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नागालैंड में रबर खेती की समीक्षा, राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बुनियादी ढांचे और उत्पादन आंकड़ों का लिया जायजानागालैंड
3 सित॰ 2026, 12:18 pm (1 घंटे पहले)· 0

नागालैंड में रबर खेती की समीक्षा, राज्यपाल नंद किशोर यादव ने बुनियादी ढांचे और उत्पादन आंकड़ों का लिया जायजा

नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने लोक भवन में आयोजित बैठक में रबर उत्पादन, प्रसंस्करण केंद्रों और ड्रोन छिड़काव जैसी प्रमुख पहलों की समीक्षा की।

कोहिमा स्थित लोक भवन में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान नागालैंड के राज्यपाल नंद किशोर यादव ने राज्य में रबर की खेती की प्रगति और इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की गहन समीक्षा की। दीमापुर स्थित रबर बोर्ड क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों ने राज्यपाल को नागालैंड के विभिन्न जिलों में रबर बागानों की मौजूदा स्थिति, कुल उत्पादन, बुनियादी ढांचे के विकास, किसान प्रशिक्षण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

रबर उत्पादन और बागानों के क्षेत्र का आंकड़ेवार विवरण

समीक्षा बैठक में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल 29,794.39 हेक्टेयर क्षेत्र में रबर की खेती की जा रही थी। इस कुल कृषि क्षेत्र में से 11,977.71 हेक्टेयर हिस्से में परिपक्व बागान शामिल थे, जहां से रबर का दोहन किया जा रहा है, जबकि 17,816.68 हेक्टेयर क्षेत्र में अपरिपक्व बागान मौजूद थे। उत्पादन क्षमता की बात करें तो राज्य में कुल 13,617.21 मीट्रिक टन रबर का उत्पादन दर्ज किया गया, जिससे प्रति हेक्टेयर औसत उत्पादकता 1,166.03 किलोग्राम दर्ज की गई।

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रबर बोर्ड की प्रमुख पहल और प्रसंस्करण केंद्रों का विकास

बैठक में रबर बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों की प्रगति का भी जायजा लिया गया। इनमें मुख्य रूप से इंडियन नेचुरल रबर ऑपरेशन्स फॉर असिस्टेड डेवलपमेंट यानी INROAD प्रोजेक्ट शामिल है। इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर रबर बागानों के विकास को बढ़ावा देना और रबर पारिस्थिकी तंत्र को मजबूत करना है, ताकि स्थानीय किसानों की आजीविका में सुधार के साथ-साथ टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिल सके।

अधिकारियों ने राज्यपाल को बताया कि व्यक्तिगत किसानों की प्रसंस्करण लागत को कम करने और रबर शीट की गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए समूह प्रसंस्करण केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। ये केंद्र किसानों को सामूहिक रूप से रबर प्रसंस्करण की सुविधा प्रदान करते हैं। इसके अलावा, क्षमता निर्माण के तहत किसानों को आधुनिक तकनीकों से अवगत कराने के लिए ऑन-फील्ड प्रशिक्षण, व्यावहारिक प्रदर्शन, जागरूकता कार्यक्रम और शैक्षणिक दौरों का आयोजन लगातार किया जा रहा है।

टैपर्स का कौशल विकास और ड्रोन तकनीक से रोग नियंत्रण

राज्य में प्रशिक्षित रबर टैपर्स की कमी को दूर करने के उद्देश्य से रबर बोर्ड ने टैपर्स इंटेंसिव स्किल इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम (TISP) के कार्यान्वयन में तेजी लाई है। इस कार्यक्रम के जरिए स्थानीय युवाओं और श्रमिकों को वैज्ञानिक तरीके से रबर निकालने की व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है। वहीं दूसरी ओर, बागानों को बीमारियों से बचाने के लिए आधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। रबर के पेड़ों में होने वाली एब्नॉर्मल लीफ फॉल बीमारी से निपटने के लिए वोखा, पेरेन और निउलैंड जिलों के चयनित क्षेत्रों में 171.15 हेक्टेयर बागानों पर ड्रोन से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव किया गया है।

