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पहाड़ी क्षेत्र में तैयार हो रहा अनूठा एलिवेटिड रोटरी जंक्शन, बिंद्रावणी के पास बिना रुके जुड़ेंगे चंडीगढ़ मनाली और पठानकोट मंडी मार्गहिमाचल प्रदेश
2 सित॰ 2026, 10:09 am (65 दिन पहले)· 1

पहाड़ी क्षेत्र में तैयार हो रहा अनूठा एलिवेटिड रोटरी जंक्शन, बिंद्रावणी के पास बिना रुके जुड़ेंगे चंडीगढ़ मनाली और पठानकोट मंडी मार्ग

हिमाचल प्रदेश के मंडी स्थित बिंद्रावणी में उत्तर भारत की पहली ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी का निर्माण 50 प्रतिशत से अधिक पूरा हो चुका है। एनएचएआई का यह प्रोजेक्ट चंडीगढ़ मनाली और पठानकोट मंडी हाईवे को बिना ट्रैफिक सिग्नल के जोड़ेगा।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में राष्ट्रीय राजमार्गों के बुनियादी ढांचे को आधुनिक रूप देने के लिए एक ऐतिहासिक निर्माण कार्य प्रगति पर है। बिंद्रावणी क्षेत्र में बन रही ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी पूरे उत्तरी भारत में अपनी तरह का पहला ऐसा जंक्शन है, जिसे पहाड़ी क्षेत्र की भौगोलिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यह अनोखा स्ट्रक्चर चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे को आपस में एक सुगम नेटवर्क के जरिए जोड़ने का काम करेगा। निर्माण पूरा होने के बाद इस चौराहे पर वाहनों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी।

बिना ट्रैफिक सिग्नल के निरंतर जारी रहेगा वाहनों का सफर

आमतौर पर जब दो या उससे अधिक मुख्य मार्ग किसी एक बिंदु पर आकर मिलते हैं, तो वहां यातायात को नियंत्रित करने के लिए ट्रैफिक लाइट्स लगाई जाती हैं। इसके कारण वाहन चालकों को सिग्नल पर रुकना पड़ता है और पहाड़ी रास्तों पर लंबा जाम लग जाता है। बिंद्रावणी में तैयार की जा रही ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी इस समस्या का स्थाई समाधान पेश करेगी। इस उन्नत चौराहे की संरचना ऐसी रखी गई है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों को कहीं भी रुकने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों का समय बचेगा और सफर सुरक्षित बनेगा।

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पांच समर्पित रैंप से नियंत्रित होगी आवाजाही

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर वरूण चारी के अनुसार, इस पूरे रोटरी ढांचे में कुल पांच रैंप शामिल किए गए हैं। इनमें से दो रैंप चंडीगढ़-मनाली मार्ग पर वाहनों के चढ़ने और उतरने के लिए बनाए जा रहे हैं, जबकि दो अन्य रैंप पठानकोट-मंडी मार्ग के यातायात को संभालेंगे। इसके अलावा, मंडी शहर में सीधे प्रवेश करने की इच्छा रखने वाले चालकों के लिए एक पांचवां समर्पित रैंप भी तैयार किया जा रहा है। यह व्यवस्था शहर के भीतर स्थानीय यातायात के दबाव को कम करने में बेहद मददगार साबित होगी।

ऊंचाई के भारी अंतर को पाटने के लिए चुना गया एलिवेटिड डिजाइन

इस प्रोजेक्ट का निर्माण कर रही संस्था गावर कंस्ट्रक्शन लिमिटेड के जीएम विकास नागर ने बताया कि दोनों प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ना एक बेहद जटिल इंजीनियरिंग कार्य था। निर्माण स्थल पर एक हाईवे की ऊंचाई काफी अधिक थी, जबकि दूसरा हाईवे बहुत नीचे स्तर पर स्थित था। इस बड़े भौगोलिक अंतर के कारण पारंपरिक समतल जंक्शन बनाना संभव नहीं था। परिस्थितियों को देखते हुए एनएचएआई ने ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी बनाने का निर्णय लिया।

मार्च 2027 तक पूरा होगा प्रोजेक्ट, 50 फीसदी से अधिक काम संपन्न

पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे परियोजना के अंतर्गत बनाए जा रहे इस रोटरी का निर्माण कार्य अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था। विकास नागर के मुताबिक, वर्तमान में 50 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है। पूरी परियोजना को मार्च 2027 तक मुकम्मल करने का लक्ष्य तय किया गया है। यद्यपि वर्तमान में जारी निर्माण कार्य के चलते स्थानीय निवासियों और यात्रियों को यातायात में आंशिक असुविधा का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन भविष्य में इसके शुरू होने से दोनों हाईवे पर वाहनों का संचालन पूरी तरह से सुगम हो जाएगा।

सवाल-जवाब

उत्तर भारत की पहली ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी कहां बनाई जा रही है?
यह रोटरी हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में स्थित बिंद्रावणी क्षेत्र में बनाई जा रही है।
यह रोटरी किन राष्ट्रीय राजमार्गों को आपस में जोड़ेगी?
यह ओवरहैड रोटरी चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी नेशनल हाईवे को आपस में कनेक्ट करेगी।
साधारण जंक्शन के बजाय ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी क्यों चुनी गई?
दोनों हाईवे की ऊंचाई में काफी अंतर होने के कारण समतल चौराहा बनाना संभव नहीं था, इसलिए एनएचएआई ने एलिवेटिड रोटरी बनाने का निर्णय लिया।
इस रोटरी प्रोजेक्ट में कुल कितने रैंप बनाए जा रहे हैं?
इसमें कुल पांच रैंप बन रहे हैं, जिनमें दो चंडीगढ़-मनाली मार्ग, दो पठानकोट-मंडी मार्ग और एक मंडी शहर में प्रवेश के लिए है।
प्रोजेक्ट का निर्माण कब शुरू हुआ था और यह कब तक पूरा होगा?
इसका निर्माण अप्रैल 2025 में शुरू हुआ था, 50 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और मार्च 2027 तक इसे पूरा करने का लक्ष्य है।
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टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·65 दिन पहले

हिमाचल प्रदेश के मंडी में बन रही यह उत्तर भारत की पहली ओवरहैड एलिवेटिड रोटरी पहाड़ी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास का एक नया मॉडल पेश करती है। ऊंचाई के भारी अंतर को पाटने के लिए पांच समर्पित रैंप और बिना ट्रैफिक सिग्नल के आवाजाही की यह तकनीक भविष्य में अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए भी मील का पत्थर साबित हो सकती है, जिससे पर्यटन और परिवहन दोनों को दीर्घकालिक गति मिलेगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·65 दिन पहले

चंडीगढ़-मनाली और पठानकोट-मंडी राजमार्गों पर इस पांच-रैंप वाली एलिवेटिड रोटरी से न केवल आवाजाही सुगम होगी, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर होने वाली सड़क दुर्घटनाओं और यातायात अवरोधों पर भी लगाम लगेगी। इस तरह की आधुनिक इंजीनियरिंग से पर्वतीय मार्गों पर कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा प्रबंधन में भी बड़ी मदद मिलेगी, क्योंकि आपातकालीन वाहनों का आवागमन बिना किसी बाधा के सुनिश्चित हो सकेगा।

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