टाटा संस की अर्जी रिजर्व बैंक ने की खारिज, अब शेयर बाजार में दस्तक देने के अलावा नहीं बचा कोई रास्ताबेंगलुरु की लापता छात्रा को खोजने में मददगार बना सरकारी योजना का ओटीपी, सहेली की तलाश में जुटी सीआईडीबाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ितवृषभ राशिफल 13 सितंबर: इस एक आदत से आज चमकेगा भाग्य, जानें अपना पूरा दैनिक भविष्यफलरसोई की काली और चिकनी छन्नी को चमकाने के 4 आसान घरेलू नुस्खे, ऐसे करें साफपश्चिम बंगाल में असली तृणमूल कांग्रेस पर संग्राम, ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के सामने 'जोड़ाफूल' चुनाव चिह्न पर जताया दावाकॉर्नेल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ने जताई गहरी चिंता, गणित के क्षेत्र में एआई की तेज तरक्की से वैज्ञानिक सहमेदिल्ली में अफगानिस्तान के खिलाफ इतिहास रच सकते हैं वैभव सूर्यवंशी, वीरेंद्र सहवाग का यह बड़ा रिकॉर्ड निशाने परग्रैंड थेफ्ट ऑटो VI की रिलीज से पहले क्यों भड़क उठा है दक्षिणपंथी धड़ा? जानें सोशल मीडिया पर जारी इस विवाद की असल वजहमूलांक 8 के जातक: शनि की कृपा से जीवन में अपार सफलता पाने वाले लोगों के छिपे हुए गुण
आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद मिर्जापुर का लहुरिया दह गांव आया चर्चा में, पानी की समस्या दूर करने पर ग्रामीणों ने किया यादउत्तर प्रदेश
3 सित॰ 2026, 9:02 am (10 दिन पहले)· 1

आईएएस दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद मिर्जापुर का लहुरिया दह गांव आया चर्चा में, पानी की समस्या दूर करने पर ग्रामीणों ने किया याद

आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले का लहुरिया दह गांव सुर्खियों में है। आजादी के बाद पहली बार गांव में नल से पानी पहुंचाने की पहल करने पर स्थानीय ग्रामीण उनके प्रशासनिक कार्यों की सराहना कर रहे हैं।

आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा प्रशासनिक सेवा से इस्तीफा देने के बाद उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में स्थित लहुरिया दह गांव एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अपने इस्तीफे के उपरांत सोशल मीडिया पर साझा की गई एक पोस्ट में उन्होंने इस दूरस्थ गांव का विशेष रूप से उल्लेख किया था। आजादी के बाद से कई दशकों तक पीने के साफ पानी की भारी किल्लत झेल रहे इस गांव के निवासियों तक नल के जरिए जल पहुंचाने का श्रेय दिव्या मित्तल के प्रशासनिक प्रयासों को दिया जाता है। इस फैसले के सामने आने के बाद गांव की महिलाएं और बुजुर्ग उनके काम को याद कर भावुक हो रहे हैं।

वर्षों पुरानी पेयजल किल्लत और नल से जल आपूर्ति का सफर

लहुरिया दह गांव में आजादी के बाद से ही स्वच्छ पेयजल की गंभीर समस्या बनी हुई थी। स्थानीय निवासियों को प्रतिदिन पीने का पानी जुटाने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ती थी। गांव की सुखराजी देवी ने इस विकट परिस्थिति को याद करते हुए बताया कि पानी लाने के लिए ग्रामीणों को अपने घरों से कई किलोमीटर दूर तक पैदल जाना पड़ता था। रोजाना की इस समस्या से ग्रामीण बेहद परेशान थे। जब दिव्या मित्तल मिर्जापुर की जिलाधिकारी के रूप में पदस्थ हुईं, तो उन्होंने इस क्षेत्र में पीने के पानी की समस्या का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में ठोस पहल की। उनके प्रयासों के फलस्वरूप गांव में पहली बार पाइपलाइन और नल के माध्यम से घर-घर जल पहुंचना संभव हो सका। सुखराजी देवी के अनुसार, जिले में पूर्व में किसी भी प्रशासनिक अधिकारी ने इस स्तर पर पहुंचकर इतना प्रभावी कार्य नहीं किया था।

ये भी पढ़ें

5 किलोमीटर दूर से मटका लेकर पानी लाते थे ग्रामीण

गांव के निवासी रमेश यादव ने अपनी पुरानी समस्याओं का जिक्र करते हुए बताया कि नल की सुविधा उपलब्ध होने से पहले ग्रामीणों का जीवन बेहद कठिन था। लोगों को पीने का पानी लाने के लिए हाथ में मटका लेकर लगभग 5 किलोमीटर दूर स्थित जल स्रोतों तक जाना पड़ता था। इस दैनिक प्रक्रिया में ग्रामीणों का काफी समय और ऊर्जा नष्ट होती थी। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारी के रूप में दिव्या मित्तल ने ग्रामीणों के इस कष्ट को समझा और व्यक्तिगत रुचि लेकर गांव तक नल का पानी पहुंचाया। अब गांव के प्रत्येक घर में नल से शुद्ध जल उपलब्ध हो रहा है, जिससे लोग बेहद संतुष्ट और प्रसन्न हैं। रमेश यादव ने यह इच्छा भी जताई कि दिव्या मित्तल को दोबारा प्रशासनिक सेवा में लौटकर जनसेवा के कार्य आगे बढ़ाने चाहिए।

