घर बेचते वक्त हर मकान मालिक यही चाहता है कि उसे ज़्यादा से ज़्यादा रकम मिले। एक नई रिपोर्ट बताती है कि इसके लिए बड़े रिनोवेशन की ज़रूरत नहीं, बल्कि एक अहम जानकारी को बिक्री लिस्टिंग में शामिल करना काफी हो सकता है। अगर आपके घर में हीट पंप सिस्टम लगा है और उसका ज़िक्र लिस्टिंग में नहीं है, तो आप हज़ारों डॉलर गंवा रहे हैं।
रिपोर्ट में क्या निकला?
यह रिपोर्ट तीन संस्थाओं ने मिलकर तैयार की है: एनर्जी ट्रांज़िशन में उपभोक्ता व्यवहार का अध्ययन करने वाली नॉनप्रॉफिट संस्था स्मार्ट एनर्जी कंज़्यूमर कोलैबोरेटिव; ठेकेदारों, यूटिलिटी कंपनियों और अन्य के लिए अमेरिकी रेज़िडेंशियल प्रॉपर्टी का डेटा तैयार करने वाला कस्टमर इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म 257; और ट्रेड ग्रुप नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स। इन तीनों के संयुक्त विश्लेषण में 2024 से 2025 के बीच अमेरिका में डक्टेड हीट पंप वाले पांच लाख से ज़्यादा घरों की बिक्री के आंकड़े शामिल थे।
नतीजा बिल्कुल स्पष्ट था। जिन घरों की लिस्टिंग में हीट पंप का उल्लेख था, उनकी बिक्री कीमत बाकी घरों की तुलना में 0.6 प्रतिशत से 1 प्रतिशत ज़्यादा रही। अमेरिका में मकानों की औसत बिक्री कीमत 399,000 डॉलर के आधार पर देखें तो यह बढ़त 2,300 डॉलर से 3,900 डॉलर तक बनती है।
257 के सह-संस्थापक और CEO स्कॉट रोज़नबर्ग इस रकम को संदर्भ में रखते हुए कहते हैं, "4,000 डॉलर के करीब की रकम घर की बिक्री में बड़ी नहीं लगती। लेकिन यह दरअसल हीट पंप लगाने में जो पैसा खर्च हुआ, उसका एक अच्छा-खासा हिस्सा वापस दिला देती है।"
खर्च और बचत का हिसाब
2026 में एनर्जी मार्केटप्लेस एनर्जीसेज के अनुसार एक डक्टेड हीट पंप सिस्टम की औसत कीमत करीब 15,400 डॉलर है। हालांकि इलाके, घर के आकार, इलेक्ट्रिकल सर्विस और स्थानीय ठेकेदार के हिसाब से यह कीमत काफी बदल सकती है। होम सर्विसेज़ प्लेटफॉर्म अंगी के मुताबिक एक गैस फर्नेस और सेंट्रल AC का संयुक्त सिस्टम इससे लगभग आधे दाम पर मिलता है। लिस्टिंग में हीट पंप का उल्लेख करने से मिलने वाली अतिरिक्त रकम मूल लागत का 15 प्रतिशत से 25 प्रतिशत तक वापस दिला सकती है।
हीट पंप का फायदा सिर्फ बिक्री कीमत तक सीमित नहीं है। यह सिस्टम गर्मी और ठंडक दोनों एक ही यूनिट से देता है और पारंपरिक गैस या तेल से चलने वाले फर्नेस के मुकाबले दो से चार गुना ज़्यादा ऊर्जा-कुशल है। इसमें दहन की प्रक्रिया नहीं होती, इसलिए कोई ज़हरीला उत्सर्जन नहीं होता, कार्बन मोनोऑक्साइड के ज़हर का खतरा नहीं रहता और जलवायु परिवर्तन में इसका योगदान भी नहीं होता। लंबे समय में मासिक यूटिलिटी बिल में भी बचत होती है।
रोज़नबर्ग का मानना है कि ज़्यादातर मकान मालिकों के फैसलों में आर्थिक सोच सबसे ऊपर रहती है। उन्होंने कहा, "कोई भी जब गैरेज बनवाता है, बाथरूम सुधारता है या किचन रिनोवेट करता है, तो सबसे पहले यही सोचता है कि क्या यह पैसा वापस मिलेगा?" डेटा अब यह साफ कर रहा है कि हीट पंप के मामले में जवाब हां है।
विश्लेषण का तरीका क्या था?
