केवल अधिक वेतन पाने मात्र से कोई व्यक्ति अमीर नहीं बन जाता है। असली अंतर इस बात से पैदा होता है कि आप अपनी कुल कमाई का कितना हिस्सा बचाते हैं, उसे किन जगहों पर निवेश करते हैं और अपने रोजमर्रा के खर्चों का प्रबंधन किस प्रकार करते हैं। बहुत से लोग ऐसे हैं जो मोटी तनख्वाह मिलने के बावजूद हर महीने के आखिरी दिनों में तंगी की शिकायत करते हैं, जबकि इसके विपरीत कुछ लोग सीमित आय में भी धीरे-धीरे मजबूत वित्तीय स्थिति बना लेते हैं। हैदराबाद के चार्टर्ड अकाउंटेंट अखिल कंचारला के मुताबिक, लंबे समय तक टिकने वाली संपत्ति बनाने वाले लोगों की जीवनशैली में कुछ विशिष्ट आदतें शामिल होती हैं। यदि इन आदतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया जाए, तो पैसों को सहेजने और बढ़ाने के तरीकों में क्रांतिकारी सुधार लाया जा सकता है।
पहले बचत करें और फिर खर्च की योजना बनाएं
अधिकांश लोग सामान्यतः यह गलती करते हैं कि वे सबसे पहले महीने भर के जरूरी और शौक के खर्च पूरे करते हैं, और महीने के अंत में जो थोड़ा-बहुत पैसा बचता है उसे बचाने की सोचते हैं। लेकिन जो लोग अपनी वित्तीय स्थिति को बुद्धिमानी से संभालते हैं, वे इस प्रक्रिया को बिल्कुल उल्टा कर देते हैं। जैसे ही उनके खाते में वेतन आता है, वे बचत या निवेश के लिए एक तयशुदा राशि सबसे पहले अलग निकाल लेते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी व्यक्ति का मासिक वेतन 1 लाख रुपये है, तो वह 20 से 30 हजार रुपये तुरंत सुरक्षित निवेश या बचत के नाम पर अलग कर सकता है। इसके बाद जो शेष राशि बचती है, उससे घर के अन्य जरूरी खर्चों का प्रबंधन किया जाता है।
नियमित निवेश को प्राथमिकता दें और जल्दबाजी से बचें
दौलत बढ़ाने के लिए हर बार किसी एक ही जगह से भारी-भरकम रिटर्न हासिल करने की कोशिश करना आवश्यक नहीं होता है। इसके बजाय, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है कि आप अपनी व्यक्तिगत जरूरतों और लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए लगातार निवेश करते रहें। इस उद्देश्य के लिए कर्मचारी भविष्य निधि, लोक भविष्य निधि, म्यूचुअल फंड, राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली या बॉन्ड जैसे विकल्पों पर गंभीरता से विचार किया जा सकता है। शेयर बाजार में गिरावट आने पर घबराकर अपने निवेश को बीच में ही रोकना बुद्धिमानी नहीं है, बल्कि इसके लिए हमेशा एक लंबा दृष्टिकोण रखना जरूरी होता है। केवल इस आधार पर किसी योजना में पैसा न झोंक दें कि उसने हाल ही में शानदार रिटर्न दिया है, बल्कि कोई भी वित्तीय फैसला लेते समय अपने जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश की समयावधि और तय लक्ष्यों को जरूर परखें।
आय बढ़ने पर अपने खर्चों में बेतहाशा बढ़ोतरी न करें
जैसे ही किसी व्यक्ति की सैलरी में इजाफा होता है, यदि उसके खर्चे भी उसी अनुपात में तेजी से बढ़ने लगें, तो बढ़ी हुई कमाई का कोई खास फायदा नजर नहीं आता है। इस स्थिति को जीवनशैली में अत्यधिक बढ़ोतरी के रूप में देखा जा सकता है। मान लीजिए कि किसी कर्मचारी की आय 50 हजार रुपये से बढ़कर 80 हजार रुपये हो जाती है, तो उस पूरी अतिरिक्त राशि को महंगे शौक या विलासिता की चीजों पर उड़ाने के बजाय उसका एक बड़ा हिस्सा बचाया और निवेश किया जाना चाहिए। उदाहरण के लिए, 30 हजार रुपये की अतिरिक्त बढ़ी हुई कमाई में से केवल 10 हजार रुपये अपनी जीवनशैली पर खर्च करके शेष 20 हजार रुपये को सुरक्षित निवेश में लगाया जा सकता है।
बीमे को निवेश का साधन नहीं बल्कि वित्तीय सुरक्षा मानें
अपनी कमाई और निवेश को बढ़ाने के साथ-साथ पैसों को किसी भी संभावित जोखिम से सुरक्षित रखना भी उतना ही अनिवार्य है। एक अच्छा हेल्थ इंश्योरेंस किसी गंभीर बीमारी के इलाज या अस्पताल के भारी खर्च के समय आपकी संचित बचत पर पड़ने वाले दबाव को काफी हद तक कम कर सकता है। वहीं दूसरी ओर, यदि आपके परिवार के सदस्य आपकी आय पर पूरी तरह से निर्भर हैं, तो एक उपयुक्त लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी आपके प्रियजनों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर सकती है। आपको कितने वित्तीय कवर की आवश्यकता है, इसका निर्धारण परिवार के कुल खर्चों, मौजूदा कर्जों और भविष्य की तमाम जिम्मेदारियों का आकलन करके करना चाहिए। बीमा का मुख्य उद्देश्य पैसे को कई गुना बढ़ाना नहीं, बल्कि संकट के समय परिवार को मजबूत आर्थिक संबल देना है।
साल में कम से कम एक बार अपने पैसों का पूरा रिव्यू करें
केवल किसी निवेश योजना की शुरुआत कर देना ही पर्याप्त नहीं होता है। समय बीतने के साथ आपकी आय, खर्चे, परिवार के प्रति उत्तरदायित्व और वित्तीय लक्ष्य लगातार बदलते रहते हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि वर्ष में कम से कम एक बार अपने संपूर्ण धन और निवेश की समीक्षा की जाए। इस वार्षिक समीक्षा के दौरान अपने खर्चों, निवेश पोर्टफोलियो, लिए गए कर्जों, बीमा पॉलिसियों, आपातकालीन फंड, टैक्स प्लानिंग और रिटायरमेंट योजनाओं का बारीकी से आकलन करें। यह भी जरूर जांच लें कि आपके पुराने निवेश आज के समय में भी आपके वर्तमान लक्ष्यों के अनुकूल हैं या नहीं। समय पर समीक्षा करने से आपको अपने बेकार के खर्चों पर लगाम लगाने और जरूरी बदलाव करने का बेहतरीन अवसर मिल जाता है।
इन वित्तीय आदतों का वास्तविक लाभ तभी प्राप्त हो सकता है जब इन्हें पूरी ईमानदारी और अनुशासन के साथ लंबी अवधि तक अपनाया जाए। हर महीने की थोड़ी सी बचत और लगातार किया जाने वाला निवेश समय बीतने के साथ चक्रवृद्धि ब्याज के सिद्धांत के कारण एक बहुत बड़ी रकम में तब्दील हो जाता है। यही कारण है कि दौलत का पहाड़ खड़ा करने के लिए केवल अधिक कमाई करना ही एकमात्र शर्त नहीं है। अपनी कमाई का सही दिशा में इस्तेमाल करना, खर्चों पर कड़ा नियंत्रण रखना, नियमित रूप से निवेश करना और लंबे समय तक धैर्य बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।


















