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नागालैंड में निर्माण श्रमिकों के लिए लेबरचौक मोबाइल ऐप हुआ लॉन्च, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ेंगे मजदूरनागालैंड
3 सित॰ 2026, 8:58 pm (4 घंटे पहले)· 0

नागालैंड में निर्माण श्रमिकों के लिए लेबरचौक मोबाइल ऐप हुआ लॉन्च, रोजगार और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ेंगे मजदूर

नागालैंड सरकार ने राज्य के निर्माण श्रमिकों को रोजगार और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जोड़ने के लिए लेबरचौक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। कोहिमा में मुख्य सचिव सेंतियंगर इमचेन द्वारा जारी किया गया यह डिजिटल प्लेटफॉर्म पंजीकृत मजदूरों और नियोक्ताओं के बीच सीधा संपर्क स्थापित करेगा।

नागालैंड सरकार ने बुधवार को 'नागालैंड लेबरचौक' मोबाइल एप्लीकेशन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों के लिए रोजगार सेवाओं को आधुनिक बनाना और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक उनकी पहुंच को आसान बनाना है। राजधानी कोहिमा स्थित मुख्य सचिव सम्मेलन कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान मुख्य सचिव सेंतियंगर इमचेन ने इस ऐप का उद्घाटन किया।

परंपरागत लेबर चौक व्यवस्था का डिजिटलीकरण

श्रम विभाग द्वारा नागालैंड भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के माध्यम से तैयार की गई यह तकनीक-आधारित पहल पंजीकृत मजदूरों और नियोक्ताओं को एक साझा मंच प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य चौराहों पर लगने वाले पारंपरिक लेबर चौकों को एक अधिक सम्मानजनक, व्यवस्थित और डिजिटल रूप से सक्षम प्लेटफॉर्म में बदलना है। इस व्यवस्था से दैनिक मजदूरी की तलाश में सुबह चौराहों पर खड़े होने वाले मजदूरों को मोबाइल तकनीक के माध्यम से पारदर्शी अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

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मजदूरों और नियोक्ताओं के लिए पंजीकरण प्रक्रिया

निर्माण श्रमिक नागालैंड लेबरचौक ऐप को गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करके अपना पंजीकरण करा सकते हैं। ऐप में रजिस्ट्रेशन के बाद मजदूरों को नए काम के अवसरों के साथ-साथ राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजनाओं और कौशल विकास कार्यक्रमों से सीधे जुड़ने का मौका मिलेगा। वहीं, निर्माण कार्यों के लिए मजदूरों को काम पर रखने वाले नियोक्ता आधिकारिक पोर्टल labourchowk.nagaland.gov.in के माध्यम से खुद को पंजीकृत और लॉगिन कर सकते हैं। इस वेब पोर्टल के जरिए नियोक्ता अपनी जरूरत के अनुसार पंजीकृत कारीगरों और मजदूरों को आसानी से खोज सकते हैं।

पारदर्शिता और त्वरित सेवा वितरण

यह प्लेटफॉर्म निर्माण क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और सेवाओं के वितरण में सुधार लाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। डिजिटल प्रणाली के माध्यम से मजदूरों के पंजीकरण, जॉब सर्च और श्रम नियोजन की पूरी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। एक ही सिंगल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोजगार, कल्याणकारी लाभ और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध होने से पूरे नागालैंड में निर्माण कार्य से जुड़े हजारों श्रमिकों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

नागालैंड लेबरचौक ऐप क्या है?
यह नागालैंड सरकार द्वारा लॉन्च किया गया एक मोबाइल ऐप है, जो निर्माण श्रमिकों को रोजगार खोजने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मदद करता है।
लेबरचौक एप्लीकेशन का उद्घाटन किसने किया?
कोहिमा स्थित मुख्य सचिव सम्मेलन कक्ष में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्य सचिव सेंतियंगर इमचेन ने इस ऐप का औपचारिक शुभारंभ किया।
निर्माण श्रमिक इस प्लेटफॉर्म पर कैसे पंजीकरण कर सकते हैं?
निर्माण मजदूर गूगल प्ले स्टोर से नागालैंड लेबरचौक ऐप डाउनलोड करके अपना रजिस्ट्रेशन पूरा कर सकते हैं।
नियोक्ता मजदूरों को काम पर रखने के लिए किस पोर्टल का उपयोग कर सकते हैं?
नियोक्ता आधिकारिक वेब पोर्टल labourchowk.nagaland.gov.in पर जाकर पंजीकरण और लॉगिन करके मजदूरों से संपर्क कर सकते हैं।
यह योजना किस सरकारी बोर्ड के तहत शुरू की गई है?
यह पहल श्रम विभाग द्वारा नागालैंड भवन एवं अन्य निर्माण मजदूर कल्याण बोर्ड के माध्यम से संचालित की जा रही है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·3 घंटे पहले

यह डिजिटल पहल कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। पारंपरिक लेबर चौकों पर अक्सर बिचौलियों के शोषण और पहचान से जुड़े विवादों के कारण कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होती थी। इस ऐप के माध्यम से नियोक्ताओं और मजदूरों का डिजिटल डेटाबेस तैयार होने से आपराधिक तत्वों की पहचान आसान होगी, श्रम बाजार में पारदर्शिता आएगी और श्रमिकों का शोषण रुकेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

यह गवर्नेंस के लिहाज से एक दूरदर्शी कदम है, जो अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक अर्थव्यवस्था के दायरे में लाता है। जब निर्माण श्रमिक डेटाबेस से जुड़ते हैं, तो नीति निर्माताओं के लिए लक्षित कल्याणकारी योजनाएं बनाना आसान हो जाता है। आगे चलकर इस मॉडल को अन्य राज्यों में भी लागू किया जा सकता है, बशर्ते डिजिटल साक्षरता और कनेक्टिविटी की जमीनी बाधाओं को समय पर दूर किया जाए।

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