नगालैंड के कोहिमा जिले के तीन अलग-अलग गांवों में अफ्रीकन स्वाइन फीवर फैलने की पुष्टि के बाद स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग के तहत मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी के कार्यालय से प्राप्त प्रयोगशाला जांच रिपोर्ट में स्वाइन फीवर वायरस की पुष्टि हुई, जिसके तुरंत बाद जिला प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाते हुए यह कदम उठाया।
संक्रमित क्षेत्र और पाबंदियों का दायरा
प्रयोगशाला से जांच परिणाम पॉजिटिव आने के बाद कोहिमा के डिप्टी कमिश्नर बी. हेनोक बुचम ने एक आधिकारिक आदेश जारी किया। इस आदेश के तहत बीमारी से प्रभावित किरुफेमा बावे, चिएचामा और नेरहेमा गांवों में संक्रमण स्थल के 1 किलोमीटर के दायरे को 'संक्रमित क्षेत्र' घोषित किया गया है। इसके साथ ही संक्रमण केंद्र से 10 किलोमीटर तक की परिधि वाले इलाके को 'निगरानी क्षेत्र' के रूप में चिह्नित किया गया है।
तत्काल प्रभाव से लागू हुए इस सरकारी आदेश के तहत चिह्नित दोनों क्षेत्रों के भीतर, बाहर या आपस में जीवित सूअरों और उनके मांस या उससे बने उत्पादों के परिवहन, आयात और निर्यात पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। बीमारी के प्रसार को रोकने के उद्देश्य से प्रभावित इलाकों में चलने वाले सभी मांस बाज़ारों और कसाई की दुकानों को तुरंत बंद करने के निर्देश दिए गए हैं।
किसानों के लिए बायोसिक्योरिटी निर्देश और शव निस्तारण
पशुपालन विभाग ने क्षेत्र के सूअर पालकों को अपने फार्म पर सख्त जैविक सुरक्षा उपाय अपनाने की सलाह दी है। किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे फार्म में बाहरी लोगों के प्रवेश पर कड़ाई से रोक लगाएं और रोजाना परिसरों में कीटाणुनाशक दवाओं का छिड़काव करें। यदि किसी जानवर में बीमारी के असामान्य लक्षण दिखें या अचानक मौत हो, तो उसकी सूचना तुरंत पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवा विभाग को देने को कहा गया है।
आदेश में मृत मवेशियों के सुरक्षित निस्तारण को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं। मृत सूअरों को आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षित रूप से जमीन में दफनाने का आदेश दिया गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है कि मृत जानवरों के शवों को खुले स्थानों या जल निकायों में फेंकना सख्त मना है।
जनता के लिए चेतावनी और कानूनी कार्रवाई
प्रशासन ने आम नागरिकों से भी सतर्क रहने और अनजान या असत्यापित स्रोतों से मांस खरीदने या खाने से बचने की अपील की है। जिला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि सरकारी पाबंदियों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ 'पशुओं में संक्रामक एवं छूत के रोगों की रोकथाम और नियंत्रण अधिनियम, 2009' और अन्य संबंधित कानूनों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
















