गांवों और छोटे शहरों में अक्सर लोगों के पास काफी खुली छत या विस्तृत खाली जमीन उपलब्ध होती है। सौर ऊर्जा को लेकर बढ़ती जागरूकता के बीच कई लोगों के मन में यह विचार आता है कि वे अपनी विशाल छत पर जरूरत से कहीं अधिक क्षमता वाले सोलर पैनल लगवा लें। ऐसा करने के पीछे उनकी मंशा यह होती है कि अपने घर की दैनिक जरूरतें पूरी करने के बाद जो अतिरिक्त बिजली बचे, उसे वे अपने आस-पड़ोस के घरों या गांव के अन्य परिवारों को बेच दें। लेकिन बिजली वितरण से जुड़े आधिकारिक प्रावधान इस तरह की निजी खरीद-फरोख्त को लेकर बेहद स्पष्ट और सख्त हैं।
सीधे पड़ोसियों को सौर बिजली बेचना क्यों नहीं है कानूनी
काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर की प्रोग्राम लीड भावना त्यागी के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में कोई भी नागरिक आवश्यक सरकारी मंजूरियों या आधिकारिक लाइसेंस के बिना अपनी निजी जमीन अथवा छत पर सोलर पैनल लगाकर सीधे मोहल्ले या गांव के लोगों को बिजली की आपूर्ति नहीं कर सकता। देश में बिजली का वितरण पूरी तरह से कड़े प्रशासनिक और नियामक कानूनों के तहत संचालित होता है।
बिजली की आपूर्ति केवल मान्यता प्राप्त सरकारी ग्रिड और विद्युत वितरण कंपनियों (DISCOMs) के निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत ही की जा सकती है। हालांकि कुछ चुनिंदा स्थानों पर उपभोक्ताओं के बीच आपसी लेनदेन के नए प्रारूपों जैसे पीयर-टू-पीयर (Peer-to-Peer) ट्रेडिंग के पायलट प्रोजेक्ट या ट्रायल चल रहे हैं, लेकिन ये परीक्षण भी सरकारी नियंत्रण और वैधानिक मानकों के अधीन ही आयोजित किए जाते हैं। इनमें भी किसी भी नागरिक को बिना अनुमति सीधे अपनी मर्जी से बिजली बेचने की खुली छूट नहीं मिलती है।
अनधिकृत बिजली वितरण पर होने वाली सख्त कानूनी कार्रवाई
मौजूदा कानूनी व्यवस्था के अनुसार, बिना समुचित प्रशासनिक स्वीकृति के बिजली बेचना या उसे अन्य परिसरों में वितरित करना पूरी तरह गैर-कानूनी गतिविधि मानी जाती है। यदि कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करके अपने सोलर प्लांट से पड़ोस में बिजली की सप्लाई करता हुआ पाया जाता है, तो उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे मामलों में संबंधित विभाग द्वारा भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है, आधिकारिक कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है, स्थापित रूफटॉप सोलर सिस्टम का ग्रिड कनेक्शन काटा जा सकता है, और व्यक्ति के खिलाफ अन्य आवश्यक कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं। इसके अतिरिक्त, यदि उपभोक्ता को सोलर प्लांट लगाने के लिए कोई सरकारी वित्तीय सहायता या सब्सिडी मिली हुई है, तो नियमों का उल्लंघन सिद्ध होने पर वह सब्सिडी भी रोकी या निरस्त की जा सकती है।
बिजली वितरण कंपनियों को अतिरिक्त बिजली बेचने का आधिकारिक रास्ता
यदि आपके घर या जमीन पर स्थापित सोलर पैनल से खपत से ज्यादा बिजली पैदा हो रही है, तो कानून आपको उस अतिरिक्त ऊर्जा से लाभ कमाने का आधिकारिक और सुरक्षित विकल्प देता है। आप इस अतिरिक्त बिजली को बिजली वितरण कंपनियों (DISCOMs) को एक्सपोर्ट या बेच सकते हैं।
इस आधिकारिक व्यवस्था का लाभ उठाने के लिए आपके परिसर में ग्रिड-कनेक्टेड रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित होना अनिवार्य है। ऐसे ढांचे में सरकारी बिजली ग्रिड एक तरह से ऊर्जा भंडारण केंद्र की तरह काम करता है। दिन के समय जब धूप तेज होती है और पैनलों से भरपूर बिजली पैदा होती है, तब घरेलू उपयोग के बाद बची हुई अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेज दी जाती है। इस प्रक्रिया में नेट मीटरिंग व्यवस्था के तहत उपभोक्ता के खाते में बिजली का क्रेडिट दर्ज होता रहता है।
नेट मीटरिंग का हिसाब-किताब और वार्षिक भुगतान
नेट मीटरिंग का पूरा सिस्टम इस बात का सटीक रिकॉर्ड रखता है कि आपने ग्रिड से कितनी बिजली ली और ग्रिड को कितनी अतिरिक्त यूनिट निर्यात की। यह व्यवस्था सर्दियों के मौसम में या उन दिनों में आपके काम आती है जब धूप कम होती है और आपके सोलर पैनल घरेलू जरूरत के अनुसार पर्याप्त बिजली नहीं बना पाते। उस समय आप ग्रिड में जमा किए गए अपने क्रेडिट से बिजली वापस ले सकते हैं।
यदि पूरे साल के चक्र में आपके द्वारा ग्रिड को भेजी गई बिजली की मात्रा आपकी कुल खपत से ज्यादा रह जाती है, तो आप उस बची हुई अतिरिक्त बिजली को बिजली कंपनी को आधिकारिक रूप से बेच सकते हैं। विद्युत वितरण कंपनियां निर्धारित नियमों के तहत हर साल इस अतिरिक्त निर्यातित बिजली का हिसाब करती हैं और उसका नियमानुसार भुगतान सीधे उपभोक्ता को करती हैं। इसलिए पड़ोस में अनधिकृत बिजली सप्लाई का जोखिम उठाने के बजाय अधिकृत ग्रिड प्रक्रिया अपनाना ही सुरक्षित और लाभदायक मार्ग है।


















