हरियाणा के नूंह में एक चलती बस में अचानक गूंजी किलकारी ने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। फिरोजपुर झिरका इलाके में शुक्रवार देर शाम हरियाणा रोडवेज की एक बस में गर्भवती महिला ने अपने बेटे को जन्म दिया। राजस्थान के अलवर से लौट रहे एक परिवार के लिए यह सफर अनिश्चितता और घबराहट से भरा था, लेकिन बस चालक, कंडक्टर और सह-यात्रियों की तत्परता से संकट के समय एक नन्हीं जान सुरक्षित दुनिया में आ सकी।
अस्पताल की जांच के बाद घर लौट रहा था परिवार
फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के वार्ड नंबर-7 में रहने वाले शोयब खान अपनी गर्भवती पत्नी सुमैय्या को लेकर शुक्रवार की सुबह राजस्थान स्थित अलवर के सानिया अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टरों ने वहां महिला की स्वास्थ्य जांच की और अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट देखने के बाद बताया कि डिलीवरी होने में अभी लगभग 15 दिनों की देरी है। अस्पताल से आवश्यक दवाएं लेने के बाद डॉक्टर ने दंपती को वापस घर लौटने की सलाह दी। परिजनों को लगा कि अभी काफी समय शेष है, इसलिए वे निश्चिंत होकर हरियाणा रोडवेज की बस में सवार होकर अपने घर के लिए रवाना हो गए।
रास्ते में अचानक शुरू हुई तेज प्रसव पीड़ा
सफर के दौरान जैसे ही बस रामगढ़ से आगे बढ़ी, सुमैय्या को पेट में असहनीय दर्द महसूस होने लगा। जब गाड़ी नौगांवा के करीब पहुंची, तो दर्द इतना बढ़ गया कि परिजनों के हाथ-पांव फूलने लगे। परिस्थिति की गंभीरता को भांपते हुए शोयब खान ने तुरंत बस परिचालक के पास जाकर अपनी पत्नी की नाजुक हालत के बारे में जानकारी दी। परिचालक ने बिना किसी देरी के चालक कासम को पूरे मामले से अवगत कराया। चालक कासम ने तुरंत निर्णय लिया और यात्रियों से खचाखच भरी बस को बिना समय गंवाए फिरोजपुर झिरका स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की ओर मोड़ दिया।
सह-यात्रियों की मदद से बस में गूंजी किलकारी
स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने से पहले ही बस के भीतर परिस्थितियां काफी बदल गईं। सफर के दौरान ही सुमैय्या की प्रसव पीड़ा बेहद तेज हो गई और उसने सामान्य प्रसव के माध्यम से एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दे दिया। संकट के इस दौर में बस में सवार अन्य महिला यात्रियों ने संवेदनशीलता दिखाते हुए प्रसव की प्रक्रिया में हर संभव सहायता की। महिलाओं के सहयोग और सूझबूझ से यह जटिल प्रक्रिया सुरक्षित संपन्न हो सकी। इधर, चालक कासम ने मात्र 20 मिनट के भीतर पूरी बस को सीधे अस्पताल के परिसर में लाकर खड़ा कर दिया, जहां चिकित्सा टीम तुरंत हरकत में आ गई।
प्राथमिक उपचार के बाद मांडीखेड़ा रेफर
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र फिरोजपुर झिरका के अतिरिक्त एसएमओ डॉ. आदित्य यादव ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि शुक्रवार देर शाम बस में प्रसव होने के बाद जच्चा और बच्चा दोनों को तुरंत केंद्र में भर्ती कराया गया था। वहां मौजूद डॉक्टरों की टीम ने दोनों का प्राथमिक उपचार शुरू किया और स्वास्थ्य स्थिति को स्थिर किया। बाद में, मां और नवजात शिशु को और बेहतर चिकित्सीय देखभाल प्रदान करने के उद्देश्य से देर रात लगभग एक बजे मांडीखेड़ा स्थित अल आफिया अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया, जहां उन्हें आगे के इलाज के लिए स्थानांतरित किया गया।
चालक-परिचालक को सम्मानित करने की उठने लगी मांग
इस पूरी घटना के बाद स्थानीय लोगों और समाजसेवियों ने हरियाणा रोडवेज के कर्मचारियों की जमकर सराहना की है। गांव माहोली के पूर्व सरपंच प्रत्याशी अरशद एडवोकेट ने चालक कासम और कंडक्टर की त्वरित कार्रवाई की तारीफ की। उन्होंने मांग रखी कि परिवहन विभाग को संकट के समय असाधारण सूझबूझ और मानवीय संवेदना दिखाने वाले इन दोनों कर्मचारियों को आधिकारिक रूप से सम्मानित करना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि रोडवेज प्रशासन को बस में जन्म लेने वाले इस नवजात बालक की आगे की शिक्षा का पूरा खर्च उठाने पर भी सकारात्मक रूप से विचार करना चाहिए।






















