हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक रूप देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्माण कार्य प्रगति पर है। बिंद्रावणी क्षेत्र में बन रही ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी पूरे उत्तरी भारत में अपनी तरह का पहला ऐसा जंक्शन है, जिसे पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह अनोखा स्ट्रक्चर चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे को आपस में एक सुगम नेटवर्क के जरिए जोड़ने का काम करेगा। निर्माण पूरा होने के बाद इस चौराहे पर वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।
बिना ट्रैफिक सिग्नल के निरंतर जारी रहेगा वाहनों का सफर
आमतौर पर जब दो या उससे अधिक मुख्य मार्ग किसी एक बिंदु पर आकर मिलते हैं, तो वहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक लाइट्स लगाई जाती हैं। इसके कारण वाहन चालकों को सिग्नल पर रुकना पड़ता है और पहाड़ी रास्तों पर लंबा जाम लग जाता है। बिंद्रावणी में तैयार की जा रही ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी इस समस्या का स्थाई समाधान पेश करेगी। इस उन्नत चौराहे की संरचना ऐसी रखी गई है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को कहीं भी रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर सुरक्षित बनेगा।
पांच समर्पित रैंप से नियंत्रित होगी आवाजाही
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरूण चारी के अनुसार, इस पूरे रोटरी ढांचे में कुल पांच रैंप शामिल किए गए हैं। इनमें से दो रैंप चंडीगढ़-मनाली मार्ग पर वाहनों के चढ़ने और उतरने के लिए बनाए जा रहे हैं, जबकि दो अन्य रैंप पठानकोट-मंडी मार्ग के यातायात को संभालेंगे। इसके अलावा, मंडी शहर में सीधे प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले चालकों के लिए एक पांचवां समर्पित रैंप भी तैयार किया जा रहा है। यह व्यवस्था शहर के भीतर स्थानीय यातायात के दबाव को कम करने में बेहद मददगार साबित होगी।
ऊंचाई के भारी अंतर को पाटने के लिए चुना गया एलिवेटिड डिजाइन
इस प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही संस्था गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के जीएम विकास नागर ने बताया कि दोनों प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ना एक बेहद जटिल इंजीनियरिंग कार्य था। निर्माण स्थल पर एक हाईवे की ऊंचाई काफी अधिक थी, जबकि दूसरा हाईवे बहुत नीचे स्तर पर स्थित था। इस बड़े भौगोलिक अंतर के कारण पारंपरिक समतल जंक्शन बनाना संभव नहीं था। परिस्थितियों को देखते हुए एनएचएआई ने ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी बनाने का निर्णय लिया।
मार्च 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, 50 फीसदी से अधिक काम संपन्न
पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे इस रोटरी का निर्माण कार्य अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था। विकास नागर के मुताबिक, वर्तमान में 50 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। पूरी परियोजना को मार्च 2027 तक मुकम्मल करने का लक्ष्य तय किया गया है। यद्यपि वर्तमान में जारी निर्माण कार्य के चलते स्थानीय निवासियों और यात्रियों को यातायात में आंशिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भविष्य में इसके शुरू होने से दोनों हाईवे पर वाहनों का संचालन पूरी तरह से सुगम हो जाएगा।





















