शनिवार, 4 जुलाई को नागालैंड की तीन बड़ी बंपर लॉटरी का ड्रॉ निकाला जा रहा है, जो संबद लॉटरी का हिस्सा हैं। इन तीनों का ड्रॉ अलग-अलग समय पर होता है, दोपहर 1 बजे, शाम 6 बजे और रात 8 बजे। तीनों ही लॉटरी में पहला इनाम जीतने वाले को 1 करोड़ रुपये मिलेंगे। दूसरा इनाम 9,000 रुपये और तीसरा इनाम 450 रुपये का है, जबकि सांत्वना पुरस्कार के तौर पर 1,000 रुपये दिए जाते हैं।
इन तीनों ड्रॉ को डियर विजन मॉर्निंग (दोपहर 1 बजे), डियर एलीट इवनिंग (शाम 6 बजे) और डियर लकी नाइट (रात 8 बजे) के नाम से जाना जाता है।
तीनों लॉटरी का इनामी ढांचा
तीनों ही लॉटरी में इनाम की रकम एक जैसी रखी गई है। पहला इनाम 1 करोड़ रुपये, सांत्वना पुरस्कार 1,000 रुपये, दूसरा इनाम 9,000 रुपये, तीसरा इनाम 450 रुपये, चौथा इनाम 250 रुपये और पांचवां इनाम 120 रुपये का है। यही ढांचा डियर विजन मॉर्निंग, डियर एलीट इवनिंग और डियर लकी नाइट, तीनों पर लागू होता है।
पुराने नाम अब बदल चुके हैं
पहले इन लॉटरियों के नाम कुछ और हुआ करते थे। डियर विजन को पहले डियर नर्मदा कहा जाता था, जबकि डियर एलीट और डियर लकी को डियर डोनर और डियर स्टॉर्क के नाम से पहचाना जाता था। नाम भले ही बदल गए हों, लेकिन इनकी इनामी रकम और नियम पहले जैसे ही बने हुए हैं।
पांच दशक पुरानी है यह लॉटरी
नागालैंड राज्य पिछले पांच दशकों से भी ज्यादा समय से कानूनी रूप से साप्ताहिक और बंपर लॉटरी चला रहा है। इसकी शुरुआत 1972 में हुई थी। यह लॉटरी नागालैंड राज्य के स्वामित्व और नियंत्रण में चलती है। इसे चलाने, नियमन करने, निगरानी रखने और वित्तपोषण करने का काम नागालैंड राज्य ही करता है।
लॉटरी की जीत पर कितना टैक्स
लॉटरी में जीती गई रकम पर टैक्स लगता है, क्योंकि यह अन्य स्रोतों से आय की श्रेणी में आती है। भारत में लॉटरी पर टैक्स इस तरह लगता है:
- फ्लैट टैक्स दर: 10,000 रुपये से ज्यादा की लॉटरी जीत पर सीधे 30 प्रतिशत की एक समान दर से टैक्स लगता है।
- हेल्थ और एजुकेशन सेस: टैक्स की रकम पर 4 प्रतिशत का सेस भी जुड़ता है, जिससे प्रभावी टैक्स दर 31.2 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।
- सरचार्ज: अगर जीत एक तय सीमा से ऊपर चली जाए, तो उस पर सरचार्ज भी लग सकता है, जिससे कुल टैक्स दर और बढ़ जाती है।
यह टैक्स दर सभी लॉटरी विजेताओं पर एक जैसी लागू होती है, चाहे जीती गई रकम कितनी भी हो या विजेता की आय का स्तर कुछ भी हो। इसके उलट, भारत में सामान्य आय पर प्रोग्रेसिव तरीके से टैक्स लगता है, यानी जितनी ज्यादा आय, उतनी ज्यादा टैक्स दर। लेकिन लॉटरी की जीत पर यह व्यवस्था लागू नहीं होती, इस पर रकम चाहे जो हो, एक समान फ्लैट दर से ही टैक्स वसूला जाता है।