रोज़नबर्ग इन नतीजों को लेकर आश्वस्त हैं क्योंकि उनकी टीम ने बेहद पक्का तरीका अपनाया। 257 ने एक मशीन लर्निंग तकनीक का इस्तेमाल किया जिसमें सैकड़ों विशेषताओं के आधार पर लगभग एक जैसे घरों को एक ग्रुप में रखा गया। फिर उन ग्रुप के अंदर देखा गया कि जिन घरों की लिस्टिंग में हीट पंप का उल्लेख था और जिनमें नहीं था, उनकी बिक्री कीमत में क्या अंतर था।
यह तरीका ज़रूरी इसलिए था क्योंकि हर घर अलग होता है। लोग घर के फ्लोर प्लान, नज़ारे और आस-पास के माहौल के लिए भी अलग-अलग कीमत चुकाने को तैयार रहते हैं। लगभग एक जैसे घरों की तुलना करके यह सुनिश्चित किया गया कि कीमत का फर्क सिर्फ लिस्टिंग में हीट पंप के उल्लेख की वजह से है।
पुरानी स्टडी में और भी बड़ा फायदा दिखा था
यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड की इकोनॉमिक्स प्रोफेसर युएमिंग 'लूसी' क्यू ने नई रिपोर्ट को "बेहद मूल्यवान" बताया और कहा, "मुझे सच में खुशी है कि यह आई।" क्यू ने खुद कुछ साल पहले एक छोटे भौगोलिक स्तर पर इसी विषय पर शोध किया था।
2020 में पीयर-रिव्यूड जर्नल नेचर एनर्जी में उनकी और उनके सहयोगियों की एक स्टडी प्रकाशित हुई थी। इसमें 2000 से 2018 के बीच 23 राज्यों में हुई घरों की बिक्री के आंकड़े शामिल थे।
उनका तरीका नई रिपोर्ट से अलग था। उन्होंने उन घरों पर ध्यान केंद्रित किया जो हीट पंप लगाने से पहले और बाद में दोनों बार बिके थे। फिर महंगाई के हिसाब से समायोजित बिक्री कीमतों की तुलना उन घरों से की गई जिनमें हीट पंप नहीं लगाया गया था। नतीजा यह निकला कि हीट पंप वाले घर 4 प्रतिशत से 7 प्रतिशत यानी 10,400 से 17,000 डॉलर ज़्यादा में बिके। यह आंकड़ा उस समय की औसत घर कीमत 240,000 डॉलर पर आधारित है।
यह नई रिपोर्ट की तुलना में काफी बड़ा आंकड़ा है, लेकिन दोनों स्टडी के सवाल अलग-अलग थे। क्यू की टीम ने पूछा: हीट पंप की असली कीमत क्या है? जबकि 257 ने पूछा: जब घर में हीट पंप पहले से हो, तो लिस्टिंग में उसका ज़िक्र करने से क्या फर्क पड़ता है?
रोज़नबर्ग ने साफ कहा, "हम एनर्जी एफिशिएंसी का केस नहीं बना रहे थे, बल्कि यह जानना चाहते थे कि एक बार लग जाने के बाद क्या इसे बाज़ार में महत्व मिलता है।" क्यू चाहती हैं कि 257 उनकी स्टडी के तरीके से डेटा के एक हिस्से का फिर से विश्लेषण करे ताकि दोनों के नतीजों की मज़बूत तुलना हो सके।
रियल एस्टेट एजेंटों की जानकारी की कमी एक बड़ी बाधा
स्टडी का एक चौंकाने वाला पहलू यह है कि हीट पंप वाले घरों में से सिर्फ 8 प्रतिशत की लिस्टिंग में इस सिस्टम का उल्लेख होता है। यानी 92 प्रतिशत मामलों में यह जानकारी खरीदार तक पहुंचती ही नहीं।
नेशनल एसोसिएशन ऑफ रियल्टर्स में बिजनेस और कंज़्यूमर रिसर्च के निदेशक मैट क्रिस्टोफर्सन कहते हैं कि घर खरीदने वाले अब एजेंटों से एनर्जी-एफिशिएंट अपग्रेड के बारे में ज़्यादा सवाल करने लगे हैं। इसकी वजह सिर्फ पर्यावरण की चिंता नहीं, बल्कि मासिक यूटिलिटी बिल पर नियंत्रण रखने की इच्छा भी है।
लेकिन सर्वे में सामने आया कि आधे से ज़्यादा रियल्टर्स ने कहा कि वे हीट पंप के फायदे ग्राहकों को समझाने में खुद को "बहुत आत्मविश्वास के साथ नहीं" या "बिल्कुल आत्मविश्वास नहीं" की स्थिति में पाते हैं। यह जानकारी का अंतर सीधे तौर पर लिस्टिंग की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
एक सकारात्मक चक्र की उम्मीद
रोज़नबर्ग को यकीन है कि अगर रियल एस्टेट एजेंट यह समझ लें कि खरीदार हीट पंप वाले घर के लिए ज़्यादा कीमत देने को तैयार हैं और वे लिस्टिंग में इसे प्रमुखता से रखें, तो इसका एक बड़ा सकारात्मक असर होगा। उनके शब्दों में, "यह एक ऐसा सकारात्मक चक्र बनाएगा जो खरीदारों को संकेत देगा कि यह कुछ ऐसा है जिस पर उन्हें ध्यान देना चाहिए।"
जितने ज़्यादा एजेंट हीट पंप का उल्लेख करेंगे, उतने ज़्यादा खरीदार इसे उम्मीद के साथ देखेंगे और इसकी मांग बढ़ती जाएगी। जो मकान मालिक अभी यह तय नहीं कर पा रहे कि हीट पंप लगाना सही निवेश है या नहीं, उनके लिए यह रिपोर्ट एक स्पष्ट संकेत है कि यह उपकरण पर्यावरण और सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी एक समझदार फैसला है।