क्षेत्रीय चुनौतियां और भविष्य की कार्ययोजना

समीक्षा के दौरान रबर क्षेत्र के सामने आ रही मुख्य व्यावहारिक चुनौतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। राज्य में खराब ग्रामीण सड़क संपर्क, कुशल टैपर्स की कमी, दूसरे राज्यों से आने वाले श्रमिकों पर अत्यधिक निर्भरता, सीमित बाजार पहुंच और जंगली जानवरों द्वारा रबर बागानों को पहुंचाए जाने वाले नुकसान को प्रमुख बाधाओं के रूप में चिन्हित किया गया।

भविष्य की योजनाओं को साझा करते हुए रबर बोर्ड के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि किसान शिक्षा, कौशल विकास और समूह प्रसंस्करण केंद्रों के विस्तार का काम जारी रहेगा। बोर्ड नागालैंड सरकार के भूमि संसाधन विभाग के साथ मिलकर समन्वय से काम करेगा। इसके साथ ही, पूर्वोत्तर में रबर खेती के दायरे को और बढ़ाने के लिए प्रस्तावित INROAD 2.0 पहल के तहत अपनी गतिविधियों के विस्तार की तैयारियां भी की जा रही हैं।

सवाल-जवाब

31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल कितने क्षेत्र में रबर की खेती दर्ज की गई?
31 मार्च 2026 तक नागालैंड में कुल 29,794.39 हेक्टेयर क्षेत्र में रबर की खेती दर्ज की गई, जिसमें 11,977.71 हेक्टेयर परिपक्व और 17,816.68 हेक्टेयर अपरिपक्व बागान शामिल हैं।
समीक्षा बैठक के अनुसार नागालैंड में रबर का कुल उत्पादन कितना रहा?
राज्य में कुल 13,617.21 मीट्रिक टन रबर का उत्पादन हुआ, जिसकी औसत उत्पादकता 1,166.03 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर दर्ज की गई।
INROAD परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इंडियन नेचुरल रबर ऑपरेशन्स फॉर असिस्टेड डेवलपमेंट (INROAD) परियोजना का उद्देश्य पूर्वोत्तर भारत में बड़े पैमाने पर रबर बागानों का विस्तार करना और किसानों की आजीविका में सुधार करना है।
रबर बागानों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल किस काम के लिए किया गया?
वोखा, पेरेन और निउलैंड जिलों के 171.15 हेक्टेयर क्षेत्र में एब्नॉर्मल लीफ फॉल बीमारी से निपटने के लिए ड्रोन से कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव किया गया।
नागालैंड में रबर क्षेत्र के सामने मुख्य चुनौतियां क्या हैं?
प्रमुख चुनौतियों में खराब ग्रामीण सड़कें, कुशल टैपर्स की कमी, बाहरी मजदूरों पर निर्भरता, सीमित बाजार पहुंच और जंगली जानवरों द्वारा बागानों को पहुंचाया जाने वाला नुकसान शामिल हैं।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

पूर्वोत्तर में रबर खेती का विस्तार और ड्रोन जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग कृषि विकास और ग्रामीण आजीविका के लिहाज से एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, अपराध और सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह महत्वपूर्ण है कि इन दूरदराज के बागानों और प्रसंस्करण केंद्रों पर स्थानीय प्रशासन सुरक्षा और श्रम कानूनों की पारदर्शी निगरानी रखे, ताकि भूमि उपयोग और आर्थिक योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता या शोषण की गुंजाइश न बचे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

यह पहल पूर्वोत्तर राज्यों की आर्थिकी को मुख्यधारा से जोड़ने में मील का पत्थर साबित हो सकती है, बशर्ते इसका लाभ दूरदराज के छोटे किसानों तक पारदर्शी ढंग से पहुंचे। उत्पादन और प्रसंस्करण के आंकड़ों में दिख रही यह वृद्धि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होने के साथ ही पलायन जैसी समस्याओं पर लगाम कसने में मदद मिलेगी।

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