल और आउटलुक के मेल भी स्कैन करता है। यह "ट्रैकिंग नंबर" और "ट्रैक योर पैकेज" जैसे शब्दों को ढूंढकर डिलीवरी की जानकारी खींच लेता है। यही वजह है कि आपको ऐसे पेंडिंग पार्सल भी दिख सकते हैं जो असल में शॉप के दायरे से बाहर कहीं और से मंगाए गए थे।
अब तक क्या साफ नहीं है
अभी तक यह साफ नहीं हो पाया है कि ठग आखिर यूजर्स की हिस्ट्री में ये फर्जी ऑर्डर डाल कैसे रहे हैं। इस बात का भी कोई सबूत नहीं है कि शॉप, शॉपिफाई या जिन कंपनियों के नाम का गलत इस्तेमाल हो रहा है, उनमें से किसी का सिस्टम हैक हुआ हो। शॉप की तरफ से सिर्फ इतना कहा गया है कि वह इस समस्या को रोकने के लिए "नए कंट्रोल" लागू कर रहा है।
खुद को कैसे बचाएं
सबसे बड़ा नियम यह है कि किसी अनजान खरीदारी की रसीद को अपने आप सही मत मान लीजिए, चाहे वह शॉप ऐप में दिखे या आपके ईमेल में। सबसे पहले अपने बैंक और क्रेडिट कार्ड के स्टेटमेंट जांचिए, साथ ही जिस दुकान या कंपनी का नाम बिल में लिखा है, वहां अपने अकाउंट की हिस्ट्री भी देखिए कि क्या सचमुच ऐसी कोई खरीदारी हुई है।
अगर आपको ऐसी कोई मैचिंग खरीदारी नहीं मिलती, तो लगभग तय मानिए कि वह बिल खुद एक ठगी है। ऐसे में उससे किसी भी तरह का लेनदेन न करें। न उस नंबर पर फोन करें, न कोई ईमेल भेजें और न ही उसमें दिए किसी लिंक पर क्लिक करें।











