घरेलू कमोडिटी एक्सचेंज में सोने और चांदी के वायदा भाव में लगातार भारी गिरावट देखी जा रही है। रिकॉर्ड ऊंचाई को छूने के बाद दोनों कीमती धातुओं के दाम लगातार नीचे आ रहे हैं। 23 अक्टूबर 2026 को बाजार में बिकवाली के भारी दबाव के चलते चांदी फिसलकर लगभग 1.94 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर आ पहुंची। इसी प्रकार, सोने के वायदा भाव में भी गिरावट दर्ज की गई और 10 ग्राम सोने का भाव घटकर 1.42 लाख रुपये के पास आ गया। साल 2026 में यह पहला मौका है जब चांदी का भाव घटकर 2 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आंकड़े से नीचे आया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में चांदी इस मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे कारोबार कर रही थी।
दो महीने के भीतर भारी गिरावट के आंकड़े
पिछले दो महीनों के कारोबार पर नजर डालें तो सर्राफा बाजार में कीमती धातुओं की कीमतों में भारी सेंध लगी है। बीते 60 दिनों के दौरान चांदी करीब 54,000 रुपये प्रति किलो तक सस्ती हो चुकी है, जबकि सोने की कीमतों में लगभग 22,000 रुपये प्रति 10 ग्राम की बड़ी कटौती दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि 24 अगस्त को सोने का भाव 1.64 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपरी स्तर पर था, जो 23 अक्टूबर को MCX पर गिरकर 1,41,935 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, 24 अगस्त को चांदी का वायदा कारोबार 2.48 लाख रुपये प्रति किलो से ऊपर चल रहा था, जो घटकर 23 अक्टूबर को 1.94 लाख रुपये के आसपास आ गया।
शहरों में खुदरा रेट और वायदा बाजार का अंतर
शुक्रवार के शुरुआती कारोबारी सत्र में MCX पर सोने का भाव लुढ़ककर 1,41,935 रुपये प्रति 10 ग्राम तक नीचे चला गया। ध्यान देने वाली बात यह है कि यह भाव वायदा बाजार का बेंचमार्क रेट है। देश के अलग-अलग राज्यों और शहरों में 24 कैरेट सोने का खुदरा बाजार मूल्य इससे भिन्न हो सकता है। स्थानीय स्तर पर लागू होने वाले राज्य कर, चुंगी, जीएसटी, माल ढुलाई के खर्च और ज्वेलर्स के अपने मेकिंग चार्ज के कारण शहर-दर-शहर खुदरा रेट में अंतर आता है। इसलिए ग्राहकों और निवेशकों को कोई भी खरीदारी करने से पहले अपने स्थानीय ज्वेलरी स्टोर या स्थानीय सर्राफा एसोसिएशन से 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट सोने का ताजा भाव जान लेना चाहिए।
कच्चा तेल और वैश्विक वजहें क्यों डाल रही हैं दबाव?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में दिख रही कमजोरी ने भारतीय वायदा बाजार पर भी असर डाला है। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष के कारण कच्चे तेल के दामों में अप्रत्याशित उछाल आया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव उछलकर लगभग 114 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड ने 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर लिया। महंगे कच्चे तेल से वैश्विक अर्थव्यवस्था में महंगाई बढ़ने का जोखिम गहरा गया है। जब महंगाई बढ़ती है, तो अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेड द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखने या फिर उनमें वृद्धि करने की संभावना प्रबल हो जाती है।
डॉलर और बॉन्ड यील्ड का बुलियन मार्केट पर असर
ऊंची ब्याज दरों के माहौल में निवेशक सोने और चांदी जैसे बिना ब्याज वाले सुरक्षित परिसंपत्तियों के बजाय अमेरिकी डॉलर और सरकारी बॉन्ड की ओर रुख करते हैं। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती आने और डॉलर के मजबूत होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं के प्रति निवेशकों का आकर्षण कम हो जाता है, जिससे वैश्विक मांग घटती है और कीमतों पर लगातार बिकवाली का दबाव बनता है।
आगामी दिनों में सोने-चांदी की चाल कैसी रहेगी?
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में सोने और चांदी के भाव किस दिशा में जाएंगे, यह पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार की चाल, कच्चे तेल के रुख, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेड के ब्याज दरों पर फैसलों पर निर्भर करेगा। हालिया भारी गिरावट के बावजूद यह कहना मुश्किल है कि कीमतें यहां से और नीचे जाएंगे या वापस रिकवरी करेंगी। इस कारण आम खरीदारों और दीर्घकालिक निवेशकों को जल्दबाजी में बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए और अपनी आवश्यकताओं का आकलन करके ही बाजार में कदम बढ़ाना चाहिए।



