नेताओं के वादों के बीच प्रशासनिक तत्परता की मिसाल

गांव की बुजुर्ग महिला दूईजी देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समय-समय पर कई राजनीतिक नेता गांव में आए और बड़ी-बड़ी बातें करके चले गए, लेकिन धरातल पर किसी ने कोई ठोस काम नहीं किया। उन्होंने बताया कि जब दिव्या मित्तल पहली बार गांव के दौरे पर आई थीं, तो उन्होंने तुरंत समस्या को समझा और पहली ही बार में पानी पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। जब पूर्व में जिलाधिकारी गांव आई थीं, तब दूईजी देवी ने उन्हें और उनके परिवार को ढेरों आशीर्वाद दिए थे। आज भी गांव की महिलाएं उन्हें याद करती हैं और मानती हैं कि जो सेवा उन्होंने गांव के लिए की है, उसके बदले ग्रामीण भी उनके प्रति आदर और सम्मान व्यक्त करना चाहते हैं।

इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया पोस्ट से फिर जागा जुड़ाव

दिव्या मित्तल ने प्रशासनिक सेवा से अपने त्यागपत्र के बाद जब लहुरिया दह गांव की स्थिति और वहां के लोगों के संघर्ष का जिक्र सोशल मीडिया पर किया, तो गांव में पुरानी यादें ताजा हो गईं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक पदों पर रहते हुए कई अधिकारी आते-जाते हैं, लेकिन जनता के दिल में वही जगह बना पाते हैं जो उनके बुनियादी दुखों का निवारण करते हैं। लहुरिया दह के लोग आज भी उनके द्वारा किए गए भागीरथ प्रयास की सराहना कर रहे हैं और उनके सुखद भविष्य की कामना कर रहे हैं।

सवाल-जवाब

मिर्जापुर का लहुरिया दह गांव क्यों चर्चा में आया?
आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल द्वारा इस्तीफा देने के बाद सोशल मीडिया पर इस गांव का जिक्र करने और वहां पानी पहुंचाने के उनके प्रयासों के कारण यह गांव चर्चा में आया।
लहुरिया दह गांव में पानी की क्या समस्या थी?
आजादी के बाद से ही इस गांव में नल का पानी नहीं पहुंच सका था और निवासियों को कई किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ता था।
दिव्या मित्तल ने ग्रामीणों के लिए क्या कदम उठाया था?
मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए दिव्या मित्तल ने त्वरित प्रयास करके गांव में पाइपलाइन बिछवाई और घर-घर नल से पानी पहुंचाया।
ग्रामीणों का दिव्या मित्तल के काम पर क्या कहना है?
दूईजी देवी, सुखराजी देवी और रमेश यादव सहित ग्रामीणों ने बताया कि कई नेताओं के वादों के बावजूद दिव्या मित्तल ने पहली बार में ही पानी पहुंचाया, जिसके लिए वे उनका आभार व्यक्त करते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·9 दिन पहले

यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे जमीनी स्तर पर एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी का निर्णय दशकों पुरानी समस्याओं को बदल सकता है। राजनीतिक वादों से परे जाकर नौकरशाही जब जनहित को प्राथमिकता देती है, तो जनता का विश्वास व्यवस्था पर अटूट हो जाता है। दिव्या मित्तल का लहुरिया दह गांव में नल से जल पहुंचाना यह साबित करता है कि दूरदराज के इलाकों में भी प्रभावी शासन व्यवस्था वास्तविक बदलाव ला सकती है। भविष्य में प्रशासनिक सुधारों और अधिकारी-जनता के संबंधों पर इसके गहरे प्रभाव पड़ेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

एक क्राइम और गवर्नेंस रिपोर्टर के तौर पर मेरा मानना है कि जब तक बुनियादी हक जैसे पानी के अधिकार को कानून और नीतिगत प्राथमिकताओं में नहीं जोड़ा जाता, तब तक व्यवस्था अधूरी है। लहुरिया दह का यह मामला सिर्फ एक प्रशासनिक सफलता नहीं है, बल्कि यह स्पष्ट करता है कि लोक सेवक जब दायित्व बोध के साथ काम करते हैं, तो आपराधिक उपेक्षा या प्रशासनिक उदासीनता के चक्र को तोड़ा जा सकता है। ऐसे फैसले भविष्य में नौकरशाही और जनता के बीच जवाबदेही तय करने का एक मजबूत मानदंड बनेंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR